मुंबई के विश्व प्रसिद्ध गणेशोत्सव मंडल 'लालबागचा राजा' के दरबार में उस वक्त मातम पसर गया, जब दर्शन के लिए आए एक 68 वर्षीय बुजुर्ग की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। यह घटना शनिवार, 26 सितंबर 2026 की सुबह सामने आई, जिससे पूरे पंडाल और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। भारी भीड़भाड़ के बीच हुई इस दुखद घटना ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में बुजुर्गों और बीमार लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अचानक बिगड़ी तबीयत और फिर टूटा दुखों का पहाड़
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मृतक बुजुर्ग अपनी आस्था और श्रद्धा के साथ लालबागचा राजा के अंतिम दर्शन या बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए कतार में खड़े थे। उमस, भारी भीड़ और लंबी कतार के कारण अचानक उनकी सांस फूलने लगी और वे गश खाकर जमीन पर गिर पड़े।
आसपास मौजूद अन्य श्रद्धालुओं और सुरक्षा में तैनात स्वयंसेवकों ने तुरंत स्थिति को भांपा और बिना देर किए उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की प्रारंभिक जांच के अनुसार, मौत का संभावित कारण दिल का दौरा (Heart Attack) या अत्यधिक घुटन और उमस के कारण सांस लेने में गंभीर तकलीफ होना बताया जा रहा है।
पुलिस प्रशासन हरकत में, मामले की जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और अस्पताल में भी अधिकारियों ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के असल कारणों का आधिकारिक खुलासा हो सके।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी, 'हमें सुबह पंडाल के पास एक बुजुर्ग के अचेत होने की सूचना मिली थी। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। फिलहाल, हम अस्पताल की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह घटना किन परिस्थितियों में हुई।'
भीड़भाड़ वाले आयोजनों में बुजुर्गों के लिए चेतावनी
गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के इन लोकप्रिय पंडालों में रोजाना लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं। कई किलोमीटर लंबी कतारें, घंटों इंतजार और उमस भरा माहौल किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (High BP) या सांस की बीमारी से पीड़ित बुजुर्गों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
प्रशासन और आयोजकों द्वारा लगातार यह अपील की जाती है कि बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोग अत्यधिक भीड़भाड़ वाले समय में आने से बचें या विशेष सावधानी बरतें। इसके बावजूद, अपार श्रद्धा के चलते कई बार लोग अपनी शारीरिक सीमाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके परिणाम अक्सर ऐसे दुखद हादसों के रूप में सामने आते हैं।
सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद पंडाल परिसर में तैनात मेडिकल इमरजेंसी टीमों की भूमिका और तैयारियों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि मंडल प्रशासन द्वारा हर साल एम्बुलेंस और डॉक्टरों की तैनाती की जाती है, लेकिन मौजूदा भीड़ के दबाव को देखते हुए चिकित्सा सहायता को और अधिक सुलभ बनाने की मांग उठ रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में सेकंडों के भीतर मरीज तक मदद पहुंचाई जा सके।
फिलहाल पुलिस ने आकस्मिक मौत (Accidental Death) का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उत्सव की चमक-धमक और भारी उत्साह के बीच हमें अपने स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमताओं का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।