क्या आपके घर की अलमारी या बैंक लॉकर में भी सोना सिर्फ पड़ा हुआ है? एक आंकड़े के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास लगभग 30,000 टन सोना बिना किसी इस्तेमाल के निष्क्रिय (idle gold) पड़ा हुआ है। अब मोदी सरकार इस विशाल संपत्ति को देश की अर्थव्यवस्था में सक्रिय करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है।
बैंकों का झंझट खत्म! ज्वैलर्स बनेंगे 'कंट्रीब्यूटर'
मौजूदा समय में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) के तहत लोगों को अपना सोना बैंक में जमा कराने के लिए काफी कागजी कार्रवाई और लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। लेकिन अब इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने सरकार के सामने एक नया और बेहद व्यावहारिक मॉडल पेश किया है।
इस प्रस्ताव के अनुसार, सर्राफा कारोबारियों (Jewellers) को सीधे इस योजना में 'कंट्रीब्यूटर' (Contributors) के रूप में शामिल किया जाएगा। इसका मतलब है कि अब आम ग्राहक सीधे अपने नजदीकी भरोसेमंद ज्वैलर के पास जाकर अपना सोना जमा करा सकेंगे।
कैसे काम करेगा यह नया मॉडल?
- डायरेक्ट कलेक्शन: ग्राहक बैंक जाने के बजाय सीधे ज्वैलर के पास सोना जमा करेंगे।
- रिफाइनरी को ट्रांसफर: ज्वैलर्स ग्राहकों से सोना इकट्ठा करके उसे सीधे अधिकृत रिफाइनर्स को सौंप देंगे।
- बैंकों की भूमिका सीमित: इस पूरी प्रक्रिया से बैंक का फ्रंट-एंड झंझट पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे काम तेजी से होगा।
ज्वैलर्स को मिलेगा 1% तक का इंसेंटिव
इस योजना में सर्राफा व्यापारियों की रुचि बनाए रखने के लिए IBJA ने उनके लिए भी बड़े फायदे का खाका तैयार किया है। ग्राहकों से सोना इकट्ठा करने और उसे रिफाइनरी तक पहुंचाने के एवज में ज्वैलर्स को 0.75% से 1% तक का इंसेंटिव (कमिशन) दिए जाने का प्रस्ताव है। इससे स्थानीय सर्राफा बाजार को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
देश और आम लोगों को क्या होगा बड़ा फायदा?
"भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। अगर घरों में रखा 30,000 टन सोना बाजार में आ जाता है, तो देश का गोल्ड इंपोर्ट बिल काफी कम हो जाएगा और भारतीय रुपया भी मजबूत होगा।"
आम लोगों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जो सोना घर में बिना किसी ब्याज के सिर्फ सुरक्षा की चिंता पैदा करता था, अब वह बेहद आसान तरीके से उनके लिए हर साल नियमित कमाई का जरिया बन सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) क्या है?
यह सरकार की एक योजना है जिसमें आप अपना बेकार पड़ा सोना बैंक या अधिकृत केंद्र में जमा करके उस पर सालाना ब्याज कमा सकते हैं।
2. ज्वैलर्स के शामिल होने से आम जनता को क्या फायदा होगा?
अब ग्राहकों को बैंक के चक्कर काटने या लंबी कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी। वे अपने पसंदीदा और परिचित ज्वैलर के पास जाकर आसानी से सोना जमा कर सकेंगे।
3. क्या यह नियम लागू हो चुका है?
फिलहाल यह प्रस्ताव IBJA द्वारा सरकार को सौंपा गया है और मोदी सरकार इस पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है। जल्द ही इस पर आधिकारिक मुहर लग सकती है।