मुंबई की सांस्कृतिक धरती पर शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल का गवाह बना। अवसर था चर्चगेट स्थित प्रतिष्ठित श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकर्सी (एसएनडीटी) महिला विश्वविद्यालय के पाटकर सभागार में आयोजित 'अभिजात मराठी भाषा सप्ताह' और 'अभिजात मराठी भाषा सम्मान दिवस' के भव्य शुभारंभ का। इस कार्यक्रम में राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के बीच एक मजबूत सेतु बनाने का संकल्प लिया गया।
मराठी सिर्फ संवाद नहीं, संस्कृति का जीवंत दस्तावेज
कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि मराठी भाषा केवल एक-दूसरे से बातचीत करने का साधन भर नहीं है। यह महाराष्ट्र की सदियों पुरानी समृद्ध संस्कृति की सच्ची वाहक और हमारे गौरवशाली इतिहास की मूक साक्षी है। जब कोई भाषा सदियों के उतार-चढ़ाव को पार करती हुई आज तक पहुंचती है, तो वह केवल शब्द नहीं, बल्कि एक पूरा जन-जीवन अपने साथ लेकर चलती है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केंद्र सरकार द्वारा मराठी को 'अभिजात भाषा' (Classical Language) का जो दर्जा मिला है, वह हर एक मराठी भाषी के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। इस मान्यता ने महाराष्ट्र की अनमोल भाषिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर एक नई और विशिष्ट पहचान दिलाई है।
छत्रपति शिवाजी महाराज का स्वभाषा प्रेम
इतिहास के पन्नों को पलटते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रशासनिक दृष्टिकोण को याद किया। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने न केवल 'स्वराज्य' की स्थापना की, बल्कि 'स्वभाषा' को भी सर्वोच्च महत्व दिया। महाराज ने अपने राजकाज और प्रशासन में फारसी के वर्चस्व को कम करते हुए मराठी के प्रयोग को बढ़ावा दिया था, ताकि आम जनता अपनी भाषा में शासन को समझ सके। आज 21वीं सदी में हमें उसी ऐतिहासिक प्रेरणा से ऊर्जा लेते हुए अपनी मातृभाषा को आधुनिक युग के अनुकूल ढालना होगा।
21वीं सदी की तकनीक और मराठी भाषा
बदलते दौर में भाषा के सामने अस्तित्व और प्रासंगिकता की बड़ी चुनौतियां होती हैं। इस दिशा में मुख्यमंत्री ने भविष्य का खाका खींचते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब मराठी को केवल साहित्यिक या बोलचाल की भाषा तक सीमित न रखकर, इसे 'डिजिटल और ज्ञानभाषा' के रूप में पूरी तरह सक्षम बनाया जाए।
तकनीकी क्रांति के इस दौर में मराठी को पीछे नहीं रहना चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित आधुनिक क्षेत्रों में मराठी के अधिकाधिक प्रयोग की आवश्यकता है:
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence): एआई टूल्स और चैटबॉट्स में मराठी भाषा का डेटाबेस बढ़ाना।
- क्वांटम कंप्यूटिंग: अत्याधुनिक कंप्यूटिंग शोध और सॉफ्टवेयर में मराठी को स्थान देना।
- अंतरिक्ष तकनीक (Space Technology): अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जटिल शब्दावली को मराठी में विकसित करना।
- जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology): विज्ञान और शोध के नए आयामों में मराठी का शैक्षणिक प्रसार।
विज्ञान और अनुसंधान में मराठी की भागीदारी
मराठी भाषा की शब्द-संपदा बेहद विशाल और इसकी साहित्यिक परंपरा अत्यंत गौरवशाली है। इस विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने चेताया कि यह गौरव केवल अतीत की प्रशंसा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब तक विज्ञान, तकनीक, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और उच्च अनुसंधान से जुड़ी अवधारणाएं मराठी भाषा में सहज रूप से उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक यह वास्तविक अर्थों में ज्ञानभाषा नहीं बन सकती।
उन्होंने प्रदेश की जनता, युवाओं और विचारकों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन—चाहे वह घर हो, शिक्षा का परिसर हो, सरकारी या गैर-सरकारी प्रशासन हो, व्यवसाय हो या सोशल मीडिया का वर्चुअल संसार—हर जगह मराठी का गर्व के साथ अधिकाधिक उपयोग करें।
दिग्गजों की उपस्थिति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इस गरिमामयी समारोह में महाराष्ट्र की राजनीतिक और शैक्षणिक हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्योग व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. उदय सामंत, मुंबई की महापौर रितू तावडे, और एसएनडीटी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. हेमलता बागला विशेष रूप से उपस्थित थीं। इनके अलावा बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं और मराठी प्रेमी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
कार्यक्रम के दौरान बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘मराठीचे कौतुक भाग-2’ का औपचारिक विमोचन किया गया। साथ ही, ‘अभिजात मराठी, अभिमान मराठी’ विषय पर एक मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसने दर्शकों को महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
निष्कर्ष: भविष्य की दिशा
भाषाएं तभी जीवित और जीवंत रहती हैं जब वे समय के साथ कदम ताल मिलाकर चलती हैं। अभिजात मराठी भाषा सप्ताह का यह आयोजन मात्र एक उत्सव नहीं, बल्कि मराठी को ग्लोबल और डिजिटल युग की रेस में सबसे आगे ले जाने का एक ठोस संकल्प है। अब देखना यह है कि शिक्षण संस्थान और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर इस विजन को धरातल पर कैसे उतारते हैं।