पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से सबसे संवेदनशील और चर्चा में रहने वाली नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले अदालत के गलियारों से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मिलन प्रधान को साल 2007 में दर्ज छह पुराने आपराधिक मामलों में अंतरिम राहत देते हुए बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत के इस फैसले से न केवल कांग्रेस खेमे में राहत की सांस ली गई है, बल्कि चुनावी मैदान में प्रचार का रास्ता भी साफ हो गया है।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की अदालत ने कांग्रेस उम्मीदवार को 20 अक्टूबर तक के लिए यह अंतरिम जमानत मंजूर की है। इसके साथ ही उन्हें आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए पूरी बेबाकी के साथ प्रचार करने की अनुमति भी दे दी गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपचुनाव के इस दौर में अदालत का यह फैसला कांग्रेस उम्मीदवार के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित हो सकता है, क्योंकि प्रचार का वक्त अब बेहद कम बचा है।
पुराने मामलों का साया और भूमि अधिग्रहण आंदोलन
मिलन प्रधान के खिलाफ दर्ज ये तमाम आपराधिक मामले कोई आम मामले नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध उस ऐतिहासिक दौर से है जब पूरा नंदीग्राम इलाका भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सुलग रहा था। साल 2007 के दौरान जब बंगाल में भूमि अधिग्रहण के विरोध में उग्र आंदोलन चल रहा था, तब आंदोलनकारियों के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए गए थे। इसी दौरान मिलन प्रधान पर हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट यानी शस्त्र अधिनियम के गंभीर प्रावधानों के उल्लंघन जैसे संगीन आरोप लगाते हुए मामले दर्ज किए गए थे।
अदालत के निर्देशानुसार, न्याय की प्रक्रिया का पालन करते हुए मिलन प्रधान को उन सभी छह मामलों में 20-20 हजार रुपये का व्यक्तिगत मुचलका यानी जमानती बांड जमा करना होगा। इसके अलावा, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि राहत की यह मियाद 20 अक्टूबर तक ही वैध रहेगी और इसके अगले ही दिन यानी 21 अक्टूबर को कांग्रेस उम्मीदवार को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
उपचुनाव का पूरा गणित और अहम तिथियां
यह महत्वपूर्ण उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। इस साल के शुरुआत में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों ही हॉट सीटों से अपनी किस्मत आजमाई थी और दोनों ही जगहों पर शानदार जीत हासिल की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट को अपने पास रखने का निर्णय लिया और नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण यहां फिर से चुनावी रण सजा है।
- उपचुनाव की तारीख: 6 अक्टूबर 2026
- प्रचार समाप्ति: 4 अक्टूबर 2026
- मतगणना की तारीख: 9 अक्टूबर 2026
निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार इस हाई-प्रोफाइल सीट पर चुनाव प्रचार का शोर 4 अक्टूबर की शाम को थम जाएगा। ऐसे में मिलन प्रधान को अदालत से मिली यह अनुमति उनके लिए प्रचार अभियान को अंतिम और निर्णायक गति देने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। वहीं, 9 अक्टूबर को होने वाली मतगणना यह तय करेगी कि इस बार नंदीग्राम की जनता किसके सिर पर ताज सजाती है।
भाजपा उम्मीदवार की उम्मीदवारी पर कांग्रेस की याचिका खारिज
एक तरफ जहां कांग्रेस अपने उम्मीदवार के लिए कानूनी राहत हासिल करने में कामयाब रही, वहीं दूसरी तरफ पार्टी को अदालत में एक मोर्चे पर झटके का भी सामना करना पड़ा। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार हासिरानी रथ के चुनावी हलफनामे में उम्र संबंधी विसंगति (डिफरेंस) होने का गंभीर आरोप लगाया गया था।
कांग्रेस का मुख्य तर्क था कि हासिरानी रथ द्वारा दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में उनकी आयु 60 वर्ष से अधिक दर्शाई गई है, जबकि उनके दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने का वर्ष 1965 दर्ज है। कांग्रेस पार्टी के वकीलों का कहना था कि इन दोनों ही आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर है, जो अपने आप में एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। पार्टी की मांग थी कि निर्वाचन आयोग को इन दस्तावेजों की गहराई से जांच करनी चाहिए क्योंकि यह सीधे तौर पर मतदाताओं को गुमराह करने जैसा है।
निर्वाचन आयोग और अदालत का स्पष्ट रुख
सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि उम्र में कथित रूप से सामने आया यह अंतर इतना बड़ा या गंभीर कानूनी दोष नहीं माना जा सकता जिसके आधार पर किसी भी उम्मीदवार की उम्मीदवारी को सीधे तौर पर रद्द कर दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि देश के चुनावी कानूनों के मुताबिक चुनाव लड़ने के लिए कोई भी अधिकतम आयु सीमा तय नहीं की गई है, इसलिए इस तकनीकी बिंदु पर उम्मीदवारी खारिज करना न्यायसंगत नहीं होगा।
कांग्रेस की तरफ से बहस कर रहे वकील ऋजु घोषाल ने जोर देकर कहा था कि उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की सत्यता की जांच करना और उनका सत्यापन करना पूरी तरह से निर्वाचन आयोग का सांविधिक दायित्व है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि भाजपा उम्मीदवार द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की अदालत की निगरानी में जांच का आदेश दिया जाए। हालांकि, अदालत ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद कांग्रेस की इस याचिका को खारिज कर दिया, जिससे भाजपा उम्मीदवार को इस विवाद से बड़ी राहत मिल गई है।
चुनावी फिजा और जनता का मूड
नंदीग्राम का यह उपचुनाव महज एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में अपनी ताकत दिखाने का एक बड़ा अखाड़ा बन चुका है। कानूनी दांव-पेंच, पुराने आंदोलनों की यादें और उम्मीदवारों के हलफनामों पर छिड़ी रार के बीच अब पूरा ध्यान आगामी 6 अक्टूबर को होने वाली वोटिंग पर टिक गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस कानूनी बाधाओं से पार पाकर मैदान में उतर चुकी है, वहीं दूसरी तरफ सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब देखना यह होगा कि इस राजनीतिक सरगर्मी के बीच नंदीग्राम की जागरूक जनता किस दल के पाले में अपना समर्थन डालती है।