संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने जा रहा है और अब महज पांच कार्य दिवस बचे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार परिसीमन, महिला आरक्षण और FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) से जुड़े तीन बेहद संवेदनशील विधेयकों को पारित कराने की पुरजोर कोशिश में है। हालांकि, इन बिलों को लेकर सरकार और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है।
सर्वदलीय बैठक की मांग पर अड़े राहुल गांधी
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन पाई है। राहुल गांधी की मांग है कि इन अहम विधेयकों पर सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाई जाए ताकि विपक्षी गठजोड़ (I.N.D.I.A.) के घटक दलों के साथ विस्तार से चर्चा हो सके।
दूसरी तरफ, सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। संसदीय कार्य मंत्री का कहना है कि सरकार अन्य सभी राजनीतिक दलों से पहले ही संवाद कायम कर चुकी है और सिर्फ कांग्रेस से बात होनी बाकी थी। इसलिए नई सर्वदलीय बैठक की आवश्यकता नहीं है।
हंगामे के बिना बिल पास कराने की रणनीति
सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के अनुसार, इन विधेयकों के महत्व और संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार इन्हें हंगामे के बीच बिना किसी सार्थक चर्चा के पास कराने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि केवल कांग्रेस के अड़ियल रवैये के कारण इन महत्वपूर्ण विधेयकों को रोका नहीं जाएगा।
संसदीय सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह ने FCRA से जुड़े मुद्दों को लेकर हाल ही में ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों से भी गहन विचार-विमर्श किया है ताकि उनकी आशंकाओं को दूर किया जा सके।
राज्यसभा से शुरुआत करने की अटकलें
राजनीतिक गलियारों में इस बात की तेज चर्चा है कि परिसीमन विधेयक को पहले राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण बताए जा रहे हैं:
- संख्या बल का समीकरण: उच्च सदन में सरकार के पास आवश्यक बहुमत जुटाना अपेक्षाकृत अधिक आसान माना जा रहा है।
- दो-तिहाई बहुमत का दावा: सूत्रों के अनुसार, सरकार के पास पर्याप्त आंकड़ा मौजूद है, लेकिन वोटिंग के लिए अनुकूल माहौल की जरूरत है।
- विपक्ष पर दबाव: अगर बिल राज्यसभा से पारित हो जाता है, तो लोकसभा में विपक्ष पर नैतिक दबाव बढ़ जाएगा।
शुक्रवार को हो सकता है बड़ा फैसला
क्या मानसून सत्र की अवधि बढ़ाई जाएगी? इस सवाल पर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है। हालांकि, संकेत मिल रहे हैं कि सरकार शुक्रवार को इन विधेयकों को सदन में पेश करने की अपनी अंतिम रणनीति पर मुहर लगा सकती है। आने वाले पांच दिन देश की संसद और राजनीति के लिए बेहद रणनीतिक साबित होने वाले हैं।