अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में एक बेहद दुर्लभ और हैरान कर देने वाली घटना घटी है। एलॉन मस्क की कंपनी SpaceX का एक विशालकाय रॉकेट पार्ट चंद्रमा की सतह से जा टकराया। यह कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की बेकाबू रफ्तार से हुआ एक महा-धमाका था।
चिली के टेलीस्कोप ने पकड़ा अद्भुत नजारा
जब यह 4 टन वजनी और पांच मंजिला इमारत जितना ऊंचा रॉकेट हिस्सा चांद से टकराया, तो वहां धूल और गैसों का एक विशाल गुबार उठ खड़ा हुआ। दक्षिण अमरीकी देश चिली में स्थित European Southern Observatory (ESO) के 'वेरी लार्ज टेलीस्कोप' ने इस घटना के रासायनिक निशानों (Chemical Fingerprints) को अपने कैमरों में कैद किया।
खगोलविदों के अनुसार, टक्कर के बाद अंतरिक्ष में कई किलोमीटर ऊंचा गुबार देखा गया, जो लगभग 5 से 10 मिनट तक सूरज की रोशनी में चमकता रहा और दिखाई देता रहा।
धूल के गुबार में क्या मिला?
वैज्ञानिकों ने जब इस गुबार के स्पेक्ट्रम (रंगों की रेखाओं) का विश्लेषण किया, तो उन्हें दो प्रमुख गैसों की मौजूदगी मिली:
- सोडियम (Sodium): वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सोडियम गैस चांद की अपनी मिट्टी से निकली है।
- लिथियम (Lithium): इस गैस का स्रोत खुद टकराने वाले रॉकेट का मलबा माना जा रहा है।
"इस भयानक टक्कर की ताकत इतनी ज्यादा थी कि चांद की सतह पर लगभग 20 मीटर (65 फीट) चौड़ा और 5 मीटर गहरा एक नया क्रेटर (गड्ढा) बन गया है।" - डॉ. सारा वेब, खगोलशास्त्री
इतने सैटेलाइट्स फिर भी सीधी फोटो क्यों नहीं मिली?
हैरानी की बात यह रही कि उस वक्त चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे कई सैटेलाइट्स में से कोई भी बिल्कुल सही समय पर सही एंगल पर मौजूद नहीं था। यही वजह है कि इस टक्कर की सीधी तस्वीरें तुरंत नहीं ली जा सकीं। हालांकि, नासा का Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) और दक्षिण कोरिया का पाथफाइंडर ऑर्बिटर अब उस जगह की तस्वीरें जुटाने में लगे हैं।
भविष्य के मून मिशन के लिए क्यों बेहद अहम है यह घटना?
यह रॉकेट जनवरी 2025 में लॉन्च किए गए फाल्कन 9 (Falcon 9) का ऊपरी हिस्सा था। मून लैंडर को अंतरिक्ष में आगे धकेलने के बाद यह कचरे के रूप में तैर रहा था। वैज्ञानिक इस टक्कर के जरिए मानव निर्मित अंतरिक्ष कचरे (Artificial Space Debris) के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं।
चूंकि नासा बहुत जल्द चंद्रमा पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी स्थापित करने जा रहा है, ऐसे में चांद के ऑर्बिट में मौजूद स्पेस जंक के खतरों को समझना वैज्ञानिकों के लिए बेहद जरूरी हो गया है।