हॉलीवुड सिनेमा जगत में इन दिनों एक बयान ने हलचल मचा दी है। अपने बेबाक अंदाज और शानदार अभिनय के लिए पूरी दुनिया में पहचाने जाने वाले ऑस्कर विजेता अभिनेता निकोलस केज (Nicolas Cage) ने मार्वेल सिनेमैटिक यूनिवर्स यानी एमसीयू (MCU) की कार्यशैली पर बड़ा सवाल उठाया है। 62 वर्षीय अभिनेता ने हाल ही में डलास में आयोजित एक फैन एक्सपो के दौरान मार्वेल की फिल्मों के वर्तमान स्वरूप की तुलना एक बड़े बजट वाले प्रो-रेसलिंग शो यानी 'डब्ल्यूडब्ल्यूई' (WWE) से कर डाली है। उनके इस बयान के बाद से ही वैश्विक सिनेमा गलियारों में और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई मार्वेल की फिल्में अब अपनी मूल आत्मा को खो चुकी हैं?
शुरुआती दौर के प्रशंसक रहे हैं निकोलस केज
फैन एक्सपो के दौरान बातचीत करते हुए निकोलस केज ने स्पष्ट किया कि वह मार्वेल के कट्टर विरोधी नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शुरुआती दौर में इस फ्रेंचाइजी के काम करने के तरीके की जमकर तारीफ की थी। उनके अनुसार, शुरुआत में जिस तरह से अलग-अलग किरदारों की कहानियों को बुना गया और उनके बैकस्टोरी को आपस में जोड़ा गया, वह अपने आप में एक चमत्कारिक प्रयोग था। अभिनेता ने माना कि दर्शक के तौर पर उन्होंने उन कहानियों का पूरा आनंद लिया था।
लेकिन वक्त के साथ जैसे-जैसे मार्वेल का दायरा बढ़ा और फिल्मों का मुख्य फोकस चरित्र-आधारित (character-driven) कहानियों से हटकर बड़े पैमाने पर एक्शन दृश्यों और युद्ध के मैदानों पर केंद्रित हुआ, वैसे-वैसे निकोलस केज का नजरिया भी बदलता चला गया।
'यह सब कुछ फाइटिंग तक सीमित रह गया है'
अपने चिरपरिचित अंदाज में बात को रखते हुए निकोलस केज ने कहा कि वह अपने इस बयान को पूरी तरह से प्यार और सम्मान के साथ कह रहे हैं, लेकिन सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा, “जब मैं पचास से अधिक उम्र के उन शानदार और बेहद प्रतिभाशाली कलाकारों को देखता हूं, जो अजीबो-गरीब पोशाकें पहनकर सिर्फ फाइटिंग के लिए तैयार होते हैं—और सच कहें तो अंत में सब कुछ कट करके फाइट सीन पर ही आ जाता है—तो मेरे लिए यह याद रखना मुश्किल नहीं रह जाता कि एमसीयू अब एक अच्छे खासे फंड वाला और महिमामंडित डब्ल्यूडब्ल्यूई (WWE) बनता जा रहा है।”
हॉलीवुड के इस दिग्गज अभिनेता का इशारा साफ तौर पर इस बात की ओर था कि अब मार्वेल की फिल्मों में गहरी पटकथा और भावनात्मक गहराई की जगह सिर्फ मारधाड़, स्पेशल इफेक्ट्स और लगातार होने वाली लड़ाइयों ने ले ली है।
मार्वेल यूनिवर्स से पुराना नाता रहा है
आपको बता दें कि निकोलस केज खुद भी मार्वेल की दुनिया से अछूते नहीं रहे हैं। उन्होंने साल 2007 में आई सुपरहिट फिल्म 'घोस्ट राइडर' (Ghost Rider) और इसके सीक्वल 'घोस्ट राइडर: स्पिरिट ऑफ वेंगेन्स' (2012) में मुख्य किरदार जॉनी ब्लेज यानी घोस्ट राइडर की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, हाल ही में उन्होंने सोनी की मार्वेल सीरीज 'स्पाइडर-नॉयर' (Spider-Noir) में भी मुख्य भूमिका निभाई थी, हालांकि उस सीरीज को आठ एपिसोड्स का पहला सीजन पूरा होने के बाद रद्द कर दिया गया था।
एमसीयू का सफर और भविष्य के प्रोजेक्ट्स
मार्वेल सिनेमैटिक यूनिवर्स की शुरुआत साल 2008 में 'आयरन मैन' (Iron Man) फिल्म से हुई थी, जिसमें रॉबर्ट डाउनी जूनियर ने अरबपति उद्योगपति टोनी स्टार्क का किरदार निभाकर इतिहास रच दिया था। इसके बाद मार्वेल ने थॉर, कैप्टन अमेरिका, ब्लैक विडो और हॉकआई जैसे कई प्रतिष्ठित किरदारों को दुनिया के सामने पेश किया और साल 2012 में 'द एवेंजर्स' के जरिए इन सबको एक मंच पर लाकर ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था। तब से लेकर अब तक यह फ्रेंचाइजी फिल्मों और टेलीविजन सीरीज के जरिए लगातार फैलती जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि निकोलस केज द्वारा निभाया गया लोकप्रिय किरदार 'घोस्ट राइडर' एक बार फिर से एमसीयू के भीतर पुनर्जीवित होने जा रहा है। मार्वेल स्टूडियोज की आगामी फिल्म 'घोस्ट राइडर' में रयान गोसलिंग इस प्रतिष्ठित भूमिका को निभाते नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन शॉन लेवी कर रहे हैं और इसके 28 जुलाई, 2028 को सिनेमाघरों में रिलीज होने की उम्मीद है।
दर्शकों और समीक्षकों के बीच छिड़ी नई बहस
निकोलस केज के इस बयान ने एक बार फिर से उस पुरानी बहस को हवा दे दी है क्या सुपरहीरो जॉनर अब रचनात्मक रूप से थक चुका है? पिछले कुछ वर्षों में सिनेमा जगत के कई बड़े निर्देशकों और अभिनेताओं (जैसे मार्टिन स्कोर्सेसे और क्वेंटिन टारनटिनो) ने भी मार्वेल फिल्मों को लेकर इसी तरह की आलोचनाएं की हैं। उनका भी यही मानना रहा है कि सुपरहीरो फिल्में सिनेमा कम और किसी थीम पार्क की सवारी की तरह ज्यादा लगती हैं।
अब देखना यह होगा कि मार्वेल स्टूडियोज के कर्ताधर्ता निकोलस केज की इस टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और आने वाले समय में अपनी फिल्मों की पटकथा में किस तरह का बदलाव लाते हैं, ताकि इस तरह की आलोचनाओं से पार पाया जा सके।