राजनीतिक गलियारों में अक्सर खींचतान और बयानों के तीर ही देखने को मिलते हैं, लेकिन कई बार जनहित से जुड़े मुद्दों पर राजनेताओं की त्वरित प्रतिक्रिया एक नया उदाहरण पेश कर जाती है। ऐसा ही एक वाकया हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और मध्य प्रदेश की राजनीति के बीच देखने को मिला। जबलपुर के खराब संपर्क मार्गों और नेशनल हाईवे की बदहाली को लेकर कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा द्वारा लिखे गए एक पत्र पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने महज पांच मिनट के भीतर फोन कर न सिर्फ स्थिति की जानकारी ली, बल्कि तत्काल प्रभाव से कड़े एक्शन के निर्देश भी जारी कर दिए।
महज पांच मिनट का फासला: पत्र पहुंचते ही एक्शन मोड में आए मंत्री
घटनाक्रम के मुताबिक, मध्य प्रदेश के जबलपुर क्षेत्र में लंबे समय से जर्जर सड़कों और खराब संपर्क मार्गों को लेकर स्थानीय नागरिक और यात्री भारी परेशानियों का सामना कर रहे थे। सड़कों पर बने बड़े-बड़े गड्ढे और धूल के गुबार आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुके थे। इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को एक विस्तृत पत्र लिखा।
पत्र भेजने के बाद शायद ही किसी ने यह उम्मीद की होगी कि इतनी जल्दी कोई प्रशासनिक या राजनीतिक हलचल होगी, लेकिन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अपनी कार्यशैली और त्वरित निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। जैसे ही उनका कार्यालय में यह पत्र प्राप्त हुआ, उन्होंने बिना किसी देरी के खुद विवेक तन्खा को फोन मिलाया। फोन पर हुई बातचीत के दौरान गडकरी ने न केवल पूरे मामले की गंभीरता को समझा, बल्कि संबंधित अधिकारियों को तुरंत तलब कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दे दिए।
जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे की बदहाली पर था जोर
विवेक तन्खा द्वारा लिखे गए इस पत्र में मुख्य रूप से जबलपुर और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों की दयनीय स्थिति का जिक्र किया गया था। भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे के कई हिस्से बारिश और रख-रखाव के अभाव में इस कदर टूट चुके हैं कि वहां सफर करना किसी खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों का समय बर्बाद हो रहा था और वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे थे।
सांसद तन्खा ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया था कि किस प्रकार इन महत्वपूर्ण मार्गों पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं और समय पर मरम्मत न होने के कारण यह हादसे का सबब बनते जा रहे हैं। जनता की इस तकलीफ को जब एक जनप्रतिनिधि ने सही मंच पर और सही समय पर उठाया, तो केंद्रीय स्तर पर बैठे जिम्मेदार मंत्री ने भी बिना किसी राजनीतिक पूर्वाग्रह के फौरन कदम उठाया।
राजनीति से परे जनहित की मिसाल
आज के दौर में जहां राजनीतिक दलों के बीच हर छोटी-दस्तक पर बयानबाजी और तीखी प्रतिक्रियाएं आम हो चुकी हैं, वहीं इस प्रकार का वाकया एक स्वस्थ लोकतंत्र की सुंदर तस्वीर पेश करता है। पक्ष और विपक्ष के दायरे से ऊपर उठकर जब कोई मंत्री किसी विपक्षी दल के सांसद की बात को इतनी गंभीरता से सुनता है और चंद मिनटों में समाधान की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो आम जनता का सिस्टम पर भरोसा और मजबूत होता है।
अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने फोन पर ही अपने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे तत्काल प्रभाव से एक तकनीकी टीम को मौके पर भेजें। सड़कों की मरम्मत के लिए जो भी आवश्यक बजट या संसाधन की जरूरत है, उसे तुरंत आवंटित किया जाए ताकि बारिश के मौसम के बाद होने वाली परेशानियों से निजात मिल सके।
- जबलपुर और आसपास के सभी मुख्य मार्गों का होगा सर्वे।
- सड़कों पर बने गड्ढों को भरने का काम युद्धस्तर पर शुरू करने के आदेश।
- गुणवत्ता से कोई समझौता न करने की दी गई कड़ी हिदायत।
जनता में जगी उम्मीद
केंद्रीय मंत्री की इस तत्परता के बाद जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में एक नई उम्मीद जागी है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना की खासी चर्चा हो रही है, जहां लोग नितिन गडकरी के काम करने के तरीके की सराहना कर रहे हैं, वहीं सांसद विवेक तन्खा द्वारा उठाए गए इस कदम को भी जनता के हितों के अनुकूल बताया जा रहा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि इस त्वरित निर्देश के बाद जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी काम शुरू होता है और जनता को खराब सड़कों से कब तक पूरी तरह राहत मिल पाती है। बहरहाल, इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और मुद्दे जनहित से जुड़े हों, तो फाइलों के चक्कर में उलझने के बजाय समाधान महज कुछ ही मिनटों की दूरी पर हो सकता है।