हार्ट अटैक और सामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर का सच: क्या फिट लोगों को भी है खतरा?
हार्ट अटैक एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह अचानक बाधित हो जाता है। आम तौर पर इसके लिए बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) को जिम्मेदार माना जाता है। जब शरीर में इसकी मात्रा बढ़ती है, तो यह अस्वास्थ्यकर वसा या चिपचिपा पदार्थ धमनियों की दीवारों पर प्लाक के रूप में जमा होने लगता है। इससे धमनियां संकरी हो जाती हैं और रक्त प्रवाह में रुकावट आती है, जिससे कोरोनरी आर्टरी रोग (CAD) और दिल के दौरे का खतरा बढ़ता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या उन लोगों को भी हार्ट अटैक आ सकता है जो खुद को फिट रखते हैं और जिनका कोलेस्ट्रॉल स्तर पूरी तरह सामान्य है?
कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल की मानक श्रेणियां
बैड कोलेस्ट्रॉल वसा और प्रोटीन का एक ऐसा मिश्रण है जो रक्त के साथ घुलता है। चिकित्सीय मानकों के अनुसार, एलडीएल की 100 से कम रेंज को अच्छा माना जाता है। यह 100 से 129 के बीच एवरेज, 130 से 159 के बीच बॉर्डरलाइन और 160 या इससे अधिक होने पर हाई कोलेस्ट्रॉल की श्रेणी में आती है। हालांकि, केवल इस रिपोर्ट के आधार पर हृदय स्वास्थ्य का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता है।
नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल होने पर भी जोखिम क्यों बना रहता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल स्तर अब सामान्य है, लेकिन वह अतीत में लंबे समय तक बढ़े हुए एलडीएल से जूझ चुका है, तो धमनियों में पहले से ही प्लाक जमा हो चुका होता है। खान-पान में सुधार, व्यायाम या दवाओं की मदद से कोलेस्ट्रॉल का स्तर भले ही नॉर्मल हो जाए, लेकिन धमनियों के भीतर मौजूद पुरानी प्लाक वहीं बनी रह सकती है। कई बार यह पुरानी प्लाक अचानक टूट जाती है और उस स्थान पर खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) बन जाता है। इस थक्के के कारण हृदय तक रक्त का प्रवाह पूरी तरह रुक सकता है, जिससे सामान्य कोलेस्ट्रॉल वाले व्यक्ति को भी अचानक हार्ट अटैक आ सकता है।
अन्य प्रमुख जोखिम कारक
हार्ट अटैक की संभावना केवल कोलेस्ट्रॉल तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई अन्य फैक्टर भी अहम भूमिका निभाते हैं। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, अत्यधिक तनाव, शारीरिक निष्क्रियता और परिवार में हृदय रोग का पुराना इतिहास शामिल होना शामिल है। यदि इनमें से कोई भी कारक मौजूद है, तो जोखिम बढ़ जाता है।
दिल की सेहत के लिए जरूरी सावधानियां
कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट नॉर्मल आने के बाद भी लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और अन्य जोखिम कारकों की नियमित जांच करवाते रहना आवश्यक है, जिससे हृदय रोगों का समय रहते पता लगाया जा सके। दिल को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खान-पान अपनाना चाहिए तथा जंक फूड, पैक्ड फूड, अत्यधिक नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट से दूरी बनानी चाहिए। इसके अलावा अल्कोहल और किसी भी तरह के धूम्रपान से परहेज करना, नियमित शारीरिक गतिविधि जारी रखना और वजन नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। समय-समय पर संपूर्ण स्वास्थ्य जांच (रेगुलर हेल्थ चेकअप) भीानी चाहिए।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
शरीर में सीने अचानक दर्द या भारीपन महसूस होना, सांस फूलने के साथ अचानक पसीना आना, तथा सीने का दर्द बाएं हाथ और जबड़े तक फैलना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।