भोजपुर जिले के चर्चित बिलौटी गांव में शनिवार का दिन प्रशासनिक हलचल से भरा रहा। पिछले दिनों पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के पैतृक आवास पर जिला प्रशासन के दो सबसे बड़े अधिकारी पहली बार पहुंचे। जिलाधिकारी (DM) मनेश कुमार मीणा और पुलिस अधीक्षक (SP) अवधेश दीक्षित ने खुद भरत तिवारी के घर जाकर उनके माता-पिता और अन्य शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात ने एक बार फिर इस पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है। प्रशासनिक अमले के अचानक इस तरह घर पहुंचने से इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है, वहीं परिजनों को भी न्याय की आस बंधती दिख रही है।
करीब आधे घंटे तक चली बंद कमरे में बातचीत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीएम मनेश कुमार मीणा और एसपी अवधेश दीक्षित ने भरत तिवारी के घर पर करीब आधे घंटे तक समय बिताया। इस दौरान उन्होंने परिवार के हर सदस्य से अकेले और सामूहिक रूप से बात की। परिजनों ने इस मुलाकात के दौरान अपनी कई गंभीर समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। एनकाउंटर के बाद से ही यह परिवार सदमे में है और लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है।
मुलाकात के दौरान मुख्य रूप से भरत तिवारी की मौत से जुड़े मामले की अब तक की जांच और कानूनी कार्रवाई की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली गई। परिजनों का कहना था कि वे निष्पक्ष जांच चाहते हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके। अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और न्यायिक आयोग भी इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रहा है।
परिजनों ने रखीं कई अहम मांगें
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के समक्ष परिजनों ने कई सामाजिक और व्यक्तिगत मांगें रखीं। इन मांगों में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
- भरत तिवारी की याद में स्मारक का निर्माण।
- घर और उसके आसपास के परिसर में मिट्टी भराई का कार्य, ताकि जलभराव से राहत मिल सके।
- परिवार की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।
- गंगा कटान से विस्थापित हुए बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए सरकारी सहायता और पुनर्वास की व्यवस्था।
गंगा कटान का मुद्दा उठाते हुए परिजनों ने बताया कि नदी के कटाव के कारण कई परिवार बेघर हो चुके हैं और बुनियादी सुविधाओं के बिना जीवन जीने को मजबूर हैं। उनका यह भी कहना था कि भरत तिवारी जीवित रहते हुए इन विस्थापित और गरीब लोगों की आवाज उठाते थे और उनके अधिकारों के लिए लड़ते थे।
बाढ़ पीड़ितों और बुनियादी सुविधाओं पर प्रशासन का एक्शन
परिजनों द्वारा गंगा कटान और बाढ़ पीड़ितों की समस्या उठाने के बाद डीएम मनेश कुमार मीणा ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ का पानी उतरते ही प्रभावित इलाकों में मूलभूत सुविधाएं बहाल करने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया जाए।
इस पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए डीएम ने जगदीशपुर के एसडीएम ओमप्रकाश लाल को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे व्यक्तिगत निगरानी में राहत कार्यों को पूरा करवाएं। इसके साथ ही, अंचल अधिकारी (CO) को भी मौके पर तलब किया गया और परिवार से जुड़े तमाम लंबित कागजी कामों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निबटाने का आदेश दिया गया।
सुरक्षा को लेकर कड़े कदम और सोशल मीडिया पर शिकंजा
परिवार की सुरक्षा को लेकर चल रही चिंताओं को दूर करने के लिए प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से कदम उठाया है। भरत तिवारी के पैतृक घर पर पुलिस गार्ड की तैनाती कर दी गई है ताकि परिवार खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।
मुलाकात के दौरान एक और गंभीर मुद्दा सामने आया। परिजनों ने शिकायत की कि सोशल मीडिया के कुछ प्लेटफॉर्म्स पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा लगातार उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इस शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए एसपी अवधेश दीक्षित ने शाहपुर थानाध्यक्ष को तत्काल निर्देश दिए। पुलिस को आदेश दिया गया है कि परिजनों से लिखित आवेदन लेकर तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और ऐसा कृत्य करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरकारी घोषणाओं और अनुकंपा नौकरी पर प्रक्रिया तेज
घटना के बाद बिहार सरकार की तरफ से भी इस मामले में कई घोषणाएं की गई थीं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पहले ही घोषणा की थी कि भरत तिवारी के परिवार को एक सरकारी नौकरी और उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
डीएम और एसपी की इस हालिया विजिट के बाद अब इन सरकारी घोषणाओं पर अमल की रफ्तार तेज होने की पूरी उम्मीद है। अधिकारियों ने परिवार को भरोसा दिलाया है कि नियमों के दायरे में रहते हुए अनुकंपा पर नौकरी और अन्य सभी सरकारी सहायता की फाइलों को प्राथमिकता सूची में रखकर आगे बढ़ाया जाएगा। आवास परिसर में मिट्टी भराई और बाढ़ पीड़ितों की नई सूची तैयार करने की मांग पर भी सकारात्मक प्रशासनिक पहल का आश्वासन दिया गया है।
न्यायिक जांच और आगे की राह
गौरतलब है कि इस साल 17 जून को पुलिस एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत हो गई थी, जिसके बाद से यह मामला राज्यभर की सुर्खियों में छाया हुआ है। घटना के बाद उपजे आक्रोश और परिवार की मांग को देखते हुए सरकार ने इसकी निष्पक्ष जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया है। आयोग अपने स्तर पर साक्ष्य जुटा रहा है और गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है।
अब जबकि जिले के मुखिया (डीएम) और पुलिस के मुखिया (एसपी) खुद चलकर पीड़ित परिवार के दरवाजे तक पहुंचे हैं, तो इससे यह संदेश गया है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है। देखना यह होगा कि प्रशासनिक मुलाकातों के बाद जमीन पर धरातल पर इन वादों और निर्देशों का क्रियान्वयन कितनी तेजी से होता है और पीड़ित परिवार को कब तक पूरी राहत मिल पाती है।