काठमांडू की वादियों में आज आस्था और भक्ति का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। हरितालिका तीज के पावन पर्व पर नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में सुबह से ही महिला व्रती श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन के इस पवित्र पर्व पर शिव भक्तों की दीवानगी देखते ही बनती है। मौसम की बेरुखी और सुबह की बारिश भी महिलाओं के अटूट विश्वास और उत्साह को डिगा नहीं पाई है। हर तरफ शिव भजनों की गूंज और सुहागिनों का लाल-हरे वस्त्रों में कतारबद्ध होना इस पर्व की भव्यता को चार चांद लगा रहा है।
सुबह 3 बजे से खोले गए मंदिर के चारों द्वार
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और उन्हें सुगमता से दर्शन लाभ दिलाने के लिए पशुपति क्षेत्र विकास कोष ने बेहद चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की हैं। मंदिर प्रशासन ने परंपरा और नियमों के अनुरूप आज तड़के ठीक सुबह 3 बजे ही पशुपतिनाथ मंदिर के चारों द्वारों को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया। जैसे ही कपाट खुले, हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। पिछले कई घंटों से लाइनों में खड़ी महिलाओं के चेहरों पर भगवान के दर्शन की एक अलग ही चमक और संतुष्टि साफ झलक रही थी।
विकास कोष के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि इस साल आने वाली भीड़ का अनुमान पहले ही लगा लिया गया था, जिसके चलते सुरक्षा और प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।
भीड़ नियंत्रण के लिए बनाए गए चार विशेष दर्शन मार्ग
हजारों की संख्या में पहुंच रही महिलाओं को बिना किसी परेशानी के सुगम दर्शन कराने के लिए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में चार अलग-अलग विशेष मार्ग (रूट) बनाए गए हैं। इन मार्गों की रूपरेखा कुछ इस प्रकार तैयार की गई है कि लोग आसानी से मंदिर के भीतर प्रवेश करें और दर्शन कर सुरक्षित बाहर निकल सकें:
- पहला मार्ग (मित्रपार्क रूट): इस मार्ग के तहत मित्रपार्क से उमाकुंड, दक्षिणामूर्ति और कैलाश बद्रीनरसिंह भवन होते हुए श्रद्धालुओं को वासुकीनाथ के उत्तर दिशा वाले द्वार से मंदिर के उत्तर दिशा के रैंप तक पहुंचाया जा रहा है। यहां दर्शन के उपरांत उन्हें पश्चिमी द्वार से बाहर निकाला जा रहा है।
- दूसरा मार्ग (जयबागेश्वरी रूट): जयबागेश्वरी से आने वाले श्रद्धालुओं को दथुटोल, पाचा गणेश, अन्नपूर्णा भंडार और महास्नानघर के सामने बने आकाशे पुल से होते हुए भुवनेश्वरी और नासलचोक की तरफ ले जाया जा रहा है। शंकराचार्य मठ के सामने बने आकाशे पुल और पुलिस पहरा गण के छोटे द्वार से होते हुए इन्हें लकड़ी के रैंप से दर्शन कराए जा रहे हैं।
- तीसरा मार्ग (तिलगंगा और एयरपोर्ट रूट): सिनामंगल और एयरपोर्ट की ओर से आने वाले भक्तों के लिए तिलगंगा पर्यटन काउंटर के पास स्थित द्वार, राम मंदिर और बागमती नदी के किनारे से आर्यघाट पुल होते हुए ब्रह्मनाल तक का रास्ता तय किया गया है। पूर्वी द्वार पर बने रैंप से वे भगवान के पूर्वी स्वरूप के दर्शन कर पा रहे हैं।
- चौथा मार्ग (पिंगलास्थान रूट): पिंगलास्थान स्थित द्वार से प्रवेश कर श्रद्धालु चार शिवालय और पंचदेवल वृद्धाश्रम के दक्षिण की ओर बने बड़े द्वार के सामने अस्थायी आकाशे पुल से गुजर रहे हैं। चौँसट्ठी कोटीलिंगेश्वर के दर्शन के बाद उन्हें दक्षिणी स्वरूप के दर्शन कराए जा रहे हैं।
महज आधे घंटे में हो रहे सुगम दर्शन
प्रशासन की बेहतरीन बैरिकेडिंग और रूट मैनेजमेंट का ही नतीजा है कि भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं को घंटों लाइनों में खड़े नहीं रहना पड़ रहा है। पशुपति क्षेत्र विकास कोष के सदस्य सचिव तीर्थ श्रेष्ठ ने जानकारी दी है कि कतार में लगने के बाद महज आधे घंटे के भीतर ही व्रती महिलाएं भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करके आसानी से वापस लौट पा रही हैं। मंदिर प्रबंधन की इस चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था की हर तरफ सराहना हो रही है, जिससे बुजुर्ग महिलाओं और दूर-दराज से आईं व्रतियों को बहुत राहत मिली है।
बारिश भी नहीं डिगा पाई महिलाओं का हौसला
आज सुबह से ही काठमांडू के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन यह मौसम का मिजाज भी शिव भक्तों के कदम नहीं रोक सका। बारिश के बीच भी रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और हाथों में पूजा की थाल लिए महिलाएं लंबी-लंबी कतारों में अनुशासन के साथ खड़ी नजर आईं। व्रतियों का कहना है कि तीज का यह व्रत उनके सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की मंगलकामना के लिए बेहद खास है, इसलिए बारिश जैसी बाधाएं उनकी आस्था के आगे टिक नहीं सकतीं।
सुरक्षा और चिकित्सा के पुख्ता इंतजाम
पशुपतिनाथ मंदिर परिसर और उसके आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस की भी मुस्तैदी से व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
संध्या बेला तक मंदिर में श्रद्धालुओं के आने का यह सिलसिला यूं ही जारी रहने की उम्मीद है। प्रशासन ने सभी आगंतुकों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है ताकि इस पवित्र पर्व का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।