बॉलीवुड गलियारों से एक बार फिर सनसनीखेज बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है। अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने अभिनेता नाना पाटेकर के कथित निधन की अफवाहों और उनके पुराने विवाद पर एक बेहद तीखा बयान दिया है। तनुश्री ने नाना पाटेकर को 'ईविल डेड' (Evil Dead) की संज्ञा दी है, जिसके बाद से फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मच गई है।
यह पूरा मामला तब गरमाया जब सोशल मीडिया पर नाना पाटेकर के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर कुछ भ्रामक खबरें तेजी से वायरल होने लगीं। इन खबरों के बीच जब तनुश्री दत्ता से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने अपने पुराने दर्द को ताजा करते हुए बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी। अभिनेत्री का यह बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
पुराने जख्म और #MeToo के वे काले दिन
तनुश्री दत्ता ने साल 2018 में भारत में #MeToo आंदोलन की शुरुआत की थी। उन्होंने वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर पर साल 2008 में फिल्म 'हर्न ओके प्लीज' के सेट पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया था। इस खुलासे ने भारतीय सिनेमा जगत में भूचाल ला दिया था। हालांकि, उस दौरान तनुश्री को इंडस्ट्री के एक बड़े वर्ग से समर्थन मिलने के साथ-साथ भारी विरोध और मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ा था।
हालिया बयान में तनुश्री ने उस दौर को याद करते हुए कहा कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद उन्हें किस तरह के मानसिक आघात (Emotional Trauma) से गुजरना पड़ा था। उनका कहना है कि उस घटना ने उनके करियर को लगभग खत्म कर दिया और उन्हें सालों तक सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा।"जो लोग सच्चाई के साथ खड़े होने का दावा करते हैं, वे तब कहां थे जब मुझे इंडस्ट्री से बाहर करने की साजिश रची जा रही थी? ऐसे लोगों का चरित्र किसी 'ईविल डेड' से कम नहीं है।" - तनुश्री दत्ता (संभावित संदर्भ)
सिने एसोसिएशन का कड़ा रुख
तनुश्री दत्ता के इस तीखे बयान के सामने आने के बाद सिने एसोसिएशन (Cine Association) ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस तरह के संवेदनशील समय में इस तरह की बयानबाजी करना केवल और केवल सस्ती लोकप्रियता (Cheap Publicity) हासिल करने का एक तरीका है।
एसोसिएशन के एक वरिष्ठ सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "किसी की सेहत या जीवन से जुड़ी झूठी अफवाहों पर इस तरह की टिप्पणियां करना पेशेवर नैतिकता के खिलाफ है। यदि किसी को कानूनी या व्यक्तिगत शिकायत है, तो उसके लिए उचित मंच बने हुए हैं, लेकिन इस तरह सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।"
सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय
इस पूरे घटनाक्रम के बाद इंटरनेट यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं। एक तरफ जहां तनुश्री दत्ता के समर्थकों का कहना है कि एक पीड़िता का दर्द कभी कम नहीं होता और उन्हें अपनी बात कहने का पूरा हक है, वहीं दूसरी तरफ नाना पाटेकर के फैंस इस बात से नाराज हैं कि बिना किसी पुष्टि के ऐसी बयानबाजी क्यों की जा रही है।
- समर्थकों का पक्ष: तनुश्री के संघर्ष को सलाम किया जा रहा है और उनका साथ दिया जा रहा है।
- विरोधियों का पक्ष: इसे पब्लिसिटी स्टंट बताकर अभिनेत्री की आलोचना की जा रही है।
- इंडस्ट्री का रुख: अधिकांश फिल्मी हस्तियों ने इस मामले पर चुप्पी साधना ही बेहतर समझा है।
आगे क्या हो सकता है?
यह विवाद फिलहाल शांत होता नहीं दिख रहा है। हालांकि नाना पाटेकर के करीबियों की तरफ से इन अफवाहों का खंडन पहले ही किया जा चुका है, लेकिन तनुश्री दत्ता के इस ताजा बयान ने एक बार फिर #MeToo के उन पुराने पन्नों को पलट दिया है, जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री भुलाना चाहती थी।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले पर नाना पाटेकर या उनकी कानूनी टीम की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है या नहीं। तब तक सोशल मीडिया पर यह बहस यूं ही जारी रहने के आसार हैं।