झारखंड की राजधानी रांची का एक प्रमुख मार्ग इन दिनों स्थानीय चालकों और राहगीरों के लिए किसी खौफनाक सफर से कम नहीं है। हम बात कर रहे हैं खेलगांव से टाटीसिल्वे तक जाने वाली मुख्य सड़क की, जो अपनी बदहाली और तकनीकी खामियों के चलते आए दिन भीषण सड़क हादसों का केंद्र बनती जा रही है। इस मार्ग पर सफर करना अब जोखिम भरा हो गया है, जहां हर मोड़ पर मौत का साया मंडराता रहता है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित महकमों की उदासीनता के चलते यह रास्ता हादसों का जोन बन चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।
अंधे मोड़ और जर्जर सड़क: हादसों की असल जड़
इस पूरे मार्ग की सबसे बड़ी विडंबना इसके खतरनाक और अचानक आने वाले अंधे मोड़ (Blind Turns) हैं। वाहन चालक जब तक संभल पाते हैं, तब तक सामने से आ रहा वाहन उनकी गाड़ी के बेहद करीब आ चुका होता है। सड़क की बनावट में भारी खामियां हैं और कई जगहों पर तो डामर उکھड़ चुका है, जिससे बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। खेलगांव चौक के आसपास का इलाका तो चालकों के लिए परीक्षा जैसा बन गया है, जहां अनियंत्रित ट्रैफिक और खराब जियोमेट्रिक डिजाइन के कारण लगातार वाहन आपस में भिड़ रहे हैं।
रात के समय इस मार्ग की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क किनारे स्ट्रीट लाइटों का अभाव और रिफ्लेक्टर्स की कमी के कारण दूर से आने वाले वाहनों की लाइट सीधे आंखों पर पड़ती है, जिससे चालकों को मोड़ों का अंदाजा ही नहीं लग पाता।
बाबा चौक बना सबसे बड़ा ब्लैक स्पॉट
खेलगांव-टाटीसिल्वे मार्ग पर स्थित 'बाबा चौक' वाहन चालकों के लिए सबसे खतरनाक जोन के रूप में चिह्नित हो चुका है। यहाँ का अंधा मोड़ किसी बड़े हादसे को लगातार न्योता दे रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस चौक पर न तो कोई प्रॉपर ट्रैफिक सिग्नल है और न ही चेतावनी देने वाले बोर्ड। तेज रफ्तार गाड़ियां जब इस मोड़ पर अचानक मुड़ती हैं, तो नियंत्रण खो बैठती हैं। पूर्व में भी यहाँ कई गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है या वे गंभीर रूप से घायल हुए हैं, इसके बावजूद सुरक्षा के नाम पर यहाँ शून्य प्रगति दिखती है।
दर्दनाक हादसों ने खोली पोल
यह समस्या सिर्फ कागजी बहसों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है। बीते समय यानी 12 सितंबर 2025 को सरला बिरला स्कूल की एक बस की चपेट में आने से एक मासूम स्कूली छात्रा की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस दुर्घटना के बाद शहरभर में सनसनी फैल गई थी और स्कूल बसों की गति व सड़क सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
महज कुछ दिन पहले, 30 सितंबर को खेलगांव के पास ही एक तेज रफ्तार थार वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। हालांकि गनीमत यह रही कि गाड़ी में सवार छह लोग हादसे के तुरंत बाद मौके से फरार हो गए, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर इस बात पर मुहर लगा दी कि इस सड़क पर स्पीड कंट्रोल और इंजीनियरिंग सुधार की कितनी भारी दरकार है।
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का दर्द
इस मार्ग से रोज गुजरने वाले आम नागरिकों और दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागता है और कुछ दिनों की बयानबाजी के बाद सब कुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है।
- कृष्णा वर्मा: 'रोजाना हजारों लोग इस रास्ते से ऑफिस और कॉलेज आते-जाते हैं। अचानक ब्रेक लगाने की मजबूरी के कारण पीछे से आ रहे वाहन आपस में टकरा जाते हैं। सभी ब्लैक स्पॉट पर तत्काल रिफ्लेक्टर और लाइट लगनी चाहिए।'
- प्रदीप महतो: 'दुर्घटना के बाद सिर्फ मुआवजा या नेताओं के दौरे होते हैं, स्थायी समाधान कोई नहीं ढूंढता। तकनीकी सर्वे कराकर सड़क के डिजाइन में बदलाव की जरूरत है।'
- राजेंद्र महतो: 'दोपहिया चालकों के लिए यह सड़क नर्क जैसी है। गड्ढों से बचने के चक्कर में बाइकर्स अक्सर गलत लेन में चले जाते हैं और सामने से आ रहे भारी वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।'
- श्वेता महतो: 'शाम ढलते ही महिलाओं और बच्चों का इस रास्ते से निकलना दूभर हो जाता है। रोशनी न होने के कारण मोड़ और डिवाइडर दिखाई ही नहीं देते।'
क्या होना चाहिए स्थायी समाधान?
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि केवल चेतावनी बोर्ड लगा देने भर से जिंदगियां नहीं बचाई जा सकतीं। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाने अतिआवश्यक हैं:
- संयुक्त सुरक्षा ऑडिट (Joint Safety Audit): ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियों को मिलकर तुरंत इस ार्ग का सेफ्टी ऑडिट करना चाहिए।
- रोड मिरर्स और रिफ्लेक्टर: सभी अंधे मोड़ों पर कॉन्वेक्स रोड मिरर और कैट्स आइज़ (Cat's Eyes) स्थापित किए जाएं ताकि रात में भी रास्ता साफ दिखे।
- प्रकाश व्यवस्था: बाबा चौक और खेलगांव से टाटीसिल्वे के बीच सभी सुनसान और खतरनाक मोड़ों पर हाई-मास्ट लाइट या स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएं।
- डिवाइडर की री-डिजाइनिंग: जिन स्थानों पर लगातार गाड़ियां डिवाइडर से टकरा रही हैं, उनकी ऊंचाई और विजिबिलिटी की जांच कर सुधार किया जाए।
फिलहाल, जनता यही उम्मीद कर रही है कि प्रशासन किसी और अनहोनी का इंतजार किए बिना जागेगा और खेलगांव-टाटीसिल्वे मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू करेगा।