दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के गलियारों में इन दिनों सियासत का पारा अपने चरम पर है। साल 2026 के दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी डूसू (DUSU Election 2026) के लिए आज सुबह से ही मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यूनिवर्सिटी कैंपस से लेकर कॉलेजों तक में छात्रों का उत्साह देखते ही बन रहा है। इस बार चुनावी मैदान में कुल 2.75 लाख से अधिक रजिस्टर्ड छात्र अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आने वाले समय में यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति की दिशा तय करेंगे।
कड़ी सुरक्षा और उत्साह के बीच मतदान जारी
मतदान केंद्रों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। छात्र अपने पहचान पत्र के साथ पोलिंग बूथ पर पहुंच रहे हैं। किसी भी अप्रिय घटना से बचने और चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए दिल्ली पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। हर कॉलेज के गेट पर भारी पुलिस बल तैनात है और आने-जाने वाले हर शख्स की कड़ी जांच की जा रही है।
इस बार का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के अलावा अन्य छात्र संगठन और निर्दलीय उम्मीदवार भी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। हर दल के समर्थक अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में नारेबाज़ी कर रहे हैं और कैंपस का माहौल पूरी तरह से राजनीतिक रंग में रंग चुका है।
किन मुद्दों पर हो रहा है मतदान?
छात्रों के बीच इस बार कई बुनियादी और बड़े मुद्दे छाए हुए हैं। वोट डालने पहुंचे कई विद्यार्थियों ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके लिए मुख्य मुद्दे निम्नलिखित हैं:
- फीस बढ़ोतरी और मेट्रो कंसेशन: छात्र लगातार मेट्रो पास में कंसेशन और बढ़ी हुई फीस को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
- बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर: हॉस्टल की कमी डीयू की सबसे पुरानी समस्याओं में से एक है, जिस पर हर उम्मीदवार बात कर रहा है।
- सुरक्षा और प्लेसमेंट: कैंपस के भीतर और बाहर छात्राओं की सुरक्षा और बेहतर प्लेसमेंट सेल का गठन भी अहम चुनावी वादे हैं।
- लाइब्रेरी का समय: परीक्षा के दिनों में लाइब्रेरीज को 24 घंटे खुला रखने की मांग छात्र लंबे समय से कर रहे हैं।
दिग्गज संगठनों की प्रतिष्ठा दांव पर
डूसू चुनाव को देश की राजधानी की छात्र राजनीति का सेमीफाइनल माना जाता है। राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टियों के छात्र विंग होने के कारण इस चुनाव के नतीजे बड़े सियासी संदेश देते हैं। यही वजह है कि पिछले कई हफ़्तों से कैंपस में ताबड़तोड़ रैलियां, नुक्कड़ नाटक और जनसंपर्क अभियान चलाए गए।
एबीवीपी (ABVP) अपनी पिछली जीतों को बरकरार रखने के लिए मैदान में उतरी है, वहीं एनएसयूआई (NSUI) इस बार जोरदार वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है। इसके अलावा लेफ्ट संगठनों और अन्य क्षेत्रीय छात्र संगठनों का गठबंधन भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की पूरी कोशिश कर रहा है।
वोटिंग के बाद अब आगे क्या?
आज विभिन्न कॉलेजों में दो चरणों (मॉर्निंग और इवनिंग शिफ्ट) में वोटिंग संपन्न होगी। इसके बाद मतपेटी (EVMs/Ballot Boxes - स्थिति के अनुसार) को कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रख दिया जाएगा। चुनाव के नतीजे कब घोषित होंगे, इसकी आधिकारिक घोषणा प्रशासन द्वारा जल्द ही की जाएगी। मतगणना के दिन को लेकर भी कैंपस में भारी उत्सुकता बनी हुई है।
फिलहाल, डीयू के नॉर्थ और साउथ कैंपस के हर नुक्कड़ पर चुनावी चर्चाएं गर्म हैं। किसकी रणनीति कामयाब होगी और कौन बाजी मारेगा, यह तो नतीजों के बाद ही साफ होगा, लेकिन फिलहाल लोकतंत्र के इस सबसे बड़े छात्र उत्सव में युवाओं की भागीदारी यह साबित करती है कि वे अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह जागरूक हैं।