राजधानी दिल्ली की सड़कों पर आज सियासी पारा अपने चरम पर है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे तीव्र विवाद के बीच, विपक्षी दलों ने आज (6 अक्टूबर 2026) एक बड़े प्रदर्शन और मार्च का ऐलान किया है। इस प्रस्तावित विरोध मार्च को देखते हुए नई दिल्ली के संवेदनशील इलाकों को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। संसद मार्ग, जंतर-मंतर और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय के आसपास सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।
सुबह से ही सड़कों पर भारी पुलिस बल तैनात
मंगलवार की सुनहरी सुबह के साथ ही दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ गई। सुबह से ही संसद मार्ग और जंतर-मंतर क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती देखी गई। निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शनकारी तय सीमा से आगे न बढ़ सकें और कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना या भीड़ के हिंसक होने की स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के ये कड़े प्रबंध इसलिए किए गए हैं ताकि आम नागरिकों को कम से कम असुविधा हो और यातायात भी सुचारू रूप से चलता रहे।
क्यों हो रहा है यह विरोध प्रदर्शन?
यह पूरा विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उपजा है। बीते कुछ दिनों से विपक्षी दल लगातार CEC ज्ञानेश कुमार की नीतियों और फैसलों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हाल ही में यह मामला तब और गरमा गया जब निर्वाचन आयोग के भीतर से ही कुछ आंतरिक असहमतियों की खबरें सामने आईं। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर फैसले लिए जा रहे हैं।
इ इन्हीं तमाम मुद्दों को लेकर पिछले दिनों 19 विपक्षी पार्टियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें यह तय किया गया था कि चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकाला जाएगा। विपक्षी सांसदों और नेताओं की योजना आज चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी चिंताओं से अवगत कराने की है।
राष्ट्रपति से भी मिलेंगे विपक्षी नेता
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, निर्वाचन आयोग तक मार्च निकालने के बाद विपक्षी प्रतिनिधिमंडल का देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने का भी कार्यक्रम तय है। विपक्षी दल राष्ट्रपति के समक्ष SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े तमाम गंभीर मुद्दों को उठाएंगे और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में भी गूंजा मामला
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहां सड़कों पर सियासी घमासान मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ अदालतों में भी इस विवाद से जुड़ी सुगबुगाहट तेज है। हाल ही में CEC ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग को लेकर दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने महत्वपूर्ण रुख अपनाया था। हालांकि, कानूनी मोर्चों पर फिलहाल कोई राहत या बड़ा उलटफेर देखने को नहीं मिला है, लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष आक्रामक रुख अपनाने से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
राजनीतिक सरगर्मी और आगे की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि देश के कई हिस्सों में चुनाव की आहट और प्रशासनिक फेरबदल को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचतान जारी है। आज के इस मार्च पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं कि आखिर दिल्ली पुलिस और विपक्ष के बीच यह शक्ति प्रदर्शन किस मोड़ पर जाकर थमता है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्थिति में शांति व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी। अब देखना यह होगा कि विपक्षी दलों का यह मार्च अपने तयशुदा लक्ष्यों को किस प्रकार साध पाता है और सरकार या चुनाव आयोग की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।