उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जनपद में जनता की शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए शनिवार को जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। जिले की सभी तहसीलों में 'संपूर्ण समाधान दिवस' का आयोजन किया गया, जहां दूर-दराज से पहुंचे आम नागरिकों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इस दौरान प्रशासनिक अमले ने लोगों की बात को गंभीरता से सुना और तय समय सीमा के भीतर मामलों के निस्तारण के कड़े निर्देश दिए।मड़िहान तहसील में उमड़ी फरियादियों की भीड़
जनपद की मड़िहान तहसील परिसर में आयोजित समाधान दिवस का दृश्य आम दिनों से काफी अलग था। सुबह से ही विभिन्न गांवों से पहुंचे फरियादी अपनी समस्याओं के समाधान की आस में कतारों में खड़े दिखाई दिए। इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई की कमान खुद जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) विशाल कुमार ने संभाल रखी थी। अधिकारियों की मौजूदगी ने समस्याओं के निस्तारण की उम्मीद को और पुख्ता कर दिया था।
जैसे ही जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार और सीडीओ विशाल कुमार ने जनसुनवाई शुरू की, शिकायतों का अंबार लगना शुरू हो गया। किसी ने जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत की, तो कोई बिजली के बढ़े हुए बिल और ट्रांसफार्मर फुंके होने की समस्या लेकर पहुंचा था। इसके अलावा राशन कार्ड, पेंशन योजना, और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी तमाम शिकायतें भी टेबल पर आईं।
अधिकारियों ने मौके पर ही दिए सख्त निर्देश
फरियादियों की फरियाद सुनते हुए जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर मौजूद विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को हिदायत दी कि जनता की शिकायतों को महज कागजी खानापूर्ति न समझा जाए। हर एक मामले की गहराई से जांच हो और धरातल पर परिणाम दिखने चाहिए।
मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार ने भी विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतों पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने ग्रामीण विकास, पंचायती राज और समाज कल्याण विभाग से जुड़े अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पेंशन और आवास जैसी योजनाओं में किसी भी स्तर पर हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी लापरवाही बरतता पाया गया, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।
किन विभागों से जुड़ी शिकायतें रहीं सबसे ज्यादा?
समाधान दिवस के दौरान प्राप्त हुए प्रार्थना पत्रों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि जनता को सबसे ज्यादा परेशानी राजस्व (Revenue) और पुलिस विभाग से जुड़े मामलों में हो रही है। इस प्रकार की शिकायतों की फेरिस्त में प्रमुख बिंदु निम्नलिखित रहे:
- भूमि विवाद और अवैध कब्जा: गांवों में जमीनों की पैमाइश, मेड़बंदी और सार्वजनिक जमीनों से अवैध कब्जा हटाने की मांग वाले आवेदन सबसे अधिक संख्या में दर्ज किए गए।
- पारिवारिक व वरासत विवाद: जमीनों के बंटवारे और वरासत दर्ज कराने के मामलों में हो रही देरी को लेकर लोगों ने गहरी नाराजगी जताई।
- पुलिस उत्पीड़न व सुरक्षा: थानों में सुनवाई न होने और मामलों की जांच में देरी के संबंध में भी कई फरियादियों ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी।
- बुनियादी सुविधाएं: जलापूर्ति, खड़ंजा निर्माण, नाली चोक होने और ग्रामीण सड़कों के जीर्णोद्धार से जुड़ी समस्याएं भी बड़े पैमाने पर सामने आईं।
समयबद्ध निस्तारण पर जोर
प्रशासन की ओर से बार-बार यह बात दोहराई जा रही है कि संपूर्ण समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य जनता को जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाना है। मड़िहान तहसील में आयोजित इस आयोजन के बाद डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सप्ताह भर के भीतर अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। जिन मामलों का निस्तारण मौके पर संभव नहीं था, उन्हें संबंधित थानों और थानों/तहसीलों के फील्ड अफसरों को सौंप दिया गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इसी प्रकार प्रशासनिक अमला हर बार संवेदनशीलता दिखाए, तो ग्रामीण इलाकों के लोगों को न्याय पाने के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा। बहरहाल, मड़िहान में डीएम और सीडीओ के इस संयुक्त दौरे और जनसुनवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन शिकायतों का वास्तविक समाधान कितने दिनों में धरातल पर उतरता है।