डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से भारत को रूस से तेल आयात पर 100% टैरिफ के खतरे से मिली बड़ी राहत।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से ऊर्जा उत्पादों की खरीद करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की आशंका को फिलहाल टाल दिया है। अमेरिका में हाल ही में पारित हुए रूस और ईरान से संबंधित कानून के अंतर्गत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का प्रावधान था। इसके लागू होने से भारत जैसे प्रमुख आयातक देशों के अमेरिकी बाजार में निर्यात पर भारी अतिरिक्त शुल्क लगने का बड़ा संकट खड़ा हो गया था। हालांकि, ट्रंप ने अपने कार्यकारी अधिकारों का उपयोग करते हुए राष्ट्रीय हित का हवाला दिया और प्रतिबंधों तथा शुल्क संबंधी कुछ प्रावधानों में छूट देने की घोषणा की। इस कदम से भारत पर मंडरा रहा संभावित अतिरिक्त टैरिफ का तत्काल खतरा समाप्त हो गया है।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मायने
भारत अपनी कुल घरेलू ऊर्जा और जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात के माध्यम से पूरा करता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था, चालू खाते के घाटे और ईंधन की लागत को प्रभावित करता है। यूक्रेन संघर्ष के बाद से रूस भारत के लिए कच्चे तेल का एक बड़ा और किफायती आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। अमेरिकी टैरिफ का खतरा टलने से भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के लिए बिना किसी व्यापारिक बाधा या अतिरिक्त जुर्माने के रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखना सुगम हो गया है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आयात विकल्पों को मजबूती मिलती है।
क्या भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल?
टैरिफ का खतरा टलने के बावजूद इस बात की कोई तत्काल गारंटी नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम कम हो जाएंगे। इसके पीछे कई व्यावहारिक और वैश्विक कारण हैं:
- वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल वर्तमान में 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
- मूल्य निर्धारण के अन्य घटक: भारत में ईंधन के दाम केवल कच्चे तेल की खरीद लागत पर निर्भर नहीं करते। इसमें अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, केंद्र सरकार का उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला मूल्य वर्धित कर (VAT) जैसे तमाम कारक शामिल हैं।
- तेल विपणन कंपनियों की नीतियां: हालांकि रूसी तेल की निर्बाध उपलब्धता से तेलशोधक कंपनियों की खरीद लागत में स्थिरता जरूर आ सकती है, लेकिन खुदरा कीमतों में कटौती का अंतिम निर्णय कंपनियों की व्यावसायिक नीतियों और बाजार की समग्र स्थिति पर निर्भर करता है।