देश के कई राज्यों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 सितंबर 2026 के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। पर्वतीय राज्यों से लेकर तटीय इलाकों तक मौसम की यह मार आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है। खासकर उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते चार धाम यात्रा को फिलहाल रोकना पड़ा है।
उत्तराखंड में कुदरत का कहर: चार धाम यात्रा रुकी
पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में बादलों का डेरा और लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई बड़े इलाकों में भारी बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और बिजली गिरने का अनुमान जताया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पवित्र चार धाम यात्रा को एहतियातन रोकना पड़ा है। रुद्रप्रयाग जिले के चिरबासा गांव के पास भीषण भूस्खलन (Landslide) होने से केदारनाथ जाने वाला मुख्य रास्ता पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। गनीमत यह रही कि समय रहते प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया और राहत एवं बचाव अभियान चलाकर 1200 से अधिक फंसे हुए तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर बाहर निकाल लिया गया।
किन जिलों में है फ्लैश फ्लड का सबसे ज्यादा खतरा?
मौसम विभाग के अनुसार, जल-ग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) और निचले इलाकों में जहां मिट्टी पूरी तरह पानी से संतृप्त (saturated) हो चुकी है, वहां अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का मध्यम से उच्च स्तर का खतरा बना हुआ है।
- उत्तराखंड के जिले: उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, चमोली और रुद्रप्रयाग।
- हिमाचल प्रदेश के जिले: किन्नौर, शिमला और सिरमौर।
उत्तरकाशी जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है। संवेदनशील इलाकों और भूस्खलन की आशंका वाली जगहों पर सुरक्षाबलों और आपदा प्रबंधन टीमों द्वारा चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है।
अंडमान और निकोबार में ऑरेंज अलर्ट, तेज हवाओं का तांडव
दक्षिण भारत और द्वीपीय क्षेत्रों की बात करें तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मौसम बेहद आक्रामक हो गया है। यहाँ के बड़े हिस्से में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
इस दौरान समुद्र में उठने वाले तूफानी मिजाज को देखते हुए 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं, जो झोंकों में 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती हैं, जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी आज से कुछ स्थानों पर भारी बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है।
पूर्वोत्तर से लेकर मध्य भारत तक आंधी-तूफान की चेतावनी
देश के अन्य हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है:
- पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कुछ स्थानों पर वज्रपात (बिजلی गिरने) के साथ 40-50 किमी/घंटा की गति (झोंकों में 60 किमी/घंटा) से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
- मध्य और पश्चिम भारत: पश्चिम मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर आंधी के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। वहीं, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
- दक्षिण भारत: तेलंगाना में आंधी-तूफान और तेज हवाओं का असर दिखेगा, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में जमीनी स्तर पर तेज हवाएं लगातार चलती रहेंगी।
दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा आज का मौसम?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में आज आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा कम यानी 31 डिग्री सेल्सियस से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है।
दिन की शुरुआत में उत्तर-पश्चिम दिशा से करीब 12 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सतही हवाएं चलेंगी, जो दोपहर के समय बढ़कर 16 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती हैं। शाम और रात ढलते ही हवाओं की दिशा बदलकर दक्षिण-पश्चिम हो जाएगी और इनकी गति लगभग 12 किमी/घंटा बनी रहेगी।
मछुआरों और समुद्र में जाने वालों के लिए कड़ी चेतावनी
खराब मौसम और समुद्री तूफानों की स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों और समुद्री नौका चालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्हें निम्नलिखित क्षेत्रों में समुद्र के भीतर जाने से पूरी तरह बचने की सलाह दी गई है:
- अरब सागर: सोमालिया तट के पास और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के इलाके।
- बंगाल की खाड़ी: उत्तरी अंडमान सागर, दक्षिणी म्यांमार तट के ऊपर, तथा उत्तरी म्यांमार तट के साथ-साथ पूर्वी-मध्य और उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के आसपास के क्षेत्र।
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्राओं से बचें, विशेष तौर पर पहाड़ी और नदी के किनारों वाले इलाकों में जाने से पूरी तरह परहेज करें। किसी भी आपात स्थिति के लिए स्थानीय आपदा प्रबंधन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।