उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर क्षेत्र स्थित मोहड़ा गांव में आपसी भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का अनूठा उदाहरण सामने आया है, जहां एक मुस्लिम बुजुर्ग महिला के निधन पर ग्रामीणों ने रामलीला का मंचन स्थगित कर दिया। आदर्श रामलीला समिति के इस संवेदनशील निर्णय को क्षेत्र में सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
धामपुर क्षेत्र के मोहड़ा गांव में इन दिनों रामलीला का आयोजन चल रहा था। इसी दौरान गांव के निवासी चिकित्सक डॉ. जाकिर की 85 वर्षीय मां गफूरन की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें तुरंत उपचार के लिए धामपुर के एक चिकित्सक के पास लेकर गए। हालांकि, चिकित्सीय उपचार के बाद घर लौटने के कुछ समय पश्चात शाम को उनका निधन हो गया।
गफूरन के निधन की सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्राम प्रधान ऋषि चौहान ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि दिवंगत गफूरन उनके लिए बुआ के समान थीं और उनके निधन से पूरे गांव को गहरा आघात पहुंचा है। दुख की इस घड़ी में गांव के सभी लोग शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े नजर आए।
आदर्श रामलीला समिति का निर्णय
परिस्थिति की गंभीरता और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आदर्श रामलीला समिति ने तत्काल प्रभाव से रामलीला का मंचन स्थगित करने का फैसला किया। समिति के इस कदम की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने इसे एक-दूसरे के सुख-दुख में साझीदार बनने की मजबूत परंपरा का हिस्सा बताया।
मृतका के बेटे डॉ. जाकिर और गांव के अन्य गणमान्य लोगों ने भी रामलीला रोके जाने के इस निर्णय का स्वागत किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल पारंपरिक अनुष्ठानों का निर्वाह करना नहीं होता, बल्कि समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करना भी होता है। रामलीला का मंचन रोकने का यह निर्णय इसी सामाजिक और मानवीय मूल्य को चरितार्थ करता है।