बिहार के खगड़िया जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पत्थर दिल इंसान को भी अंदर से झकझोर कर रख दिया है। परबत्ता प्रखंड के लगार गांव में जब एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा, तो पूरा इलाका शोक के समंदर में डूब गया। महज पंद्रह साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह जाने वाले मेधावी छात्र नवनीत कुमार की अंतिम विदाई का मंजर जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। इस घटना का सबसे मार्मिक पहलू यह रहा कि समाज की पुरानी रूढ़ियों को तोड़ते हुए एक छोटी बहन ने अपने इकलौते भाई की चिता को मुखाग्नि दी।
गंगा नदी में स्नान के दौरान हुआ था बड़ा हादसा
घटना की शुरुआत गुरुवार को हुई थी, जब लगार पंचायत के वार्ड संख्या-सात का रहने वाला और उत्क्रमित उच्च विद्यालय टिमापुर का स्कूल टॉपर नवनीत कुमार गंगा नदी के बाढ़ वाले इलाके में स्नान करने के दौरान गहरे पानी में चला गया। देखते ही देखते वह पानी की असीम गहराइयों में समा गया। जब यह खबर गांव में फैली, तो कोहराम मच गया। ग्रामीण और आपदा मित्र तुरंत उसकी तलाश में जुट गए। काफी मशक्कत के बाद नवनीत का निष्प्राण शरीर पानी से बाहर निकाला गया। इस अप्रत्याशित हादसे ने पूरे गांव को सन्न कर दिया।
दिल्ली से दौड़े आए पिता और बेसुध मां का हाल
जैसे ही नवनीत के डूबने और फिर उसके शव मिलने की खबर उसके पिता बृजेश यादव तक पहुँची, वे दिल्ली से बदहवास हालत में सीधे गांव दौड़े आए। जिस पिता ने अपने बेटे के भविष्य को लेकर तमाम सपने संजो रखे थे, जब उन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को मृत अवस्था में देखा, तो उनका सीना चीख से फट पड़ा। मां की मर्मस्पर्शी चीखें और रोने की आवाजें वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा चीर रही थीं। परिवार की उम्मीदों का इकलौता दिया पल भर में बुझ चुका था, और चारों तरफ सिर्फ अंधेरा और सन्नाटा पसर गया था।
बहन ने तोड़ी रूढ़ियां, नम आंखों से दी भाई को मुखाग्नि
इस पूरी करुण कहानी का सबसे भावुक और आंखें नम कर देने वाला अध्याय तब लिखा गया जब अंतिम संस्कार के लिए चिता सजाई गई। समाज की दकियानूसी परंपराओं को दरकिनार करते हुए, मासूम बहन मनीषा ने आगे बढ़कर अपने इकलौते भाई की चिता को मुखाग्नि दी। कुछ ही दिन पहले इसी बहन की कलाई पर इस भाई ने रक्षा सूत्र बंधवाकर जिंदगीभर रक्षा का वचन लिया था। आज उसी बहन के कांपते हाथों और बहते अश्कों ने जब भाई के शरीर को अग्नि के हवाले किया, तो वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें छलक उठीं। बहन का यह साहसिक और दर्दनाक कदम इंसानियत के जज्बे की एक ऐसी मिसाल बन गया, जिसे लोग शायद ही कभी भूल पाएं।
मैट्रिक का टॉपर था होनहार नवनीत
नवनीत कोई आम छात्र नहीं था; वह उस परिवार के साथ-साथ पूरे गांव की उम्मीदों का प्रतीक था। उसने हाल ही में मैट्रिक की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर अपने स्कूल में टॉप किया था। अध्यापकों को उस पर पूरा भरोसा था और माता-पिता की आंखों में उसके भविष्य को लेकर बड़े-बड़े सपने पल रहे थे। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। महज पंद्रह साल की छोटी सी उम्र में जिंदगी की किताब का यह पन्ना यकायक पलट गया और वह इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ गया।
गांव में पसरा मातम, हर कोई कर रहा है नम आंखों सेदुआ
आज लगार गांव की हर गली और चौपाल पर सिर्फ इसी गमगीन दास्तान की चर्चा हो रही है। प्रशासनिक औपचारिकताएं तो पूरी हो चुकी हैं, लेकिन वह घर अब हमेशा के लिए वीरान हो चुका है। मां की आंखों का तारा और बहन का इकलौता सहारा अब इस दुनिया में नहीं रहा। यह दुखद घटना इस बात की खौफनाक और चीखती हुई गवाही है कि मौत कभी उम्र की मोहताज नहीं होती। यह मार्मिक दृश्य लंबे समय तक लोगों के जेहन में एक नासूर की तरह टीसता रहेगा और समाज को एक ऐसी टीस दे जाएगा जो कभी नहीं भरेगी।