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ओला-उबर में 'एडवांस टिप' पर सरकार की बड़ी रोक, अब राइड से पहले नहीं देना होगा एक्स्ट्रा पैसा

ओला-उबर में 'एडवांस टिप' पर सरकार की बड़ी रोक, अब राइड से पहले नहीं देना होगा एक्स्ट्रा पैसा

क्या अब आपकी जेब पर कम पड़ेगा बोझ? ओला-उबर को सरकार का बड़ा झटका

अगर आप रोजाना ओला (Ola), उबर (Uber) या रैपिडो (Rapido) जैसी कैब और ऑटो सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए राहत भरी हो सकती है। केंद्र सरकार ने हाल ही में राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स की मनमानी पर लगाम कसते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अब इन ऐप्स पर यात्रियों को राइड शुरू होने से पहले 'एडवांस टिप' (Advance Tip) देने के लिए मजबूर या लुभाया नहीं जा सकेगा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में एक कड़ा सर्कुलर जारी कर इन प्लेटफॉर्म्स को तत्काल प्रभाव से इस फीचर को हटाने का निर्देश दिया है। आखिर सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा और इसका आम यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा? आइए विस्तार से समझते हैं।

क्यों बंद हुआ 'एडवांस टिप' का फीचर?

पिछले कुछ समय से ओला और उबर जैसे ऐप्स पर बुकिंग के दौरान एक नया फीचर दिखाई दे रहा था, जिसमें यूजर से राइड शुरू होने से पहले ही टिप देने का विकल्प पूछा जाता था। मंत्रालय की जांच में यह पाया गया कि यह व्यवस्था न केवल उपभोक्ताओं के लिए भ्रमित करने वाली थी, बल्कि यह 'अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस' की श्रेणी में भी आ रही थी।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,

"यात्रियों को राइड से पहले टिप देने के लिए प्रेरित करना एक तरह का मनोवैज्ञानिक दबाव है। टिप हमेशा सेवा की गुणवत्ता पर आधारित होनी चाहिए, न कि राइड शुरू होने से पहले ही एक अनिवार्य विकल्प की तरह।"

उपभोक्ताओं के लिए क्या हैं बड़े बदलाव?

  • वैकल्पिक टिपिंग: अब कंपनियां राइड शुरू होने से पहले टिप का सुझाव नहीं देंगी। यदि कोई यात्री अपनी मर्जी से सेवा से खुश होकर टिप देना चाहता है, तो वह राइड खत्म होने के बाद दे सकता है।
  • पारदर्शिता: सरकार का मानना है कि इस कदम से ऐप पर दिखने वाले फेयर (किराये) में पारदर्शिता आएगी और यात्री बिना किसी अतिरिक्त दबाव के राइड बुक कर सकेंगे।
  • डार्क पैटर्न पर रोक: सरकार लगातार ऐप्स के 'डार्क पैटर्न' (Dark Patterns) को खत्म करने पर काम कर रही है, और यह फैसला उसी मुहिम का हिस्सा है।

कंपनियों की सफाई और चुनौतियां

हालांकि, इन राइड-हेलिंग कंपनियों का तर्क है कि वे अपने ड्राइवरों की कमाई बढ़ाने के लिए यह फीचर लाए थे। कई ड्राइवरों का कहना है कि टिप उनकी दैनिक कमाई का एक बड़ा हिस्सा होती है। लेकिन सरकार का स्पष्ट रुख है कि कंपनियों को ड्राइवरों के कमीशन और फेयर स्ट्रक्चर को बेहतर बनाना चाहिए, न कि इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर डालना चाहिए।

इसका आपकी जेब पर क्या असर होगा?

आर्थिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से यात्रियों को राइड बुकिंग के वक्त होने वाली घबराहट कम होगी। अक्सर देखा जाता था कि 'एडवांस टिप' के विकल्प के कारण यात्री भ्रमित हो जाते थे कि क्या टिप देना अनिवार्य है? अब इस स्पष्टता से यात्रियों को यह आजादी मिलेगी कि वे केवल दी गई सर्विस के आधार पर भुगतान करें।

भविष्य में और क्या उम्मीद करें?

सड़क परिवहन मंत्रालय ने इन प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी है कि यदि वे नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार अब कैब एग्रीगेटर्स के लिए एक नए गाइडलाइन फ्रेमवर्क पर काम कर रही है, जिसमें कैंसिलेशन चार्ज और पीक ऑवर प्राइसिंग को लेकर भी नियम सख्त किए जा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या अब ऐप पर टिप देना पूरी तरह बंद हो गया है?

नहीं, टिप देना बंद नहीं हुआ है। आप अभी भी राइड पूरी होने के बाद अपनी इच्छा से ड्राइवर को टिप दे सकते हैं। केवल राइड बुकिंग के समय 'एडवांस टिप' देने के लुभावने फीचर पर रोक लगाई गई है।

2. क्या यह नियम सभी कैब ऐप्स पर लागू है?

जी हां, यह निर्देश ओला, उबर, रैपिडो और अन्य सभी प्रमुख राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स पर समान रूप से लागू होता है।

3. अगर ऐप अभी भी एडवांस टिप मांग रहा है, तो क्या करें?

यदि आपको किसी ऐप पर अभी भी यह विकल्प दिख रहा है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, क्योंकि मंत्रालय ने इसे हटाने के लिए तत्काल निर्देश जारी किए हैं।

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रिपोर्टर: Kavya Tripathi

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