Breaking
► 12 लग्नों में कौन सा लग्न है सबसे शक्तिशाली? जानिए ज्योतिष का सबसे बड़ा रहस्य ► मुंबई में जहरीली हवा पर बीएमसी का कड़ा प्रहार, बिल्डरों की उड़ी नींद ► नागपुर ने मारी बाजी! देश के टॉप-10 स्वच्छ शहरों में बनाई जगह ► केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को जान से मारने की धमकी, मंत्रालय पहुंची चिट्ठी से हड़कंप ► भूपेन हजारिका: शोहरत की बुलंदियों पर अकेले छूटे सुरों के सम्राट ► आशा भोसले जयंती: सुरों की मलिका की यादें और 8 सितंबर का इतिहास ► मिशन 2026: काशी क्षेत्र में बीजेपी का मेगा प्लान, बूथ स्तर तक पहुंचेगा सियासी अभियान ► भिवंडी में पीने के पानी में मिल रहा सीवेज का गंदा पानी, NGT ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिए जांच के आदेश ► पेटागोनिया के ठंडे रेगिस्तान में दुनिया का अगला टेक हब, क्यों बड़ी कंपनियां बना रही हैं डेटा सेंटर? ► नेपाल बाढ़: टनल में 9 दिन तक मौत से लड़े दो शख्स, रोंगटे खड़े कर देगी सर्वाइवल की कहानी ► 12 लग्नों में कौन सा लग्न है सबसे शक्तिशाली? जानिए ज्योतिष का सबसे बड़ा रहस्य ► मुंबई में जहरीली हवा पर बीएमसी का कड़ा प्रहार, बिल्डरों की उड़ी नींद ► नागपुर ने मारी बाजी! देश के टॉप-10 स्वच्छ शहरों में बनाई जगह ► केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को जान से मारने की धमकी, मंत्रालय पहुंची चिट्ठी से हड़कंप ► भूपेन हजारिका: शोहरत की बुलंदियों पर अकेले छूटे सुरों के सम्राट ► आशा भोसले जयंती: सुरों की मलिका की यादें और 8 सितंबर का इतिहास ► मिशन 2026: काशी क्षेत्र में बीजेपी का मेगा प्लान, बूथ स्तर तक पहुंचेगा सियासी अभियान ► भिवंडी में पीने के पानी में मिल रहा सीवेज का गंदा पानी, NGT ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिए जांच के आदेश ► पेटागोनिया के ठंडे रेगिस्तान में दुनिया का अगला टेक हब, क्यों बड़ी कंपनियां बना रही हैं डेटा सेंटर? ► नेपाल बाढ़: टनल में 9 दिन तक मौत से लड़े दो शख्स, रोंगटे खड़े कर देगी सर्वाइवल की कहानी

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत पर करें शिव तांडव स्तोत्र का पाठ, मिलेगा महालाभ

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत पर करें शिव तांडव स्तोत्र का पाठ, मिलेगा महालाभ

सनातन संस्कृति में प्रदोष व्रत का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व माना गया है। देवों के देव महादेव को समर्पित यह पावन व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। पंचांग के गणितीय आंकलन के अनुसार, वर्ष 2026 के सितंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत आज मंगलवार, 08 सितंबर के दिन बेहद ही मंगलकारी संयोग के साथ आया है। इस दिन विधि-विधान से शिव आराधना करने और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से जीवन के तमाम संकटों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

त्रयोदशी तिथि और शुभ मुहूर्त का समय

धार्मिक पंचांग के अनुसार, सितंबर महीने के पहले प्रदोष व्रत की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत आज 08 सितंबर 2026 को सुबह 11:12 बजे हो चुकी है, जिसका समापन अगले दिन यानी 09 सितंबर 2026 को सुबह 09:00 बजे होगा। चूंकि उदयातिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए यह प्रदोष व्रत आज 08 सितंबर मंगलवार को ही रखा जा रहा है। मंगलवार का दिन होने के कारण इस प्रदोष व्रत का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि यह दिन संकट मोचन हनुमान जी के साथ-साथ भगवान शिव को भी अत्यंत प्रिय है।

शिव तांडव स्तोत्र का पाठ क्यों है खास?

शिवपुराण और अन्य पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करते समय यदि शिव तांडव स्तोत्र का पाठ किया जाए, तो महादेव अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यह स्तोत्र केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि ऊर्जा और सकारात्मकता का असीम स्त्रोत है। मान्यता है कि इसकी रचना लंकापति रावण ने की थी। रावण भगवान शिव का परम भक्त था और उसने इसी स्तोत्र के माध्यम से देवाधिदेव महादेव को प्रसन्न कर अतुलनीय धन-संपत्ति, अष्टसिद्धियां और स्वर्ण नगरी लंका प्राप्त की थी।

आज के समय में जब मानसिक अशांति, आर्थिक दबाव और करियर की चिंताएं आम हो चुकी हैं, तब इस प्रकार के पौराणिक स्तोत्रों का पाठ मानसिक शांति और आंतरिक शक्ति प्रदान करने का काम करता है। प्रदोष काल यानी संध्या के समय जब संपूर्ण वातावरण शांत होता है, तब इस स्तोत्र का उच्चारण घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक स्पंदनों को आकर्षित करता है।

शिव तांडव स्तोत्र (सम्पूर्ण पाठ)

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥
जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी विलोोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥
धराधरेन्द्रनंदिनीविलासबन्धुबन्धुर स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे ।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि क्वचिदिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥
जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥
सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटक श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ॥
ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः ॥
करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥
नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत् कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः ।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः ॥
प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ॥
अगर्व सर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम् ।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥
जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् ।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ॥
दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर् गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रव्रितिक: कदा सदाशिवं भजाम्यहम ॥
कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन् विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् ।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥
निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका- निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं परिश्रय परं पदं तदङ्गजत्विषां चयः ॥
प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् ॥
इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ॥
पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शम्भुः ॥
''इति श्रीरावण कृतम् - शिव ताण्डव स्तोत्र संपूर्णम''

शिव तांडव पाठ के चमत्कारी लाभ

शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में जो भी साधक सच्चे मन से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • आर्थिक समृद्धि: कर्ज के बोझ से दबे लोगों और व्यापार में घाटा झेल रहे जातकों के लिए यह स्तोत्र अचूक रामबाण माना गया है। इससे स्थाई लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  • मानसिक बल और साहस: रावण रचित यह स्तोत्र साधक के भीतर छिपे डर, निराशा और हीनभावना को समाप्त कर अदम्य साहस और आत्मविश्वास भरता है।
  • शारीरिक कष्टों से मुक्ति: स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं और दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को इस स्तोत्र के नित्य पाठ से चमत्कारी राहत महसूस होती है।
  • कुंडली दोष निवारण: शनि, राहु या केतु के दुष्प्रभावों और कालसर्प दोष जैसी जटिल स्थितियों में भी शिव तांडव का पाठ बेहद कल्याणकारी सिद्ध होता है।

पूजा की सरल विधि

आज प्रदोष व्रत के अवसर पर सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने घर के मंदिर या किसी नजदीकी शिवालय में जाकर भगवान शिव का गंगा जल, दूध, और बेलपत्र से अभिषेक करें। शाम के समय यानी प्रदोष काल में पुनः स्नान या हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाएं। दीपक प्रज्वलित करें, माता पार्वती और नंदी जी का स्मरण करें और पूरी श्रद्धा के साथ इस दिव्य शिव तांडव स्तोत्र का सस्वर पाठ करें। महादेव आपकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करेंगे।

About the Author

अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer (देश खबरें)

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

Read More