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नौकरी ढूंढने वाले नहीं बल्कि अब रोजगार देने वाले बनेंगे युवा, बलरामपुर पॉलीटेक्निक में अनोखी पहल

नौकरी ढूंढने वाले नहीं बल्कि अब रोजगार देने वाले बनेंगे युवा, बलरामपुर पॉलीटेक्निक में अनोखी पहल

डिग्री और डिप्लोमा हासिल करने के बाद डिग्रियां हाथ में थामे दफ्तरों के चक्कर काटने का दौर अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा बदलाव देखने को मिल रहा है जो आने वाले समय में तस्वीर पूरी तरह बदलने का माद्दा रखता है। ताज़ा मामले में, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जो युवाओं को पारंपरिक नौकरीपेशा मानसिकता से बाहर निकालकर सीधे उद्योग जगत के दिग्गजों की फेहरिस्त में खड़ा करने की तैयारी कर रही है।

पारंपरिक सोच को दरकिनार कर उद्यमिता की ओर कदम

शनिवार, 12 सितंबर 2026 को शासकीय पॉलीटेक्निक रामानुजगंज में एक खास और दूरदर्शी एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। 'वन इंस्टीट्यूशन, वन स्टार्टअप' (One Institution, One Startup) पहल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य तकनीकी शिक्षा ले रहे छात्र-छात्राओं के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानना और उन्हें ज़मीन पर उतारना था। आमतौर पर इंजीनियरिंग या डिप्लोमा के छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कैंपस प्लेसमेंट या नौकरी के विज्ञापनों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन इस कार्यशाला ने उस परिपाटी को चुनौती दी है।

कार्यक्रम के दौरान प्रशासन और शिक्षाविदों का मुख्य जोर इस बात पर था कि युवा केवल 'जॉब सीकर' (नौकरी चाहने वाले) बनकर न रह जाएं, बल्कि वे 'जॉब प्रोवाइडर' यानी रोजगार देने वाले उद्यमी बनने का साहस जुटाएं। इस दिशा में उठाया गया यह कदम स्थानीय स्तर पर स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत नींव का काम कर रहा है।

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी की दो टूक: प्रतिभा की कमी नहीं, मंच जरूरी

इस कार्यशाला में बलरामपुर जिले के कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने विशेष रूप से शिरकत की और युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ के इन सुदूर अंचलों के युवाओं के दिमाग में आइडियाज और टैलेंट की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि उन्हें सही समय पर सटीक मार्गदर्शन और एक ऐसा मंच मिले जहाँ वे अपनी कल्पनाओं को वास्तविकता में बदल सकें।

"हमारे युवाओं के पास तकनीकी दक्षता भी है और नया करने की ललक भी। आवश्यकता इस बात की है कि हम उन्हें पारंपरिक नौकरी की मानसिकता से बाहर निकालें और उन्हें अपने खुद के वेंचर शुरू करने के लिए प्रेरित करें। स्थानीय समस्याओं का स्थानीय स्तर पर तकनीकी समाधान ही असली विकास है।" - चंदन संजय त्रिपाठी, कलेक्टर, बलरामपुर

कलेक्टर का यह संदेश उन तमाम युवाओं के लिए एक वेक-अप कॉल की तरह है जो केवल बड़ी कंपनियों में नौकरी पाने को ही अपनी शिक्षा की इकलौती मंजिल मानते हैं।

संस्थान की भूमिका और प्रशासनिक मार्गदर्शन

इस पूरी कार्यशाला की रूपरेखा संस्था के प्राचार्य डॉ. एस.पी. मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में तैयार की गई थी। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विस्तार से समझाया गया कि कैसे वे अपने कॉलेज परिसर के भीतर ही 'स्टार्टअप, इंटरप्रेन्योरशिप एवं इनोवेशन सेल' की स्थापना कर सकते हैं और उसकी कार्यप्रणाली को कैसे सुचारू रूप से चलाया जा सकता है।

तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का ज्ञान होना कितना जरूरी है, इसे स्पष्ट करते हुए जिला रोजगार विभाग के मैनेजर कुशल प्रसाद सिंह ने भी छात्रों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही उन तमाम योजनाओं की जानकारी दी जिनके जरिए नए स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, सीड फंडिंग और शुरुआती स्तर पर कानूनी मदद मुहैया कराई जाती है।

समस्याओं की पहचान और तीन चरणों का एक्शन प्लान

यह कार्यशाला केवल भाषणों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें पूरी तरह से व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया गया। सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागों के छात्रों और व्याख्याताओं को मिलाकर विशेष रूप से तीन अलग-अलग समूहों में बांटा गया। इस प्रक्रिया के मुख्य चरण निम्नलिखित रहे:

  • पहला चरण - समस्याओं की मैपिंग: प्रत्येक समूह को अपने आसपास के स्थानीय समुदाय, उद्योगों और तकनीकी क्षेत्रों में आ रही वास्तविक जमीनी समस्याओं की पहचान करने का जिम्मा सौंपा गया।
  • दूसरा चरण - नवाचारी समाधान: पहचानी गई समस्याओं के आधार पर छात्रों ने व्यावहारिक और ऐसे तकनीकी समाधान तैयार किए जिन्हें कम लागत में लागू किया जा सके।
  • तीसरा चरण - आइडिया प्रस्तुतीकरण: अगले चरण में सभी समूहों ने अपने तैयार किए गए स्टार्टअप आइडियाज को जजों और विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत किया। इनमें से सबसे बेहतरीन और व्यावहारिक आइडिया को चुनकर उसे संस्था स्तर पर विकसित करने की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है।

स्थानीय समस्याओं पर आधारित इनोवेशन

इस कार्यशाला की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इसमें छात्रों को बड़े-बड़े वैश्विक प्रोजेक्ट्स पर सोचने के बजाय अपने इर्द-गिर्द मौजूद समस्याओं को हल करने के लिए कहा गया। चाहे वह ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतें हों, निर्माण कार्यों में आने वाली तकनीकी बाधाएं हों या फिर मैकेनिकल स्तर पर स्थानीय उद्योगों की जरूरतें हों—छात्रों ने इन्हीं मुद्दों को अपने स्टार्टअप का बेस बनाया है।

जब तकनीकी छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही समाज की किसी व्यावहारिक समस्या का समाधान खोजने लगते हैं, तो उनके भीतर का इंजीनियर एक उद्यमी में तब्दील होने लगता है। रामानुजगंज पॉलीटेक्निक की यह पहल न केवल उस संस्थान के छात्रों के लिए बल्कि पूरे राज्य के तकनीकी संस्थानों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन गई है।

भविष्य की राह और उम्मीदें

भारत सरकार और राज्य प्रशासन दोनों ही देश को स्टार्टअप नेशन बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में सुदूर बलरामपुर जैसे जिलों से यदि तकनीकी छात्र अपने खुद के स्टार्टअप्स के साथ बाहर आते हैं, तो यह क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। कार्यशाला के अंत में छात्रों में जिस तरह का उत्साह देखने को मिला, उससे यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में यह संस्थान छत्तीसगढ़ के तकनीकी मानचित्र पर एक नए स्टार्टअप हब के रूप में उभर सकता है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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