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नागपुर में कटेंगे 14 लाख वोटर्स के नाम? एसआईआर अभियान खत्म, 24 अगस्त को बड़ा खुलासा

नागपुर में कटेंगे 14 लाख वोटर्स के नाम? एसआईआर अभियान खत्म, 24 अगस्त को बड़ा खुलासा

लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व यानी मतदान में हिस्सा लेने के लिए वोटर लिस्ट में नाम होना सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अचानक आपके इलाके के लाखों लोगों का नाम इस सूची से गायब हो जाए? महाराष्ट्र के नागपुर जिले से एक ऐसी ही चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों के बीच हलचल बढ़ा दी है। जिले में चलाए गए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है, जो बताता है कि 14 लाख से ज्यादा मतदाताओं के आवेदन प्रशासन तक नहीं पहुंचे हैं।

आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है, क्यों इतने बड़े पैमाने पर आवेदन लटके हैं और इसका आम मतदाताओं पर क्या असर पड़ने वाला है?

क्या है पूरा मामला और क्यों चलाया गया SIR अभियान?

मतदाता सूचियों को पूरी तरह से पारदर्शी, त्रुटिमुक्त और शुद्ध बनाने के लिए जिला निर्वाचन विभाग की ओर से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया गया था। यह अभियान राज्यभर में 30 जून से शुरू हुआ था और इसकी महत्ता को देखते हुए इसकी समयसीमा दो बार बढ़ाई गई थी। आखिरकार, तमाम दौर के बाद यह अभियान सोमवार, 17 अगस्त की मध्यरात्रि को समाप्त हो गया।

जिला निर्वाचन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नागपुर जिले में कुल 46,38,589 मतदाता दर्ज हैं। इनमें से 14,26,106 मतदाताओं के आवेदन तय समयसीमा के भीतर प्रशासन को प्राप्त नहीं हुए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन 14 लाख से अधिक लोगों के नाम आगामी मतदाता सूची से हमेशा के लिए काट दिए जाएंगे?

31.88 लाख आवेदन हुए डिजिटाइज

इस अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की यह जिम्मेदारी थी कि वे घर-घर जाकर मतदाताओं को पंजीकरण फॉर्म उपलब्ध कराएं, उसे भरवाएं और फिर उसे वापस जमा करके कंप्यूटरीकृत (डिजिटाइज) करें।

  • कुल डिजिटाइज्ड आवेदन: नागपुर जिले में अब तक 31,88,930 मतदाताओं के आवेदन सफलतापूर्वक डिजिटाइज किए जा चुके हैं।
  • लंबित आवेदन: अभी भी लगभग 23 हजार से अधिक आवेदन ऐसे हैं जिनका डिजिटाइजेशन प्रक्रिया में है। निर्वाचन विभाग का दावा है कि इन्हें तय समय में पूरा कर लिया जाएगा।

क्यों नहीं मिल पाए 14.26 लाख आवेदन?

प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द यह 14,26,106 का आंकड़ा है। निर्वाचन विभाग के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, इस भारी-भरकम संख्या में कई तरह के मामले शामिल हैं:

इस सूची में वे नाम भी शामिल हैं जो दो-तीन जगह दर्ज हैं (दोहराए गए नाम), जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो लोग दूसरे शहरों या राज्यों में प्रवास कर चुके हैं, या फिर जो सत्यापन के दौरान अपने घरों पर नहीं मिले और जिनका कोई अता-पता नहीं चल पाया। हालांकि, इनमें 'घर पर न मिलने' और 'पता न मिलने' वाले मामलों की संख्या सबसे ज्यादा है।

शहर के छह विधानसभा क्षेत्रों में 9.06 लाख नामों पर असमंजस

स्थिति तब और दिलचस्प हो जाती है जब हम क्षेत्रीय आंकड़ों पर नजर डालते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन 14.26 लाख संदिग्ध मतदाताओं में से 9,06,297 अकेले नागपुर शहर के छह विधानसभा क्षेत्रों से ताल्लुक रखते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि मध्य नागपुर को छोड़कर शहर के बाकी पांच विधानसभा क्षेत्रों में लगभग डेढ़-डेढ़ लाख मतदाताओं के आवेदन गायब या अनुਪलब्ध पाए गए हैं। सभी क्षेत्रों में यह आंकड़ा लगभग समान रहना प्रशासनिक कार्यप्रणाली और BLO स्तर पर हुए सत्यापन पर भी कई सवाल खड़े कर रहा हैनियमित वोटर्स में भी क्यों डर का माहौल है?

इस पूरी प्रक्रिया से केवल फर्जी या मृत मतदाता ही नहीं, बल्कि कई ऐसे लोग भी डरे हुए हैं जो नियमित रूप से अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते आए हैं। कई नागरिकों का दावा है कि उनके नाम 2024 की लोकसभा और विधानसभा सूचियों में थे और उन्होंने हालिया चुनावों में वोट भी डाला था। इसके बावजूद, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपना रिकॉर्ड साबित करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

"हमने अपने सारे पहचान पत्र और पिछले चुनावों की पर्चियां तक संभाल कर रखी हैं, लेकिन हमें यह तक पता नहीं चल पाया कि हमारे क्षेत्र का असली बीएलओ (BLO) कौन है। अगर जानकारी के अभाव में हमारा नाम कटता है, तो यह लोकतंत्र के साथ नाइंसाफी होगी।" - एक स्थानीय मतदाता का दर्द

24 अगस्त को खुलेगा पत्ता, जानें आगे क्या होगा?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन 14.26 लाख लोगों के नाम पूरी तरह से काट दिए जाएंगे। असली तस्वीर 24 अगस्त को साफ होगी, जब जिला निर्वाचन विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर प्रारूप मतदाता सूची (Draft Voter List) का प्रकाशन किया जाएगा।

अगर आपका नाम या आपके किसी परिजन का नाम इस सूची में नहीं मिलता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। प्रशासन इसके बाद नागरिकों को 'दावे और आपत्तियां' (Claims and Objections) दर्ज कराने का विधिवत मौका देगा। आप निर्धारित अवधि के भीतर उचित दस्तावेज जमा करके अपना नाम वापस सूची में जुड़वा सकते हैं। इसलिए 24 अगस्त के बाद अपने नजदीकी मतदान केंद्र या ऑनलाइन पोर्टल पर सूची की जांच जरूर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: नागपुर में SIR अभियान कब समाप्त हुआ?

Ans: नागपुर जिले में मतदाता सूची शुद्धिकरण के लिए चलाया गया SIR अभियान 17 अगस्त की मध्यरात्रि को समाप्त हो गया।

Q2: प्रारूप मतदाता सूची (Draft Voter List) कब प्रकाशित होगी?

Ans: नागपुर जिले की नई प्रारूप मतदाता सूची 24 अगस्त को जारी की जाएगी, जिसमें स्पष्ट होगा कि किसके नाम सूची में हैं और किसके हटे हैं।

Q3: अगर मेरा नाम 24 अगस्त की सूची में नहीं हुआ, तो मुझे क्या करना चाहिए?

Ans: यदि आपका नाम सूची से गायब मिलता है, तो आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर आपको अपना दावा या आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा, जिसके तहत आप जरूरी दस्तावेज देकर अपना नाम पुनः जुड़वा सकते हैं।।

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रिपोर्टर: Alka Singh

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