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ईरान-ओमान का बड़ा समुद्री समझौता, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अमेरिका की बढ़ी टेंशन

ईरान-ओमान का बड़ा समुद्री समझौता, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अमेरिका की बढ़ी टेंशन

वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों के केंद्र में रहने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर एक बेहद अहम और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान और ओमान ने इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही को लेकर एक नए समझौते की रूपरेखा तैयार कर ली है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब फरवरी के अंत में हुए हमलों के बाद से इस पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार चरम पर है। इस नए समझौते के तहत जहाजों के लिए नए प्रवेश (Entry) और निकास (Exit) मार्गों का खाका खींचा गया है, जो सीधे तौर पर तेहरान के प्रभाव को और मजबूत करता नजर आ रहा है।

ईरान और ओमान के बीच बनी नई सहमति के मुख्य बिंदु

पारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले इस बेहद संवेदनशील गलियारे को लेकर तेहरान और मस्कट के बीच लंबे समय से चली आ रही तकनीकी और कूटनीतिक बैठकों का आखिरकार परिणाम सामने आ गया है। ईरान के वार्ता दल के बेहद करीब माने जाने वाले एक सूत्र के हवाले से स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी दी गई है कि दोनों देशों ने नौवहन के लिए एक विस्तृत व्यवस्था तैयार की है।

इस पूरी व्यवस्था का सबसे दिलचस्प और रणनीतिक पहलू यह है कि प्रस्तावित मार्ग का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर ईरान के क्षेत्रीय जल (Territorial Waters) के भीतर से होकर गुजरेगा। यानी आने वाले समय में यदि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर काफी हद तक तेहरान के बनाए गए नियमों और नियंत्रण का पहरा होगा।

दक्षिणी समुद्री मार्ग पर मंडराया संकट और अमेरिका से टकराव

इस नए समझौते ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज कर दी है, जिसकी सबसे बड़ी वजह दक्षिणी समुद्री मार्ग (Southern Maritime Route) से जुड़ा हुआ फैसला है। ईरानी सूत्रों के अनुसार, जैसे ही यह नया सिस्टम पूरी तरह से प्रभाव में आएगा, पारंपरिक दक्षिणी रास्ता बंद कर दिया जाएगा।

यही वह बिंदु है जो आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बड़े टकराव की वजह बन सकता है। वाशिंगटन लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुगमता के लिए दक्षिणी मार्ग को खुला रखा जाना चाहिए। ऐसे में, ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद रखने की योजना अमेरिकी रणनीतिकारों के लिए एक बड़ी सिरदर्दी साबित हो सकती है.

तेहरान की सात शर्तें और जलमार्ग का भविष्य

हालांकि, ईरान ने बहुत स्पष्ट शब्दों में यह चेतावनी दी है कि इस समझौते को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के तत्काल और सामान्य रूप से दोबारा खुलने के रूप में बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए। तेहरान का रुख साफ है कि इस जलमार्ग को पूरी तरह खोलने के लिए उसने अमेरिका के सामने कुल सात शर्तें रखी हैं।

जब तक इन सभी शर्तों पर ठोस रूप से अमल नहीं किया जाता, तब तक इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवाजाही के मौजूदा प्रतिबंध कड़ाई से जारी रहेंगे। इसका सीधा सा मतलब यह है कि हॉर्मुज का भविष्य केवल कुछ तकनीकी व्यवस्थाओं पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह इस बात पर भी टिका है कि अमेरिका का अगला कदम क्या होगा।

ओमान में होगी खाड़ी देशों की उच्चस्तरीय बैठक

इस पूरे घटनाक्रम को आगे बढ़ाने के लिए कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हाल ही में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि खाड़ी देशों के तमाम विदेश मंत्री जल्द ही ओमान की राजधानी में एक अहम बैठक में हिस्सा लेंगे।

  • इस बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान और ओमान के बीच हुई हालिया वार्ताओं के निष्कर्षों पर चर्चा करना होगा।
  • जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग तय करने के नए प्रस्तावों का खाका खाड़ी देशों के सामने रखा जाएगा।
  • इस उच्चस्तरीय मंथन में खाड़ी देशों के अलावा ईरान और इराक के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति में नए समीकरण बनने की पूरी उम्मीद है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है गहरा असर

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण जीवन रेखाओं में से एक है, खासकर जब बात कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति की हो। इस मार्ग से दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा ऊर्जा आयात करता है। यदि इस इलाके में तनाव यूं ही बना रहता है या कोई अनिश्चितता पैदा होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

फरवरी के अंत में क्षेत्र में हुए सैन्य संघर्षों के बाद से ही तेहरान ने यहां जहाजों की आवाजाही को बेहद सीमित कर दिया था। अब ईरान और ओमान की ओर से सामने आई यह नई व्यवस्था संकेत देती है कि ईरान इस जलमार्ग के संचालन में अपनी निर्णायक और मजबूत भूमिका को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहता। वह एक नियंत्रित, शर्तों पर आधारित और अपनी शर्तों वाले समुद्री आवाजाही के विकल्प को धरातल पर उतारने की तैयारी कर रहा है।

आने वाले दिनों में ओमान की धरती पर होने वाली खाड़ी देशों की यह बैठक तय करेगी कि वैश्विक नौवहन और मध्य-पूर्व की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठता है। क्या अमेरिका ईरान की इन शर्तों को स्वीकार करेगा या फिर तनाव का यह नया दौर वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नए संकट की ओर धकेलेगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएंगे।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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