बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को एक विशेष राजकीय समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें महान विचारक, दार्शनिक और स्वतंत्रता सेनानी स्व० पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजेन्द्र नगर स्थित रोड नंबर-3 में उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
राजकीय समारोह में उमड़े दिग्गज नेता
स्व० पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में बिहार सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ० दिलीप कुमार जायसवाल, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, विधान पार्षद डॉ० राजेंद्र प्रसाद गुप्ता और विधायक संजय गुप्ता ने भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।
तमाम नेताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने के उनके अंत्योदय के विचार को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया। नेताओं ने कहा कि उनके विचार देश और समाज को हमेशा एक नई दिशा देते रहेंगे।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंजा वातावरण
इस राजकीय समारोह को और अधिक भव्य बनाने के लिए सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के कलाकारों द्वारा विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आरती पूजन और भजन-कीर्तन के साथ हुई। इसके पश्चात कलाकारों ने:
- राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान का गायन किया।
- बिहार गीत प्रस्तुत कर राज्य की संस्कृति को दर्शाया।
- एक से बढ़कर एक देशभक्ति गीतों से पूरे माहौल को देशप्रेम के रंग में रंग दिया।
वहां मौजूद लोगों ने कलाकारों की इन प्रस्तुतियों की भरपूर सराहना की। संगीत और भजनों के माध्यम से पूरा परिसर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत नजर आया।
अंत्योदय के प्रणेता का जीवन दर्शन
स्व० पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और उन्होंने देश को 'एकात्म मानववाद' (Integral Humanism) जैसा अनमोल राजनीतिक व दार्शनिक सिद्धांत दिया। उनका पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा और समाज के शोषित, पीड़ित तथा वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित था। 'अंत्योदय' यानी समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति का विकास, उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य था।
आज के दौर में जब देश तेजी से डिजिटल और आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार और नीतियां और अधिक प्रासंगिक हो जाती हैं। बिहार में आयोजित इस राजकीय समारोह के माध्यम से युवा पीढ़ी को उनके देश के प्रति समर्पण और त्याग से सीख लेने का संदेश दिया गया।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था रही चाक-चौबंद
राजेंद्र नगर में आयोजित इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा। मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के आगमन को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने कार्यक्रम के सुचारू संचालन में अहम भूमिका निभाई, जिससे बिना किसी असुविधा के श्रद्धांजलि सभा संपन्न हुई।
कार्यक्रम के अंत में सभी गणमान्य अतिथियों ने राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने न केवल पटना वासियों बल्कि पूरे बिहार को एक बार फिर से अपनी वैचारिक जड़ों और राष्ट्रवाद की याद दिला दी।