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अंकल जी, डूब रहा है बेटा! नेपाल की तबाही में उजड़ गए यूपी के परिवार

अंकल जी, डूब रहा है बेटा! नेपाल की तबाही में उजड़ गए यूपी के परिवार

प्रकृति जब अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो इंसान के पास सिवाय लाचारी के कुछ नहीं बचता। नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तबाही किसी को नहीं बख्शती। इस आपदा ने सिर्फ नेपाल के स्थानीय लोगों को ही अपना शिकार नहीं बनाया, बल्कि उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से रोजी-रोटी की तलाश में वहां गए कई परिवारों को भी गहरे जख्म दिए हैं।

'अंकल जी, अंकल जी!' - वो आखिरी पुकार जो सीर को चीर देती है

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले पन्नालाल का नाम अब इस त्रासदी का पर्याय बन चुका है। जब मीडिया ने उनसे बात की, तो उनकी आवाज में एक अजीब सी खामोश रुलाई थी और आंखों में सब कुछ खो देने का खालीपन। पन्नालाल बताते हैं कि पानी और कीचड़ के उस भयानक सैलाब में जब लोगों की जिंदगियां बह रही थीं, तब किसी के बच्चे की आखिरी पुकार उनके कानों में गूंज रही थी - 'अंकल जी, अंकल जी!'

लेकिन लोग चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। पानी का वेग इतना तेज था और मलबा इतनी तेजी से बढ़ रहा था कि मदद के लिए आगे बढ़ने वाले खुद जान बचाने की फिराक में थे। आंखों के सामने अपनों को इस तरह काल के गाल में समाते देखना किसी भी इंसान के लिए मानसिक रूप से तोड़ देने वाला अनुभव है।

पानी, कीचड़ और मलबे में दफन हुआ सपना

जिस कस्बे में पन्नालाल और अन्य लोग मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पाल रहे थे, वह अब नक्शे से लगभग गायब हो चुका है। कुछ घंटे पहले तक जहां गुलजार गलियां थीं, दुकानें थीं और सपनों के आशियाने थे, वहां अब केवल बदबूदार कीचड़, पत्थरों के बड़े-बड़े टुकड़े और तबाही का मंजर बचा है।

पन्नालाल का यह दर्द सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों प्रवासियों की दास्तान है जो अपने घरों से दूर दो जून की रोटी कमाने नेपाल गए थे। अचानक आए इस फ्लैश फ्लड (Flash Flood) ने उन्हें सड़क पर ला दिया है। खाने का एक दाना नहीं है, पीने का साफ पानी नहीं है और सिर पर छत का नामो-निशान तक मिट चुका है।

स्थानीय प्रशासन और राहत कार्यों की स्थिति

  • भारी तबाही: नेपाल के कई पर्वतीय और तराई क्षेत्रों में नदियां उफान पर हैं, जिससे संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके हैं।
  • रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा: मलबे और कीचड़ के भारी ढेर के कारण राहत दलों को मौके पर पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
  • प्रवासी मजदूरों की सुध लेने वाला कोई नहीं: उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से नेपाल में काम करने गए मजदूर इस आपदा के बाद खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं।

'सब कुछ खत्म हो गया है'

पन्नालाल के मुंह से निकला यह वाक्य - 'सब कुछ खत्म हो गया है' - वर्तमान समय की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली सच्चाई है। उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपनी सालों की मेहनत को चंद मिनटों में मलबे में दफन होते देखा है। शरीर पर सिर्फ वही कपड़े बचे हैं जो उस वक्त उनके तन पर थे।

भारत और नेपाल दोनों देशों के बॉर्डरवर्ती इलाकों में इस त्रासदी के बाद गमगीन माहौल है। बलिया के उनके पैतृक गांवों में जब इस घटना की खबर पहुंची, तो कोहराम मच गया। परिवार वाले लगातार अपनों की सलामती की दुआ मांग रहे हैं, लेकिन जो हालात वहां से सामने आ रहे हैं, वे किसी भी अनिष्ट की ओर इशारा कर रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन और पहाड़ों का बदलता मिजाज

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Flood) और बादल फटने की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि हिमालयी क्षेत्र पर्यावरण के मोर्चे पर बेहद संवेदनशील हो चुके हैं। अनियोजित निर्माण और मौसम का बदलता चक्र आने वाले समय में और भी बड़े खतरे की घंटी बजा रहा है। लेकिन फिलहाल, इस वैज्ञानिक बहस से इतर सबसे बड़ा सवाल यह है कि पन्नालाल जैसे बेसहारा मजदूरों का जीवन पटरी पर कैसे लौटेगा?

आगे की राह और मदद की गुहार

उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर इस मामले में संज्ञान लेने की मांग की जा रही है ताकि नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों और मज़दूरों को सुरक्षित वापस लाया जा सके और उन्हें फौरी राहत पहुंचाई जा सके। बलिया के प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पीड़ित परिवारों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है, लेकिन नुकसान का दायरा इतना बड़ा है कि सामान्य स्थिति बहाल होने में महीनों लग सकते हैं।

यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि इंसान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, प्रकृति के एक झटके के आगे वह कितना लाचार और बेबस हो जाता है। पन्नालाल और उनके साथियों की यह खामोश चीखें शायद लंबे समय तक हमारे जेहन में गूंजती रहेंगी।

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नसीम अहमद

नसीम अहमद

Writer (स्थानीय खबरें)

नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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