स्वास्थ्य जगत में एक बार फिर गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान को लेकर बड़ी चर्चा छिड़ गई है। देश की शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान संस्था यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक विशेष टीम ने कैंसर के बढ़ते मामलों पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) आज के समय में कितनी तेजी से पैर पसार रहा है और इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना कितना जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
आम तौर पर फेफड़ों के कैंसर को तब पकड़ा जाता है जब यह अपनी एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है, जिसका मुख्य कारण इसके शुरुआती लक्षणों का सामान्य बीमारियों या एलर्जी जैसा लगना है। लेकिन अगर समय रहते शरीर के इशारों को समझ लिया जाए, तो इस खतरनाक बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। आइए विस्तार से जानते उन 10 बेहद जरूरी संकेतों के बारे में, जिन्हें एक्सपर्ट्स ने नजरअंदाज न करने की चेतावनी दी है।
1. लगातार रहने वाली और गंभीर खांसी
खांसी होना एक आम बात है जो सर्दी-जुकाम या प्रदूषण के कारण हो जाती है। लेकिन यदि आपकी खांसी हफ्तों या महीनों तक बनी रहती है और किसी भी दवा से ठीक नहीं हो रही है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। फेफड़ों में ट्यूमर बनने पर एयरवेज पर दबाव पड़ता है, जिससे लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी बनी रहती है।
2. खांसी के साथ खून आना
यह फेफड़ों के कैंसर के सबसे स्पष्ट और गंभीर लक्षणों में से एक है। यदि खांसते समय बलगम में खून के धब्बे दिखाई देते हैं या हल्का गुलाबी रंग का कफ आता है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस स्थिति में तुरंत किसी पल्मोनोलॉजिस्ट या कैंसर विशेषज्ञ से संपर्क करना अनिवार्य है।
3. सांस लेने में तकलीफ या दम घुटना
थोड़ी सी सीढ़ियां चढ़ने पर या सामान्य घरेलू काम करने पर यदि बहुत ज्यादा सांस फूलने लगे या ऐसा महसूस हो कि पर्याप्त हवा फेफड़ों तक नहीं पहुंच रही है, तो यह फेफड़ों की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी का संकेत है। ट्यूमर के कारण श्वासनली का रास्ता संकरा हो जाता है जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है।
4. सीने में लगातार दर्द रहना
फेफड़ों का कैंसर बढ़ने पर छाती, कंधे या पीठ के हिस्से में एक गहरा और सुस्त दर्द बना रहता है। यह दर्द खांसते समय, हंसते समय या गहरी सांस लेते समय और अधिक तेज हो सकता है। कई बार लोग इसे दिल की बीमारी या मस्कुलर पेन समझकर गलती कर बैठते हैं।
5. सांस लेते समय घरघराहट या सीटी जैसी आवाज
जब आप सांस छोड़ते या लेते हैं और फेफड़ों से सीटी बजने जैसी आवाज (Wheezing) आती है, तो इसका मतलब है कि श्वासनली में कोई रुकावट आ रही है। अगर यह समस्या अस्थमा के बिना अचानक शुरू हुई है, तो इसकी जांच जरूर करवाएं।
6. बिना किसी कारण के वजन कम होना
यदि आपने अपनी डाइट या एक्सरसाइज रूटीन में कोई बदलाव नहीं किया है, फिर भी आपका वजन तेजी से और अचानक घटने लगा है, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा को तेजी से सोखती हैं, जिससे वजन गिरने लगता है।
7. अत्यधिक थकान और कमजोरी
रात की पूरी नींद लेने के बाद भी अगर आप पूरे दिन खुद को ऊर्जाहीन, थका हुआ और कमजोर महसूस करते हैं, तो यह सामान्य थकान नहीं है। क्रॉनिक फटीग (Chronic Fatigue) कैंसर के शुरुआती चरणों में कई मरीजों में आम तौर पर देखा जाता है।
8. बार-बार छाती में संक्रमण (इंफेक्शन) होना
अगर आपको साल में बार-बार ब्रोंकाइटिस या न्यूमोनिया जैसी समस्याएं हो रही हैं, और एंटीबायोटिक्स लेने के बाद भी ठीक होने में लंबा समय लग रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके फेफड़ों की इम्युनिटी और उनकी प्राकृतिक सफाई की क्षमता कमजोर हो चुकी है, जिसके पीछे कैंसर जैसी वजह भी हो सकती है।
9. आवाज में भारीपन या घरघराहट
आवाज का अचानक से बैठ जाना या भारी हो जाना, जो कुछ हफ्तों से ज्यादा समय तक रहे, इस बात का संकेत हो सकता है कि कैंसर का ट्यूमर स्वर यंत्र (Laryngeal nerve) को नियंत्रित करने वाली नसों पर दबाव डाल रहा है।
10. चेहरे और गर्दन में सूजन
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ प्रकार के फेफड़ों के कैंसर (विशेषकर छोटे सेल फेफड़ों का कैंसर) मुख्य रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालते हैं, जिससे सिर और चेहरे से खून की वापसी प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप चेहरे, गर्दन या बांहों में हल्की सूजन नजर आ सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह: समय पर जांच ही बचाव है
ICMR की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि उपर्युक्त लक्षणों में से कोई भी संकेत लगातार दो हफ्तों से अधिक समय तक बना रहता है, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें। चेस्ट एक्स-रे, सीटी स्कैन (CT Scan) और स्पुटम साइटोलॉजी जैसी आधुनिक मेडिकल जांचों के जरिए इस बीमारी का शुरुआती दौर में ही पता लगाया जा सकता है। सतर्क रहें, स्वस्थ रहें और अपने शरीर के संकेतों को पहचानें।