खाकी वर्दी की साख को बट्टा लगाने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य के तीन अलग-अलग जिलों—भदोही, गाजीपुर और सोनभद्र में पुलिस महकमे के भीतर बड़ी प्रशासनिक गाज गिरी है। लापरवाही, मनमानी और अवैध वसूली के गंभीर मामलों में कुल मिलाकर दो दरोगा (Sub-Inspectors) और चार सिपाहियों (Constables) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस एक साथ हुई बड़ी कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और यह संदेश साफ है कि जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आइए सिलसिलेवार जानते हैं कि किस जिले में क्या पूरा मामला सामने आया और किन कारणों से यह सख्त कदम उठाया गया।
भदोही: बेटी के साथ अश्लील हरकत की शिकायत लेकर पहुंची महिला को थाने से भगाया
भदोही जिले में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने इंसानियत और पुलिसिया कार्यशैली दोनों को झकझोर कर रख दिया। ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली एक पीड़ित महिला अपनी नाबालिग बेटी के साथ थाने पहुंची थी। महिला का दर्द था कि कुछ मनचले युवक आए दिन उसकी बेटी के साथ अभद्रता और अश्लील हरकतें करते हैं। उसने इसकी शिकायत गांव के संभ्रांत लोगों से भी की थी, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। थक-हारकर वह न्याय की आस में कोतवाली पहुंची।
लेकिन आरोप है कि वहां तैनात वरिष्ठ उप निरीक्षक (SI) श्याम नारायण यादव ने महिला की फरियाद सुनने के बजाय उसे थाने से ही दुत्कार कर भगा दिया। दरोगा ने दोटूक कह दिया कि यहां कोई सुनवाई नहीं होगी। महिला अपनी बेबसी पर आंसू बहाती रही और अंत में उसने हिम्मत जुटाकर एक वीडियो बनाया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
एसपी ने लिया कड़ा संज्ञान
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आते ही भदोही के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव त्यागी ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया। शुरुआती जांच में वरिष्ठ उपनिरीक्षक श्याम नारायण यादव को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। एसपी ने बिना देर किए एसआई को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही मामले की विस्तृत विभागीय जांच अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) शुभम अग्रवाल को सौंप दी गई है। आरोपी मनचले युवकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है।
गाजीपुर: पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर टोल प्लाजा के पास चला रहे थे वसूली का खेल
दूसरी बड़ी कार्रवाई गाजीपुर जिले में देखने को मिली, जहां खाकी का इस्तेमाल अपनी जेब भरने के लिए करने वाले तीन सिपाहियों पर गाज गिरी है। गाजीपुर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सोमवार देर शाम यह बड़ी कार्रवाई की गई। निलंबित किए गए सिपाहियों के नाम अजय सिंह, युवराज सिंह और दीपू कुशवाहा हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये तीनों सिपाही पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर स्थित हैदरगंज टोल प्लाजा के पास तैनात थे। आरोप है कि ये ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी छोड़कर रात के समय टोल प्लाजा के आसपास से गुजरने वाले व्यावसायिक और अन्य वाहनों से धड़ल्ले से अवैध वसूली कर रहे थे।
"पुलिस कर्मियों का इस तरह गाड़ियों से अवैध वसूली करना घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता का स्पष्ट प्रमाण है। इससे महकमे की छवि धूमिल हुई है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" - स्थानीय पुलिस प्रशासन
कासिमाबाद के क्षेत्राधिकारी (CO) अनुभव राजर्षि ने पुष्टि करते हुए बताया कि तीनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन काल के दौरान इन्हें पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया है और बिना अनुमति के मुख्यालय छोड़ने पर सख्त पाबंदी रहेगी। मामले की गहराई से जांच अभी जारी है।
सोनभद्र: दलित युवक से अमानवीयता और बर्बरता पर दरोगा-सिपाही पर गिरी गाज
तीसरी घटना सोनभद्र जिले के बभनी थाना क्षेत्र के करकच्छी गांव की है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। यहां पिछले गुरुवार को बाजार से लौट रहे एक युवक को रास्ते से खींचकर कुछ लोगों ने बंधक बना लिया। उसकी बेरहमी से पिटाई की गई, सिर मुंडवा दिया गया, जूतों की माला पहनाई गई और अर्धनग्न हालत में पूरे गांव में घुमाया गया।
पीड़ित परिवार का आरोप था कि इस भयावह घटना की जानकारी उसी दिन शाम को ही स्थानीय पुलिस को दे दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई सुधि नहीं ली। अगले दिन जब इस अमानवीय घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मामला तूल पकड़ा, तब जाकर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस हरकत में आई। इस मामले में पुलिस अब तक 10 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
लापरवाही साबित होने पर दरोगा और सिपाही सस्पेंड
घटना के तुरंत बाद अमर उजाला समेत प्रमुख मीडिया संस्थानों ने इस लापरवाही को प्रमुखता से उठाया। सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने दुद्धी क्षेत्राधिकारी से इस पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट तलब की। प्राथमिक जांच में यह साबित हो गया कि स्थानीय पुलिस स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गई थी।
इसी रिपोर्ट के आधार पर एसपी अभिषेक वर्मा ने दरोगा अखिलेश पाठक और सिपाही मोहम्मद सलीम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच अब अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) को सौंप दी गई है।
अधिकारियों की दो टूक चेतावनी
पूर्वांचल के इन तीन जिलों में एक साथ हुई इस बड़ी कार्रवाई से साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस महकमा अपनी छवि को लेकर अब बेहद सख्त हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में किसी भी स्तर पर पुलिसकर्मियों की संलिप्तता अवैध गतिविधियों में पाई गई या जनता की शिकायतों के प्रति लापरवाही बरती गई, तो उनके खिलाफ भी ऐसी ही नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- प्रश्नों के घेरे में आए पुलिसकर्मियों पर मुख्य रूप से क्या आरोप हैं?
- इन पुलिसकर्मियों पर थाने पर आई पीड़ित महिला को भगाने, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर गाड़ियों से अवैध वसूली करने और सोनभद्र में अमानवीय घटना के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप हैं।
- भदोही में किस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है?
- भदोही जिले की ज्ञानपुर कोतवाली में तैनात वरिष्ठ उप निरीक्षक (SI) श्याम नारायण यादव को निलंबित किया गया है।
- क्या इस मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां या जांच होगी?
- हाँ, तीनों मामलों में विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। सोनभद्र मामले में पहले ही 10 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और अन्य संलिप्त लोगों की तलाश जारी है।