मध्य प्रदेश की आबोहवा को नशा मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने अब कमर कस ली है। आने वाले कुछ वर्षों में सूबे से ड्रग्स के काले कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत से जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि साल 2029 तक मध्य प्रदेश को पूरी तरह से नशामुक्त राज्य बना दिया जाएगा। इस दिशा में न सिर्फ ड्रग्स के सप्लायर्स पर शिकंजा कसा जा रहा है, बल्कि पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने की पुख्ता रणनीति पर काम चल रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
हाल ही में राजधानी में कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक अहम उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने विशेष रूप से शिरकत की। केंद्रीय गृह मंत्री के विजन के अनुरूप मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने के वास्ते हरसंभव और कड़े कदम उठाने पर सहमति बनी है। बैठक के दौरान यह बात प्रमुखता से रखी गई कि केवल छोटे तस्करों को पकड़ने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस अवैध व्यापार के पूरे नेटवर्क और इसके आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त करना होगा।
सुरक्षा मामलों की इस महत्वपूर्ण समीक्षा में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने भी हिस्सा लिया। चूंकि मध्य प्रदेश की सीमाएं उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों से मिलती हैं, इसलिए अपराधियों और मादक पदार्थों की अंतरराज्यीय आवाजाही को रोकना एक बड़ी चुनौती है। इसे ध्यान में रखते हुए पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर संयुक्त और समन्वित कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया गया है।
गुप्त ड्रग्स लैब पर पुलिस का बड़ा प्रहार
मादक पदार्थों के खिलाफ चल रहे अभियानों के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। राज्य की पुलिस ने अब तक कुल 17 ऐसी गुप्त प्रयोगशालाओं (ड्रग लैब) का पर्दाफाश किया है, जहां अवैध रूप से ड्रग्स तैयार किए जा रहे थे। इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि तस्करों के नेटवर्क कितनी गहराई तक अपनी जड़ें जमा चुके थे। आदतन और कुख्यात ड्रग अपराधियों के खिलाफ पीआईटीएनडीपीएस अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई को और ज्यादा तेज कर दिया गया है.
जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए चलाए जा रहे ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान को जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिला है। इस वर्ष इस अभियान को सोशल मीडिया पर 58 करोड़ से अधिक व्यूज मिले, जबकि प्रत्यक्ष रूप से दो करोड़ से ज्यादा नागरिक इस मुहिम से जुड़े। सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों को इस जहर से सुरक्षित रखना है, जिसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में 'ड्रग-मुक्त कैंपस फ्रेमवर्क' लागू करने की तैयारी है।
साइबर अपराध और आधुनिक तकनीक का बढ़ता दायरा
बदलते वक्त के साथ अपराध के तरीके भी बदले हैं, और इसी के साथ पुलिस महकमा भी हाई-टेक हो रहा है। बैठक में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र (एस4सी) की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। डिजिटल साक्ष्यों को सहेजने के लिए उपयोग किए जाने वाले 'ई-साक्ष्य' का दायरा पिछले साल के 17 प्रतिशत से बढ़कर अब 33 प्रतिशत पहुंच गया है। इसके अलावा, राज्य के सभी जिलों में कुल 57 मोबाइल फॉरेंसिक वैन तैनात की गई हैं, जिससे मौके पर ही वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना आसान हो गया है। 'सेफ क्लिक अभियान 2' के माध्यम से आज के दौर के सबसे बड़े खतरे यानी 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों को रोकने में भी खासी सफलता मिल रही है।
पुलिस महकमे में बंपर भर्तियां और प्रमोशन का तोहफा
कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए राज्य सरकार पुलिस बल के आधुनिकीकरण और मानव संसाधन पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों के भीतर कुल 16,895 पदों पर नई भर्तियां की गई हैं। इसके अलावा, चालू वर्ष में 9,662 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया फिलहाल तेजी से चल रही है।
खास बात यह है कि पुलिस बैंड में लंबे अरसे से ठप पड़ी भर्ती प्रक्रिया को दोबारा हरी झंडी दिखाकर 648 नए कर्मियों को शामिल किया गया है। इतना ही नहीं, सूबे में लगभग 10 सालों से अटकी पड़ी प्रमोशन की प्रक्रिया को भी आखिरकार शुरू कर दिया गया है, जिसके चलते विभिन्न संवर्गों के 27 हजार से ज्यादा पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है। प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ई-एचआरएमएस पोर्टल से एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों को जोड़ा जा चुका है।
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में देश में आगे
देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों को जमीन पर उतारने के मामले में मध्य प्रदेश ने अनुकरणीय प्रदर्शन किया है। राज्य में अपराधों के मामलों में 90 दिनों के भीतर आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की दर 69 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो कि पूरे देश के 59 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। इसके अलावा, ई-समन की सीधी डिलीवरी के मामले में भी मध्य प्रदेश ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का कायाकल्प और युवा वर्ष का संकल्प
प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्रालय की नीतियों के कारण मध्य प्रदेश में नक्सलवाद की समस्या पर लगभग प्रभावी नियंत्रण पा लिया गया है। अब सरकार का फोकस नक्सल मुक्त हो चुके क्षेत्रों के विकास पर है, जिसके लिए 400 करोड़ रुपये की एक विस्तृत योजना तैयार की गई है।
युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा भरने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए आने वाले वर्ष 2027 को 'युवा वर्ष' के रूप में सेलिब्रेट किया जाएगा। इसके तहत हर एक विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण, सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा देना और जनजातीय इलाकों में प्रशासन व शासन पर जन-विश्वास बढ़ाने के लिए 'धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान' जैसे कल्याणकारी कदम उठाए जा रहे हैं, जो राज्य के स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रहे हैं।