झारखंड की राजधानी रांची में अपराधियों और पुलिस के बीच हुई एक रोमांचक मुठभेड़ ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। बिहार और झारखंड में आतंक का पर्याय बन चुके कुख्यात 'कोढ़ा गैंग' के तीन शातिर अपराधियों को रांची पुलिस ने धर दबोचा है। इस दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश के पैर में गोली भी लगी है, जो पुलिसर्मी की पिस्टल छीनकर भागने की फिराक में था। आइए जानते हैं इस पूरी फिल्मी कार्रवाई की अंदर की कहानी और कैसे पुलिस ने इस खतरनाक गिरोह के जाल को तोड़ा।
बढ़ती चेन छिनतई की वारदातों से सहमा था शहर
पिछले कुछ हफ्तों से रांची और उसके आसपास के इलाकों में राह चलते लोगों, खासकर महिलाओं को निशाना बनाकर सोने की चेन छीनने की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। इन वारदातों ने आम नागरिकों की नींद उड़ा दी थी और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया।
एसएसपी ने शहर के सभी थाना प्रभारियों के साथ एक आपातकालीन उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में साफ निर्देश दिए गए कि किसी بھی कीमत पर इन चेन स्नेचर्स के नेटवर्क को नेस्तनाबूद किया जाए। अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (Special Task Force) का गठन किया गया। इस टीम को गुप्त सूचनाओं और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों पर दिन-रात नजर रखने का जिम्मा सौंपा गया था।
शनिवार की घटनाओं ने किया पुलिस को अलर्ट
पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद अपराधियों ने शनिवार को एक बार फिर दुस्साहस दिखाया। बरियातु थाना और मेसरा ओपी क्षेत्र में दिनदहाड़े चेन छिनतई की दो बड़ी घटनाएं सामने आईं। इन वारदातों के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। टास्क फोर्स ने तुरंत एक्शन लेते हुए अपनी निगरानी का दायरा बढ़ाया और सुराग जुटाने शुरू किए।
रविवार का दिन रांची पुलिस के लिए बड़ी सफलता लेकर आया। पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर जाल बिछाया और बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले कोढ़ा गैंग के तीन सक्रिय सदस्यों को दबोच लिया। शुरुआती पूछताछ में ही इन बदमाशों ने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले थे।
कड़ाई से पूछताछ में उगले कई राज
पकड़े गए आरोपियों से जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अकेले रांची जिले में ही लगभग एक दर्जन से अधिक चेन छिनतई और लूट की वारदातों को अंजाम दिया है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि ये अपराधी आम जनता के दिलों में खौफ पैदा करने के लिए अवैध हथियारों का खुलकर इस्तेमाल करते थे।
बदमाशों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की पैनी पूछताछ के आगे वे टिक नहीं सके। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने हथियार रिंग Road के पास चुटू गांव के नजदीक झाड़ियों में छिपाकर रखे हैं। इसी5 जानकारी के आधार पर पुलिस टीम उन्हें हथियार बरामद कराने के लिए उस सुनसान इलाके की ओर लेकर रवाना हुई।
चुटू गांव के पास हुआ फिल्मी ड्रामा और मुठभेड़
रविवार को जब पुलिस टीम आरोपियों को लेकर चुटू गांव के पास उस जगह पर पहुंची जहां हथियार छिपाए गए थे, तभी एक शातिर अपराधी ने शातिराना चाल चली। इस बदमाश की पहचान आकाश यादव उर्फ रंगीला के रूप में हुई है। आकाश ने अचानक मौका पाकर बरियातु थाना के हवलदार रवींद्र कुमार पर जोरदार हमला बोल दिया।
इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, आकाश ने हवलदार की सर्विस पिस्टल झपट ली और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू करते हुए मौके से भागने की कोशिश की। अचानक हुए इस जानलेवा हमले से कुछ पलों के लिए अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, पुलिस टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत मोर्चा संभाला।
अपनी और अपनी टीम की जान बचाने के लिए बरियातु थाना प्रभारी ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गोली चलाई। पुलिस की गोली सीधे आकाश यादव के पैर में जा लगी, जिससे वह वहीं जमीन पर गिर पड़ा। पुलिस ने बिना वक्त गंवाए उसके दोनों साथियों को भी चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया।
रिम्स में इलाज और हथियारों की बरामदगी
मुठभेड़ में घायल होने के बाद आकाश यादव को तुरंत पुलिस सुरक्षा में नजदीकी अस्पताल रिम्स (RIMS) में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। वहीं, उसके दोनों सहयोगियों को हिरासत में लेकर थाने लाया गया है।
पुलिस ने अपराधियों की निशानदेही पर चुटू गांव के पास झाड़ियों से वे तमाम हथियार और कारतूस भी बरामद कर लिए हैं, जिन्हें उन्होंने छिपाकर रखा था। इस बरामदगी से पुलिस का यह दावा और मजबूत हो गया है कि यह गिरोह किसी बड़ी आपराधिक साजिश को अंजाम देने की फिराक में था।
बिहार और झारखंड में फैला है 40 से अधिक मामलों का जाल
गिरफ्तार किए गए तीनों अपराधियों की पहचान आकाश यादव उर्फ रंगीला, अमन कुमार यादव और कार्तिक यादव उर्फ दिनेश के रूप में हुई है। ये तीनों ही बिहार के कटिहार जिले के कुख्यात कोढ़ा गैंग के खासमखास गुर्गे बताए जा रहे हैं।
प्राथमिक जांच और आपराधिक इतिहास खंगालने पर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डरावने हैं। इन तीनों के खिलाफ बिहार और झारखंड के अलग-अलग थानों में आर्म्स एक्ट, लूट, डकैती और चेन छिनतई के 40 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। इनका आतंक सिर्फ रांची तक सीमित नहीं था, बल्कि इन्होंने हजारीबाग, रामगढ़ और धनबाद जैसे जिलों में भी 12 से ज्यादा चेन स्नेचिंग की वारदातों को अंजाम दिया था।
अंतरराज्यीय नेटवर्क की हो रही है थाह
एसएसपी राकेश रंजन ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इन अपराधियों की गिरफ्तारी रांची पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है। हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं होता। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां जुड़े हैं।
इनके अंतरराज्यीय नेटवर्क, शरण देने वालों और इनसे जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान के लिए विशेष टीमें बना दी गई हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छीनी गई सोने की चेन और अन्य कीमती सामानों को ये अपराधी कहां और किसे बेचते थे। झारखंड और बिहार की पुलिस आपस में समन्वय बनाकर इस पूरे आपराधिक साम्राज्य को जड़ से उखाड़ फेंकने की तैयारी में जुटी है।
आम जनता के लिए यह राहत की खबर जरूर है कि उनके गले का हार छीनने वाला यह खूंखार गिरोह अब सलाखों के पीछे पहुंच रहा है, लेकिन यह घटना यह भी याद दिलाती है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं, जिनसे निपटने के लिए पुलिस को हमेशा सतर्क रहना होगा।