पुणे महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) क्षेत्र में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और लेआउट्स की आंतरिक सड़कों का दुरुपयोग रोकने तथा आम नागरिकों व भूखंडधारकों को आवाजाही में हो रही परेशानियों के समाधान के लिए प्रशासन ने एक कड़ा कदम उठाया है। अब डेवलपर्स के लिए लेआउट की अंदरूनी सड़कों को 'कब्जा रसीद' के माध्यम से सीधे पीएमआरडीए को हस्तांतरित करना और संबंधित सड़कों के 7/12 (सात बारा) उतारे पर प्राधिकरण का नाम दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है। महानगर आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी ने इस संबंध में एक आधिकारिक परिपत्रक जारी कर नए और कड़े दिशा-निर्देश लागू किए हैं।
पीएमआरडीए सीमा के अंतर्गत स्वीकृत होने वाले सभी आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक लेआउट्स की अंदरूनी सड़कें नियमानुसार आसपास के भूखंडधारकों और स्थानीय नागरिकों के लिए हमेशा खुली रहना आवश्यक होती हैं। इन सड़कों के माध्यम से ही पड़ोसी भूखंडों और जमीनों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने का वैधानिक अधिकार प्राप्त होता है। हालांकि, प्राधिकरण के संज्ञान में आया था कि कई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और लेआउट पूरे होने के बाद मूल भूस्वामी या संबंधित डेवलपर अन्य नागरिकों को इन सड़कों से आवाजाही करने से रोकते थे। कई मामलों में सड़कों पर बाड़ (फेनसिंग) लगा दी जाती थी या जबरन रास्ते बंद कर दिए जाते थे, जिससे आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था।
नई कार्यप्रणाली और अनुपालन की प्रक्रिया
इस प्रकार की मनमानी पर रोक लगाने के लिए पीएमआरडीए ने एक स्पष्ट और पारदर्शी कार्यप्रणाली तैयार की है। इसके तहत, तहसीलदार और भूमि अभिलेख विभाग द्वारा सीमांकन व पैमाइश की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, संबंधित डेवलपर ने अंदरूनी सड़क को जमीन पर पूरी तरह विकसित किया है या नहीं, इसकी जमीनी स्तर पर जांच 'सहायक महानगर नियोजनकार' द्वारा की जाएगी। जब तक सड़क पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हो जाती और उस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक प्राधिकरण सड़क का कब्जा स्वीकार नहीं करेगा। इसके लिए डेवलपर को निर्धारित प्रारूप में एक लिखित हलफनामा भी जमा करना होगा।
इसके अलावा, लेआउट को अंतिम मंजूरी देने से पहले 'कम-ज्यादा पत्रक' तैयार करते समय सड़क के लिए एक अलग 7/12 उतारा बनाया जाएगा। इस नए 7/12 उतारे पर पीएमआरडीए का नाम दर्ज कराना अनिवार्य किया गया है।
नागरिकों को राहत और कानूनी विवादों पर विराम
अंदरूनी सड़कों का आधिकारिक कब्जा सीधे पीएमआरडीए के पास आ जाने से अब कोई भी डेवलपर या भूस्वामी अपनी मर्जी से इन रास्तों को बंद नहीं कर सकेगा। इस व्यवस्था से आसपास के रहवासियों और प्लॉट धारकों को बिना किसी रुकावट के आवागमन का एक स्थायी और वैध मार्ग मिल सकेगा।
प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस सख्त कदम से जमीन या प्लॉट खरीदने वाले आम नागरिकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा। साथ ही, भविष्य में रास्तों को लेकर पैदा होने वाले दीवानी व अन्य कानूनी विवादों पर भी पूरी तरह से विराम लग सकेगा। पीएमआरडीए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी सहायक, उप और सह महानगर नियोजनकारों को इस परिपत्रक का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क हस्तांतरण के पुख्ता प्रमाण और 'कब्जा रसीद' के बिना किसी भी लेआउट को अंतिम स्वीकृति प्रदान नहीं की जाएगी।