मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षाएं साल में एक बार नहीं, बल्कि दो बार आयोजित की जाएंगी। इस बड़े फैसले से उन लाखों युवाओं को सीधा फायदा मिलेगा जो लंबे समय से परीक्षा के अवसरों को बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
राजधानी भोपाल में आयोजित भव्य 'सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026' के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के युवाओं के लिए कई बड़े और दूरगामी ऐलान किए। इस दौरान उन्होंने घोषणा की कि आने वाले साल 2027 से मध्य प्रदेश में पीएससी की मुख्य परीक्षाएं नियमित रूप से साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही, उम्मीदवारों के लिए एक अतिरिक्त परीक्षा का भी विशेष प्रावधान किया जाएगा ताकि किसी कारणवश एक परीक्षा चूकने पर युवाओं को दूसरा मौका तुरंत मिल सके।
साल 2027 से बदल जाएगी चयन प्रक्रिया की तस्वीर
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हर छात्र के जीवन में एक साल का इंतजार बहुत लंबा होता है। अक्सर एक छोटी सी चूक या स्वास्थ्य खराब होने के कारण पूरा साल बर्बाद हो जाता है। इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। वर्ष 2027 से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत, आयोग का कैलेंडर इस तरह से तैयार किया जाएगा कि साल के अलग-अलग महीनों में दो चक्रों में परीक्षाएं संपन्न कराई जा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल प्रशासनिक पदों पर वैकेंसियों की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि युवाओं में व्याप्त डिप्रेशन और परीक्षा के तनाव को भी कम किया जा सकेगा। अतिरिक्त परीक्षा का विकल्प होने से छात्रों के पास सफलता प्राप्त करने के अवसरों में सीधे तौर पर दोगुना इजाफा हो जाएगा।
अगले साल को घोषित किया गया 'युवा वर्ष'
यूथ कॉन्क्लेव के मंच से मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार आगामी वर्ष को 'युवा वर्ष' के रूप में मनाएगी। इस विशेष वर्ष के दौरान शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और वैज्ञानिक शोध (Research) के क्षेत्र में कई बड़े और क्रांतिकारी परिवर्तन किए जाएंगे। सरकार का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का हर युवा केवल नौकरी ढूंढने वाला (Job Seeker) न बने, बल्कि नौकरी देने वाला (Job Provider) भी बने।
शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक विस्तार
सिर्फ परीक्षाओं तक ही सीमित नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़े लक्ष्य तय किए हैं:
- 12 नई स्किल यूनिवर्सिटी: राज्य के विभिन्न जिलों में 12 नई कौशल आधारित यूनिवर्सिटी खोली जाएंगी। इससे छात्रों को अपने गृह जिले के आसपास ही उच्च शिक्षा के बेहतरीन और आधुनिक विकल्प मिल सकेंगे।
- 12 नए मेडिकल कॉलेज: स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए वर्ष 2027 में 12 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जाएगी। इसका मतलब है कि औसतन हर महीने राज्य को एक नया मेडिकल कॉलेज मिलेगा।
शोधार्थियों के लिए फेलोशिप और स्टार्टअप फंड में भारी बढ़ोतरी
शोध (Research) कार्य करने वाले युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शासकीय कॉलेजों में रिसर्च करने वाले छात्रों की स्कॉलरशिप को ₹16,000 प्रति माह से बढ़ाकर सीधे ₹25,000 प्रति माह कर दिया गया है। इसके अलावा, जिन युवाओं के पास नए और इनोवेटिव बिजनेस आइडिया हैं, उन्हें धरातल पर उतारने के लिए ₹5 करोड़ का एक विशेष स्टार्टअप फंड भी तैयार किया जा रहा है, जिससे युवा उद्यमी आसानी से अपना बिजनेस शुरू कर सकें।रोजगार और औद्योगिक विकास के मोर्चे पर एमपी की छलांग
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की बदलती हुई आर्थिक तस्वीर का जिक्र करते हुए कहा कि कभी मध्य प्रदेश को केवल एक कृषि प्रधान राज्य माना जाता था, लेकिन आज यह प्रदेश उद्योग, इंजीनियरिंग, आईटी और मेडिकल हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। पिछले ढाई वर्षों के भीतर राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में कुल 85,000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं, और यह सिलसिला लगातार जारी है।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं के जज्बे और हौसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के युवा अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है और उनके उज्जवल भविष्य के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।