कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर सैन्य तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच संपन्न हुए पांच दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास के ठीक बाद, उत्तर कोरिया ने आक्रामक रुख अपनाते हुए बड़े पैमाने पर 'फायरपावर स्ट्राइक ड्रिल' को अंजाम दिया है। इस सैन्य अभ्यास में उत्तर कोरियाई सेना की आर्टिलरी और मिसाइल इकाइयों ने हिस्सा लिया, जिसमें कई अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया गया।
सैनिक शक्ति का प्रदर्शन और आधुनिक हथियारों की नुमाइश
उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, यह सैन्य अभ्यास बीते 12 सितंबर को आयोजित किया गया था। इस ड्रिल में कोरियन पीपुल्स आर्मी की लंबी दूरी की आर्टिलरी और मिसाइल इकाइयों की चुनिंदा सब-यूनिट्स ने अपनी युद्धक क्षमताओं का लोहा मनवाया।
इस अभ्यास के दौरान उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत का खुला प्रदर्शन करते हुए कई आधुनिक हथियार प्रणालियों को मैदान में उतारा। इनमें:
- विभिन्न प्रकार के उन्नत अटैक ड्रोन
- घातक टैक्टिकल क्रूज़ मिसाइलें
- बड़े कैलिबर वाले थर्मल-प्रेशर मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर
- टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलें
प्योंगयांग के मीडिया दावों के मुताबिक, इस लाइव-फायर ड्रिल में शामिल सभी स्ट्राइक हथियार प्रणालियों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया और 100 प्रतिशत सटीकता का रिकॉर्ड बनाया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया की सैन्य इकाइयों के बीच आपसी समन्वय और फायरपावर क्षमता को परखना था।
शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति में हुई निगरानी
दिलचस्प बात यह रही कि इस बड़े सैन्य अभ्यास के दौरान देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन मौके पर मौजूद नहीं थे। इस पूरी ड्रिल की सीधी निगरानी उत्तर कोरिया के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के वाइस चेयरमैन पाक जोंग-चोन ने की।
सेना के आर्टिलरी ब्यूरो के डायरेक्टर यू चांग-सन ने इस अभ्यास पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह के व्यावहारिक और जमीनी अभ्यासों से दुश्मनों के किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब देने की तैयारी पुख्ता होती है और सैनिकों की विशेषज्ञता बढ़ती है।
इस साल का 13वां मिसाइल परीक्षण
दक्षिण कोरियाई सैन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, शनिवार को सामने आया यह मिसाइल लॉन्च इस वर्ष उत्तर कोरिया का 13वां बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, दागी गई मिसाइलें संभवतः ह्वासोंग-11 सीरीज की शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। इसके अलावा, 600 मिलीमीटर के सुपर-लार्ज मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर से भी भारी गोले बरसाए जाने की बात सामने आई है।
गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) ने पहले ही इस बात की पुष्टि की थी कि उत्तर कोरिया ने वोनसान इलाके से ईस्ट सी (जापान सागर) की तरफ कई शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
'फ्रीडम एज' अभ्यास बना तनाव की मुख्य वजह
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान का साझा सैन्य अभ्यास है। तीनों देशों ने दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप के पूर्व और दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपना पांच दिवसीय ‘फ्रीडम एज’ सैन्य अभ्यास सफलताપૂર્વक पूरा किया था।
उत्तर कोरिया ने इस त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास की तीखी आलोचना की है। उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्री किम सोंग-गी ने अमेरिका के नेतृत्व में हो रहे इन अभ्यासों को सीधा उकساवा करार देते हुए कड़े जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी थी। हालांकि, अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने पिछले महीने अपने वार्षिक ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ (UFS) अभ्यास को कुछ कम किया था, लेकिन ‘फ्रीडम एज’ अपने तयशुदा कार्यक्रम के तहत ही आयोजित किया गया।
तनाव के बीच कूटनीति की सुगबुगाहट
एक तरफ जहां कोरियाई प्रायद्वीप में हथियारों की गड़गड़ाहट और सैन्य अभ्यासों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक मोर्चे पर भी सरगर्मी बनी हुई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर उत्तर कोरियाई सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन से मुलाकात करने की अपनी इच्छा जाहिर की है।
सैन्य टकराव की धमकियों और कूटनीतिक संवाद की संभावनाओं के इस दोहरे माहौल के बीच पूरी दुनिया की निगाहें कोरियाई प्रायद्वीप की हर एक गतिविधि पर टिकी हुई हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।