भारतीय सिनेमा ने अपने एक ऐसे रत्न को खो दिया है, जिसने अपनी कल्पना और प्रयोगधर्मिता से सात दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। दिग्गज फिल्ममेकर सिंगीतू Srinivasa Rao का हाल ही में निधन हो गया है। वह 95 वर्ष के थे। उनके इस महाप्रयाण से न केवल दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग, बल्कि संपूर्ण भारतीय सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। सिनेमा के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर कोई इस लीजेंड्री निर्देशक को अपने-अपने तरीके से याद कर रहा है।
सिनेमा जगत में शोक की लहर: दिग्गजों का उमड़ा तांता
सिंगीतू Srinivasa Rao के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री के तमाम बड़े सितारों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया है। उनके साथ कई यादगार फिल्मों में काम कर चुके लीजेंड्री अभिनेता कमल हासन ने बेहद भावुक शब्दों में अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। इसके अलावा सुपरस्टार चिरंजीवी, महेश बाबू, जूनियर एनटीआर और कई अन्य शीर्ष कलाकारों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उनके योगदान को याद किया और उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है।
कमल हासन ने अपने शोक संदेश में लिखा कि सिंगीतू जी केवल एक निर्देशक नहीं थे, बल्कि एक ऐसे इंस्टीट्यूशन थे जिन्होंने सिनेमा की भाषा को नए आयाम दिए। उन्होंने कहा कि उनके साथ काम करना हर अभिनेता का सपना होता था और उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने अपने एक सच्चे मार्गदर्शक को खो दिया है। चिरंजीवी ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शिता ने कई पीढ़ियों के कलाकारों और निर्देशकों को प्रेरित किया है।
एक ऐसा निर्देशक जो लीक से हटकर सोचने के लिए जाना जाता था
सिंगीतू Srinivasa Rao का नाम आते ही जेहन में ऐसे प्रयोग आते हैं, जो उस दौर में किसी ने सोचे भी नहीं थे। उनका जन्म 1931 में हुआ था और उन्होंने अपने लंबे करियर में कन्नड़, तेलुगु, तमिल और हिंदी समेत कई भाषाओं में फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे किसी एक जॉनर (Genre) तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने पौराणिक कथाओं से लेकर साइंस-फिक्शन, कॉमेडी और गंभीर सामाजिक मुद्दों पर आधारित बेहतरीन सिनेमा का निर्माण किया।
उनकी रचनात्मकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 1990 के दशक में 'पुष्पक विमान' जैसी मूक (Silent) फिल्म बनाई, जो बॉक्स ऑफिस पर कल्ट क्लासिक साबित हुई। आज के दौर में जब प्रायोगिक सिनेमा की बात होती है, तो सिंगीतू जी की फिल्में सबसे पहले मिसाल के तौर पर पेश की जाती हैं। बिना किसी संवाद के दर्शकों को हंसाना, रुलाना और बांधे रखना केवल उन्हीं का हुनर था।
मास्टरपीस फिल्में जो हमेशा अमर रहेंगी
सिंगीतू Srinivasa Rao के करियर में कई ऐसे मील के पत्थर हैं, जिन्हें आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है। उनकी कुछ प्रमुख और यादगार फिल्मों की सूची नीचे दी गई है:
- पुष्पक विमान (Pushpaka Vimana): यह एक मूक ब्लैक कॉमेडी फिल्म थी, जिसमें कमल हासन मुख्य भूमिका में थे। बिना एक भी संवाद के इस फिल्म ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा बटोरी।
- अपूर्वा सहोदरगल (Apoorva Sagodharargal / अप्पू राजा): इस फिल्म में कमल हासन ने तीन अलग-अलग भूमिकाएं निभाई थीं, जिसमें एक बौने व्यक्ति का किरदार ऐतिहासिक बन गया। इसका निर्देशन सिंगीतू जी ने ही किया था।
- माय डियर कुट्टीचथन (My Dear Kuttichathan - Dubbed): इस दिशा में भी उन्होंने भारतीय सिनेमा को तकनीकी रूप से समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- भैरव द्वीपम (Bhairava Dweepam): एक शानदार फंतासी और पौराणिक ड्रामा फिल्म, जिसने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए।
विज्ञान कथा और प्रयोगों के बेताज बादशाह
भारतीय सिनेमा में जब साइंस-फिक्शन जॉनर के बारे में सोचना भी जोखिम भरा माना जाता था, तब सिंगीतू Srinivasa Rao ने कमल हासन के साथ मिलकर 'माइकेल मदन कामराजन' जैसी बेहतरीन कॉमेडी और समय से आगे की फिल्मों पर काम किया। उनकी फिल्मों में तकनीकी बारीकियों के साथ-साथ मानवीय भावनाओं का अद्भुत मेल देखने को मिलता था। वह हमेशा तकनीक का इस्तेमाल कहानी को और बेहतर बनाने के लिए करते थे, न कि केवल दिखावे के लिए। यही कारण है कि उनकी बनाई फिल्में आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती हैं जितनी अपने रिलीज के वक्त थीं।
जूनियर आर्टिस्ट से लेकर सुपरस्टार्स तक सब थे उनके मु मुरीद
फिल्म सेट पर सिंगीतू Srinivasa Rao का अनुशासन और सौम्य स्वभाव हर किसी को प्रभावित करता था। उनके साथ काम करने वाले तकनीशियन और जूनियर कलाकार बताते हैं कि वह कभी सेट पर अपना आपा नहीं खोते थे। हर छोटे-बड़े कलाकार से बेहतरीन अभिनय निकलवाने की कला उन्हें बखूबी आती थी। महेश बाबू और जूनियर एनटीआर जैसे आधुनिक दौर के सितारों ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि आज की पीढ़ियों के फिल्ममेकर्स को उनके काम से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत
सिंगीतू Srinivasa Rao का जाना भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक अपूरणीय क्षति है। हालांकि वह हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं रहे, लेकिन उनकी फिल्में, उनका सिनेमाई दृष्टिकोण और उनके द्वारा गढ़े गए अनगिनत किरदार हमेशा जीवित रहेंगे। नई पीढ़ी के फिल्म मेकर्स के लिए उनका पूरा जीवन एक खुली किताब की तरह है, जो यह सिखाता है कि किस तरह लीक से हटकर सिनेमा बनाया जा सकता है। उनकी यादें और उनकी कला आने वाले कई दशकों तक सिनेमा प्रेमियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी। संपूर्ण फिल्म जगत इस दुखद घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहा है।