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नेपाल बाढ़ हादसा: चीनी सुपरवाइजर पर टनल में मजदूरों को छोड़कर भागने का आरोप

नेपाल बाढ़ हादसा: चीनी सुपरवाइजर पर टनल में मजदूरों को छोड़कर भागने का आरोप

सितंबर 2026 की शुरुआत में नेपाल से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने विदेशी निर्माण परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और वहां के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल (Trishuli Hydropower Tunnel) में फंसे भारतीय मजदूर राज क्षेत्री (Raj Chhetri) मौत के मुंह से बाल-बाल बचे हैं। सुरक्षित बाहर लौटने के बाद राज क्षेत्री ने अपनी आपबीती साझा करते हुए वहां तैनात चीनी सुपरवाइजर पर बेहद गंभीर और अमानवीय आरोप लगाए हैं।

मौत की वो खौफनाक रात: राज क्षेत्री की जुबानी

राज क्षेत्री बताते हैं कि वह अन्य मजदूरों के साथ त्रिशूली नदी जलविद्युत परियोजना (Trishuli River Hydropower Project) की टनल के भीतर सामान्य दिनों की तरह काम कर रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में यह कार्यस्थल किसी खौफनाक कब्रगाह में बदल जाएगा। बाहर मूसलाधार बारिश के चलते बाढ़ का तांडव शुरू हो चुका था और कुछ ही देर में पानी का तेज बहाव टनल के भीतर घुसने लगा।

पानी के अचानक और बेकाबू बहाव ने टनल के अंदर तबाही मचा दी। चारों तरफ अफरातफरी मच गई, घना अंधेरा छा गया और पानी के तेज शोर के बीच मजदूरों की चीख-पुकार गूंज उठी। इस संकट की घड़ी में जब इंसानीियत और सूझबूझ की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वहां के प्रबंधन ने ऐसा रवैया अपनाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।

चीनी सुपरवाइजर की संवेदनहीनता और लापरवाही

घायल और सदमे में मौजूद राज क्षेत्री ने खुलासा किया कि खतरे को भांपते ही चीनी सुपरवाइजर ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना रुख दिखाया। सुपरवाइजर ने अंदर फंसे भारतीय और स्थानीय मजदूरों को बचाने या उन्हें चेतावनी देने की जहमत तक नहीं उठाई। इसके उलट, उसने अपनी जान बचाने को प्राथमिकता दी और टनल का मुख्य गेट बंद करके अकेले ही बाहर भागने की कोशिश की, ताकि अंदर मौजूद मजदूर बाहर न आ सकें।

  • अचानक पानी का प्रवेश: टनल के भीतर चेतावनी तंत्र फेल होने के कारण मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला।
  • दरवाजा बंद करने की कोशिश: चीनी सुपरवाइजर पर आरोप है कि उसने खुद को बचाने के लिए टनल के निकास द्वार को बंद करने का प्रयास किया।
  • मानवता को शर्मसार करने वाला कदम: संकट के समय मजदूरों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया।

मौत के खिलाफ जंग और चमत्कारिक वापसी

सुपरवाइजर के इस अमानवीय रवैये के बावजूद राज क्षेत्री और उनके कुछ अन्य साथियों ने हार नहीं मानी। मौत को सामने देख उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। पानी के तेज बहाव, तैरने की जद्दोजहद और मलबे के बीच से रास्ता बनाते हुए वे किसी तरह टनल के मुहाने तक पहुंचने में कामयाब रहे। राज क्षेत्री का यह बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है, लेकिन उनके मन में उस रात का खौफ आज भी जिंदा है।

विदेशी परियोजनाओं और सुरक्षा मानकों पर उठे बड़े सवाल

इस हादसे के बाद नेपाल में चल रही चीनी परियोजनाओं (Chinese Projects in Nepal) की कार्यप्रणाली पर देश-दुनिया में बहस छिड़ गई है। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय प्रशासन से जुड़े जानकारों का कहना है कि विदेशी कंपनियां नेपाल में मुनाफे के चक्कर में मजदूरों के जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं। सुरक्षा मानकों (Safety Standards) की अनदेखी और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कोई ठोस प्रोटोकॉल का पालन न होना इन कंपनियों की कार्यशैली पर बड़ा धब्बा है।

राज क्षेत्री द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद नेपाल के स्थानीय प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह इस घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाए। नेपाल के कई हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण वर्तमान में कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स का काम रुका हुआ है, लेकिन इस हादसे ने विदेशी कंपनियों के मैनेजमेंट और उनके अमानवीय व्यवहार को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई

यह घटना सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानव निर्मित लापरवाही का एक भयावह उदाहरण है। राज क्षेत्री जैसे मजदूरों की बहादुरी ने भले ही उनकी जान बचा ली हो, लेकिन ऐसे लापरवाह सुपरवाइजरों और सिस्टम के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी अन्य मजदूर को इस तरह की अमानवीय परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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