मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानों और राजनीतिक उठापटक का दौर हमेशा से ही सुर्खियों में रहता है। ताजा मामला डबरा से सामने आया है, जहां की एक राजनीतिक घटना ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। राज्य की दिग्गज नेत्री और पूर्व मंत्री इमरती देवी ने अपने ही अंदाज में एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने मंच पर बैठे लोगों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक निजी गार्डन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जब हर कोई उन्हें मंच पर देखने की उम्मीद कर रहा था, तब उन्होंने जो किया वह अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश था।
सेवा संकल्प कार्यक्रम में दिखा अनोखा नजारा
डबरा के एक निजी गार्डन में 'सेवा संकल्प कार्यक्रम' का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और राजनीतिक हस्तियां मौजूद थीं। आयोजकों ने पूर्व मंत्री इमरती देवी को भी इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया था। जब वह कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं, तो वहां मौजूद समर्थकों को लगा कि वह सीधे मंच की ओर जाएंगी और मुख्य अतिथियों के साथ स्थान ग्रहण करेंगी।
लेकिन, इसके उलट जो हुआ उसने वहां मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया। इमरती देवी ने मंच पर जाने के बजाय सीधे नीचे की कुर्सियों की तरफ रुख किया और वहीं जनता के बीच बैठ गईं। उनके इस कदम ने वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच कानाफूसी शुरू कर दी। हर कोई यही सोच रहा था कि आखिर पूर्व मंत्री ने ऐसा क्यों किया?
मंच पर जाने से इनकार की असली वजह
जब लोगों और मीडिया ने उनसे मंच पर न बैठने का कारण पूछा, तो इमरती देवी ने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने मंच पर बैठने से साफ इनकार करते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए। पूर्व मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह उस मंच पर कदापि नहीं बैठेंगी जहां आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग विराजमान हों।
"मंच पर मर्डर करने वाले लोग बैठे हैं, इसलिए मैं मंच के नीचे ही बैठी हूं।" - इमरती देवी, पूर्व मंत्री
उनके इस एक बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के होश उड़ा दिए। मंच पर बैठे जिन लोगों को लेकर यह बात कही गई, उनके चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। खुलेआम मंच से इस तरह की बात कहना किसी बड़े राजनीतिक धमाके से कम नहीं था।
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप
इमरती देवी का यह बयान सामने आने के बाद से ही मध्य प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर वह कौन लोग थे जिन्हें पूर्व मंत्री ने हत्या का आरोपी बताया और क्या इस कार्यक्रम के आयोजनों में सुरक्षा या प्रोटोकॉल को लेकर कोई चूक हुई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इमरती देवी का यह रुख उनकी बेबाक शैली को तो दर्शाता ही है, साथ ही यह भी साबित करता है कि वह अपनी शर्तों पर राजनीति करना पसंद करती हैं। उन्होंने मंच पर न जाकर सीधे जनता के बीच नीचे बैठकर यह संदेश देने की कोशिश की कि वह दागी छवि के लोगों के साथ मंच साझा करने में सहज नहीं हैं।
कार्यक्रम में सुरक्षा और व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरी घटना ने स्थानीय आयोजकों की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि यदि मंच पर ऐसे लोग मौजूद थे जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, तो उन्हें इस तरह के सार्वजनिक मंचों पर इतनी प्रमुखता क्यों दी जा रही है? क्या आयोजकों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि इन चेहरों की मौजूदगी से कार्यक्रम की गरिमा पर सवाल उठ सकते हैं?
- जनता के बीच चर्चा का विषय: आम जनता के बीच अब इस बात की चर्चा है कि राजनेताओं को इस प्रकार के आयोजनों में अपनी संगति का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
- नैतिकता का सवाल: राजनीतिक मंचों पर अपराधियों की मौजूदगी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, और इमरती देवी के इस बयान ने इस मुद्दे को एक बार फिर से हवा दे दी है।
- प्रशासन की भूमिका: इस मामले में पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी लोग नजर बनाए हुए हैं कि क्या इस बयान के बाद कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल, डबरा का यह 'सेवा संकल्प कार्यक्रम' अपने एजेंडे से ज्यादा इमरती देवी के इस बयान को लेकर चर्चा में आ गया है। जिस तरह से उन्होंने मंच का बहिष्कार कर नीचे बैठकर कार्यक्रम में हिस्सा लिया, उसने एक नया राजनीतिक ट्रेंड सेट कर दिया है। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान के बाद जिन लोगों पर इशारों-इशारों में आरोप लगाए गए हैं, उनकी तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है और पार्टी के उच्च स्तर पर इस मामले को किस रूप में लिया जाता है।