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रक्षाबंधन एड विवाद पर छलका कृति सेनन का दर्द, बोलीं- 'चोली' पर प्राइम-टाइम डिबेट

रक्षाबंधन एड विवाद पर छलका कृति सेनन का दर्द, बोलीं- 'चोली' पर प्राइम-टाइम डिबेट

सिनेमा जगत में सितारों का जीवन जितना चकाचौंध से भरा हुआ दिखाई देता है, पर्दे के पीछे उतनी ही कड़ी परीक्षाओं और आलोचनाओं से भी उन्हें गुजरना पड़ता है। हाल ही में बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्री कृति सेनन ने एक ऐसे ही पुराने और बेहद विवादित मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसने एक समय पर सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के समाचार चैनलों तक भूचाल ला दिया था। मामला एक रक्षाबंधन के विज्ञापन (Advertisement) से जुड़ा हुआ है, जिसमें अभिनेत्री के पहनावे को लेकर समाज के एक वर्ग ने तीखी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

जब एक विज्ञापन बन गया राष्ट्रीय बहस का मुद्दा

अक्टूबर 2026 के इन दिनों में जब पुरानी घटनाओं और सेलिब्रिटी अनुभवों पर नए सिरे से मंथन हो रहा है, तो कृति सेनन का यह बयान काफी प्रासंगिक माना जा रहा है। हाल ही में कृति सेनन जानी-मानी अभिनेत्री करीना कपूर खान के लोकप्रिय चैट शो 'व्हाट वुमन वांट' के सीजन 6 में बतौर मेहमान शामिल हुईं। इस दौरान दोनों अभिनेत्रियों के बीच कई गंभीर और हल्के-फुल्के मुद्दों पर लंबी बातचीत हुई। बातचीत का सिलसिला जब विवादों की तरफ मुड़ा, तो कृति ने उस दौर को याद किया जब उनके कपड़ों को लेकर प्राइम-टाइम टेलीविजन पर बहस छिड़ गई थी।

करीना कपूर के साथ बातचीत के दौरान कृति ने हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें कभी इस बात की कल्पना भी नहीं थी कि उनके किसी विज्ञापन की पोशाक को देश के मुख्यधारा के चैनलों पर इतने बड़े स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया जाएगा। कृति ने शो में साझा किया, "मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था जब मेरी चोली प्राइम-टाइम न्यूज पर छह लोगों के पैनल डिस्कशन का मुख्य विषय बन गई थी।" इस पर करीना कपूर ने भी अपनी सहमति जताते हुए उस दौर की ट्रोलिंग और मीडिया के रुख को करीब से महसूस करने की बात कही।

आखिर क्या था वह रक्षाबंधन एड विवाद?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब एक लोकप्रिय ब्रांड 'जीवा' (Ziva) ने रक्षाबंधन के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए अपना एक विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन में कृति सेनन ने इंडो-वेस्टर्न शैली के कपड़े पहने हुए थे। उन्होंने सफेद रंग की डीप-नेक ब्रालेट और एथनिक टच वाले पहनावे को चुना था। विज्ञापन में उन्हें अपने भाई के साथ-साथ अपने पालतू कुत्ते (Pet Dog) को राखी बांधते हुए और त्योहार मनाते हुए दिखाया गया था।

जैसे ही यह विज्ञापन प्रसारित हुआ, सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया। एक वर्ग का मानना था कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक और पवित्र त्योहार के लिए इस तरह के आधुनिक या डीप-नेक कपड़े उपयुक्त नहीं हैं। इसके अलावा, विज्ञापन में पारंपरिक तौर-तरीकों की बजाय एक पालतू जानवर को शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए गए थे। धीरे-धीरे यह मामला सोशल मीडिया की सामान्य बहसों से निकलकर मुख्यधारा की सुर्खियों में छा गया।

समकालीन हस्तियों की प्रतिक्रियाएं और तीखी आलोचना

इस विज्ञापन को लेकर न केवल आम सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी नाराजगी व्यक्त की, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के भीतर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। जानी-मानी अभिनेत्री और राजनेता कंगना रनौत ने भी इस विज्ञापन की खुलकर आलोचना की थी। कंगना और अन्य आलोचकों का तर्क था कि त्योहारों की अपनी एक सांस्कृतिक मर्यादा होती है, जिसका उल्लंघन विज्ञापनों या कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के नाम पर नहीं किया जाना चाहिए।

चारों तरफ से हो रही आलोचना और ट्रोलिंग के बीच कृति सेनन ने भी चुप रहना मुनासिब नहीं समझा और इंस्टाग्राम के माध्यम से अपनी बात पूरी मजबूती के साथ रखी। उन्होंने समाज में महिलाओं के पहनावे को लेकर बनी हुई रूढ़िवादी सोच पर सीधा प्रहार किया।

'संस्कृति दिल में होती है, गले की नेकलाइन में नहीं' - कृति का करारा जवाब

आलोचकों को करारा जवाब देते हुए कृति सेनन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया था, जिसने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। उन्होंने लिखा था, "और हां, हम महिलाओं को यह बताना कब बंद करेंगे कि उन्हें क्या पहनना चाहिए? इतने सालों में एथनिक फैशन में काफी बदलाव आया है, फिर भी किसी महिला के लिए उसकी संस्कृति के प्रति सम्मान को आज भी उसके कपड़ों से ही मापा जाता है। संस्कृति और परंपराएं दिल में होती हैं, गले की नेकलाइन में नहीं!"

कृति का यह बयान महिलाओं की स्वतंत्रता और उनके कपड़ों को लेकर समाज की दोहरी मानसिकता पर एक बड़ा सवालिया निशान था। उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि पहनावा किसी व्यक्ति की संस्कृति या संस्कारों का पैमाना नहीं हो सकता है।

विक्टिम-ब्लेमिंग और महिलाओं की सुरक्षा पर भी उठाए थे सवाल

इस विवाद के कुछ समय बाद, सितंबर महीने के आखिरी दिनों में कृति सेनन ने महिलाओं की सुरक्षा, समाज की मानसिकता और बेटियों के लिए एक सुरक्षित दुनिया के निर्माण पर कई और महत्वपूर्ण पोस्ट साझा किए थे। उन्होंने 'विक्टिम-ब्लेमing' (पीड़ित को ही दोषी ठहराने की प्रवृत्ति) और कपड़ों के चयन को लेकर समाज की सोच पर गहरी चोट की थी।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक बेहद प्रभावशाली और विचारोत्तेजक संदेश साझा किया था, जिसमें लिखा था — "क्या यह मेरी गलती थी?' छोटी स्कर्ट ने पूछा। 'नहीं, मेरे साथ भी ऐसा हुआ था,' बुर्के ने जवाब दिया..." इस पोस्ट के जरिए कृति ने यह समझाने का प्रयास किया था कि अपराध या आलोचना का कारण महिला के कपड़े कभी नहीं होते, बल्कि यह देखने वाले की विकृत मानसिकता और समाज की पुरुषप्रधान सोच का परिणाम होता है।

सोशल मीडिया युग में सेलिब्रिटी ट्रोलिंग और मानसिक दबाव

आज के डिजिटल युग में, जहां सोशल मीडिया हर किसी के पास अभिव्यक्ति का एक बड़ा माध्यम बन चुका है, वहीं यह कलाकारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण भी बनता जा रहा है। एक छोटे से विज्ञापन के कपड़े को लेकर प्राइम-टाइम टीवी डिबेट तक पहुंच जाना यह दिखाता है कि किस तरह से छोटी-छोटी बातों को बड़ा तूल दिया जाता है।

करीना कपूर के शो में कृति सेनन के इस खुलासे ने एक बार फिर से उस बहस को जिंदा कर दिया है, जिसमें यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या एक महिला कलाकार को उसके काम और कपड़ों के आधार पर इस तरह की सार्वजनिक जांच और ट्रोलिंग का सामना करना उचित है? कृति के प्रशंसकों ने एक बार फिर उनकी इस बेबाकी की सराहना की है और उनका समर्थन किया है।

निष्कर्ष

कृति सेनन का रक्षाबंधन एड विवाद और उस पर उनकी यह हालिया प्रतिक्रिया यह साबित करती है कि मुख्यधारा की अभिनेत्रियां अब अपनी बात खुलकर रखने और रूढ़िवादी विचारों का विरोध करने से पीछे नहीं हटती हैं। भले ही उस समय इस विज्ञापन को लेकर काफी हंगामा हुआ हो, लेकिन कृति ने जिस तरह से परिपक्वता और दृढ़ता के साथ इस पूरी स्थिति का सामना किया, वह आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज को आधुनिक बनाने के साथ-साथ हमारी सोच को भी वक्त के साथ बदलने की सख्त जरूरत है।

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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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