समृद्धि महामार्ग पर जलवाहिनी जोड़ने के तकनीकी कार्य के चलते महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण ने लिया फैसला; नागरिकों से पर्याप्त पानी जमा करने की अपील।
महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (मजीप्रा) की ओर से संचालित पिपरी-मेघे क्षेत्रीय जलापूर्ति योजना के दायरे में आने वाले 13 गांवों में 21 अक्टूबर से लगातार पांच दिनों तक जलापूर्ति पूरी तरह बंद रहेगी। यह शटडाउन समृद्धि महामार्ग के निर्माण और उससे जुड़े तकनीकी कार्यों के कारण लिया गया है। प्राधिकरण ने प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे जलसंकट से बचने के लिए पहले से ही चार से पांच दिनों का आवश्यक पानी जमा करके रखें।

समृद्धि महामार्ग पर होगा तकनीकी कार्य
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, समृद्धि महामार्ग के येलकेली इंटरचेंज क्रमांक 4 पर 700 मिलीमीटर व्यास की डक्टाइल आयरन (डीआई) जलवाहिनी को क्रॉसिंग कर मौजूदा मुख्य कच्चे पानी की पंपिंग पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा। यह कार्य तकनीकी रूप से बेहद महत्वपूर्ण और जटिल है। इस कार्य को सुरक्षित और सुचारू रूप से पूरा करने के लिए मुख्य जलवाहिनी से पानी की आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोकना अनिवार्य हो गया है। मजीप्रा के उपविभाग अभियंता दीपक घोटे ने इस दौरान नागरिकों से प्रशासन को पूरा सहयोग देने की अपील की है।
इन 13 गांवों में प्रभावित होगी जलापूर्ति
इस नियोजित शटडाउन के कारण वर्धा जिले के कई प्रमुख गांवों में पेयजल सेवा बाधित रहेगी। प्रभावित होने वाले गांवों में पिपरी (मेघे), कारला, साटोडा, आलोडी, नालवाड़ी, म्हसाला, वरुड़, सिंदी मेघे, उमरी-मेघे, सावंगी मेघे, बोरगांव-मेघे, वायगांव (निपाणी) और सेलू (काटे) शामिल हैं। प्राधिकरण ने इन सभी गांवों के निवासियों को आगाह किया है कि वे आगामी चार से पांच दिनों की जरूरत के हिसाब से पीने और दैनिक उपयोग का पानी सुरक्षित रख लें। साथ ही उपलब्ध जल का किफायत से उपयोग करने और किसी भी प्रकार की बर्बादी से बचने का आग्रह किया गया है।
चरणबद्ध तरीके से होगी जलापूर्ति बहाल
जलवाहिनी की क्रॉसिंग और जोड़ने का जटिल कार्य समाप्त होने के बाद पाइपलाइन की आवश्यक तकनीकी जांच की जाएगी। इसके बाद ही जलापूर्ति को चरणबद्ध तरीके से पूर्ववत किया जाएगा। तकनीकी परीक्षण और दबाव बनाए रखने की इस प्रक्रिया के कारण कुछ क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति सुचारू होने में निर्धारित पांच दिनों के बाद भी कुछ अतिरिक्त समय लग सकता है।
धाम जलाशय में कम जलस्तर के कारण भविष्य की चिंता
इस तकनीकी शटडाउन के अलावा, स्थानीय जल प्रबंधन को लेकर एक अन्य चिंता भी सामने आई है। इन गांवों को जलापूर्ति करने वाले मुख्य धाम जलाशय में फिलहाल केवल 70 प्रतिशत जलसंग्रह बचा हुआ है, जिससे भविष्य में जलसंकट गहराने के आसार जताए जा रहे हैं। पानी के विवेकपूर्ण और उचित उपयोग के लिए प्रशासन पहले से ही गंभीर कदम उठा रहा है। इसी के तहत आने वाले समय में पानी की खपत को नियंत्रित करने के लिए अक्टूबर माह के अंत से पिपरी सहित इन क्षेत्रों में सप्ताह में केवल एक ही दिन जलापूर्ति किए जाने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है।