बदलते वक्त के साथ तकनीक ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतनी ही जटिल चुनौतियां भी इसके साथ खड़ी कर दी हैं। आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस गंभीर होती समस्या से निपटने के लिए अब प्रशासनिक स्तर पर भी जन-जागरण अभियान तेज कर दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि साइबर अपराधों से बचाव के मामले में केवल पुलिस प्रशासन अकेले कुछ नहीं कर सकता, बल्कि हर नागरिक की अपनी सजगता और जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम
शनिवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, कोनी के परिसर में एक बेहद महत्वपूर्ण आयोजन देखने को मिला। छत्तीसगढ़ पुलिस और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के संयुक्त तत्वावधान में यहाँ एक भव्य 'साइबर जागृति अभियान' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने युवाओं और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डिजिटल सुरक्षा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में मोबाइल फोन, इंटरनेट और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सुबह की शुरुआत से लेकर रात के सोने तक हम किसी न किसी रूप में तकनीक से जुड़े रहते हैं। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि इसी तकनीक का फायदा उठाकर शातिर साइबर अपराधी ठगी के नए-नए और उन्नत तरीके इजाद कर रहे हैं। थोड़ी सी भी असावधानी भारी पड़ सकती है और गाढ़ी कमाई पलभर में खातों से साफ हो सकती है।
विद्यार्थियों और युवाओं को मिला विशेष संदेश
डिप्टी सीएम अरुण साव ने विशेष तौर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा वर्ग आज के डिजिटल युग का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। इसलिए उनकी जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे खुद तो साइबर खतरों के प्रति सतर्क रहें ही, साथ ही अपने परिवार के बुजुर्गों, मित्रों और आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करें। एक शिक्षित और जागरूक युवा ही समाज को सुरक्षित रखने की नींव मजबूत कर सकता है.
साइबर सुरक्षा हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी: आईजी रामगोपाल गर्ग
कार्यक्रम में मौजूद पुलिस महानिरीक्षक (IG) रामगोपाल गर्ग ने बेहद व्यावहारिक बातें साझा कीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर सुरक्षा को सिर्फ पुलिस विभाग की जिम्मेदारी मानकर छोड़ देना गलत है। यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। आईजी गर्ग ने विद्यार्थियों को कुछ बेहद जरूरी और बुनियादी सुरक्षा टिप्स दिए, जिनका पालन करके हर कोई ऑनलाइन ठगी का शिकार होने से बच सकता है:
- अनजान लिंक से दूरी: कभी भी किसी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह किसी भी लुभावने ऑफर के साथ आया हो।
- व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें: फोन पर या मैसेज के जरिए किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते के विवरण, ओटीपी (OTP) या पासवर्ड की जानकारी साझा बिल्कुल न करें।
- सोशल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करने से बचें और बहुत ही सावधानी के साथ इनका इस्तेमाल करें।
- घबराएं नहीं, तुरंत सूचना दें: यदि कोई अनहोनी हो जाती है और आप साइबर ठगी का शिकार बन जाते हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। समय पर की गई शिकायत से रिकवरी की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
सुरक्षित डिजिटल नागरिक बनने का संकल्प
इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों को तकनीकी दुनिया के खतरों से आगाह करना था। उन्हें यह सिखाया गया कि किस तरह से वे इंटरनेट का इस्तेमाल बिना डरे, लेकिन पूरी सावधानी और जिम्मेदारी के साथ कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराधों के बदलते स्वरूपों, लॉटरी फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, जॉब स्कैम और उनसे बचने के तमाम वैज्ञानिक एवं कानूनी उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति डॉ. एचएस होता, नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, कुलसचिव तारणीश गौतम, ग्रामीण भाजपा जिलाध्यक्ष मोहित जायसवाल, एनएसएस प्रभारी प्रोफेसर मनोज सिन्हा समेत भारी संख्या में छात्र-छात्राएं, युवा और पुलिस विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान एक ही मुख्य संदेश गूंजता रहा— “स्वयं जागरूक बनें और दूसरों को भी जागरूक करें”।
सतर्कता ही बचाव का एकमात्र उपाय
विज्ञ जान मानते हैं कि साइबर अपराधी हमेशा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। कभी डर दिखाकर तो कभी लालच देकर वे तुरंत निर्णय लेने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में यदि नागरिक थोड़ा सा संयम और सूझबूझ दिखाएं, तो बड़ी से बड़ी ठगी को नाकाम किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ शासन और पुलिस महकमे द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान निश्चित रूप से आने वाले दिनों में आम जनमानस में एक मजबूत सुरक्षा दीवार तैयार करने में कारगर साबित होगा।