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सत्य निकेतन हादसा: पीजी की सूची सार्वजनिक करने की मांग पर गरमाई सियासत

सत्य निकेतन हादसा: पीजी की सूची सार्वजनिक करने की मांग पर गरमाई सियासत

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे के बाद सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ चुका है। सोमवार, 07 सितंबर 2026 को आम आदमी पार्टी (आआपा) के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और निगम पार्षदों ने स्थानीय भाजपा विधायक अनिल शर्मा के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र सत्य निकेतन क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे पेइंग गेस्ट (PG) आवासों की कार्यप्रणाली और उनकी सुरक्षा को लेकर था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कुछ तीखे सवाल खड़े किए हैं और इलाके के सभी पीजी की आधिकारिक सूची तुरंत सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।

सौरभ भारद्वाज के गंभीर आरोप: 'पीजी माफिया' का कनेक्शन

प्रदर्शन के दौरान आआपा के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सत्य निकेतन क्षेत्र में अवैध रूप से बड़ी संख्या में पीजी का संचालन हो रहा है। इसके पीछे बड़े राजनीतिक नेताओं की संपत्तियां और भारी निवेश होने की सुगबुगाहट है। भारद्वाज ने दिल्ली सरकार से खुली मांग की है कि इलाके की हर एक संपत्ति और पीजी के असली मालिकों के नाम सार्वजनिक किए जाएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

उन्होंने कहा,'जब तक सूचियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक यह साफ नहीं हो पाएगा कि इस अवैध पीजी माफिया को कौन संरक्षण दे रहा है और नियमों की धज्जियां उड़ाने के बावजूद इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।' भारद्वाज के अनुसार, इन महंगे पीजी में छात्रों से मनमाना किराया वसूला जाता है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर शून्य इंतजाम हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रभावशाली लोगों की संपत्तियां इसमें शामिल होंगी, तो कोई आम जूनियर इंजीनियर (JE) या पुलिसकर्मी उन पर कार्रवाई करने की हिम्मत कैसे जुटा पाएगा।

छात्रों के लिए हॉस्टल और किराए के भुगतान की मांग

संकट की इस घड़ी में छात्रों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर पार्टी ने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। सौरभ भारद्वाज और अन्य नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य शिक्षण संस्थानों के आसपास के छात्रों के लिए तुरंत पक्के हॉस्टल बनाए जाएं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक नए हॉस्टलों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए छात्रों के पीजी का किराया खुद वहन करना चाहिए। ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र मजबूर होकर अपनी जान जोखिम में डालकर ऐसी असुरक्षित और जर्जर इमारतों में रहने को विवश न हों।

मंत्रियों की अनुपस्थिति और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक गलियारों में दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद के गोवा में होने को लेकर भी बहस छिड़ गई है। आआपा नेताओं ने सवाल उठाया कि जब राजधानी में इतना बड़ा हादसा हो चुका है, तब जिम्मेदार मंत्री के इस तरह शहर से बाहर होने का क्या औचित्य है? सरकार को इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने पिछली घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि साकेत हादसे के बाद प्रशासन ने शहर की सभी जर्जर इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का वादा किया था। झा ने सरकार से कड़े शब्दों में पूछा कि:

  • पिछले छह महीनों में कुल कितनी इमारतों का ऑडिट किया गया?
  • कितनी खतरनाक इमारतों को सील किया गया और कितनों को जमींदोज किया गया?
  • केवल छोटे अधिकारियों को निलंबित कर देने से असली गुनाहगारों की जवाबदेही तय नहीं होती। भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

इंजीनियरों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में

तिलक नगर से विधायक जरनैल सिंह ने इस हादसे को बेहद दुखद और प्रशासनिक विफलता का नतीजा बताया। उन्होंने एमसीडी के बिल्डिंग डिपार्टमेंट के अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि संबंधित क्षेत्र के जेई (JE), एई (AE) और एक्सईएन (XEN) की सीधी जवाबदेही तय होनी चाहिए। बिना उनकी मिलीभगत के इतनी बड़ी लापरवाही संभव ही नहीं है।

कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने तकनीकी पहलुओं पर रोशनी डालते हुए आरोप लगाया कि सत्य निकेतन में एक पुरानी और बंद पड़ी जर्जर इमारत को अचानक दोबारा चालू करवाया गया और वहां नियमों के विरुद्ध जाकर बेसमेंट या जमीन की गहरी खुदाई का काम शुरू किया गया, जो इस हादसे का तात्कालिक कारण बना।

एमसीडी और दिल्ली सरकार पर ताबड़तोड़ हमले

नगर निगम (MCD) में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने दो टूक शब्दों में कहा कि सत्य निकेतन की यह इमारत महज़ एक ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं गिरी है, बल्कि इसके मलबे के नीचे दिल्ली सरकार और भाजपा शासित एमसीडी की कार्यप्रणाली दबी हुई है। उन्होंने मांग की कि:

  • सत्य निकेतन और दिल्ली के अन्य संवेदनशील इलाकों के पीजी का सेफ्टी ऑडिट हो।
  • मानक कानूनों का उल्लंघन करने वाले भवन स्वामियों और संचालकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।
  • जब तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते, अवैध हॉस्टल और पीजी सील किए जाएं।

आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द से जल्द सभी पीजी की सूची सार्वजनिक नहीं की और छात्रों की सुरक्षा के पुख्ता कदम नहीं उठाए, तो इस आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

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अनुराधा दुबे

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Content Writer (देश खबरें)

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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