महाराष्ट्र की लाल परी यानी एसटी बसों में सफर करने वाले वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए एक बेहद जरूरी और बड़ी खबर सामने आई है। अगर आप भी महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) की बसों में मिलने वाली सरकारी छूट का लाभ उठाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। अब बसों में रियायती यात्रा का मजा लेने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। आने वाली 1 अक्टूबर 2026 से यात्रा छूट का टिकट पाने के लिए 'एनसीएमसी' (NCMC) कार्ड होना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में यात्रियों के पास इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अब केवल 3 दिन का समय शेष बचा है।
क्या है एनसीएमसी कार्ड और क्यों है जरूरी?
एनसीएमसी (National Common Mobility Card - नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड) एक डिजिटल पेमेंट कार्ड है, जिसके जरिए देश के किसी भी सार्वजनिक परिवहन में सफर का भुगतान आसानी से किया जा सकता है। महाराष्ट्र सरकार और परिवहन महामंडल ने एसटी बसों में पारदर्शिता लाने और डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए इस कार्ड को अनिवार्य किया है।
नियमों के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 से एसटी बसों में वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को मिलने वाली यात्रा छूट का टिकट केवल इसी एनसीएमसी कार्ड या फिर उससे जुड़े क्यूआर कोड (QR Code) वाली रसीद के माध्यम से ही दिया जाएगा। यदि आपके पास यह कार्ड या रसीद नहीं होगी, तो आपको रियायती दर पर टिकट मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
क्यों बढ़ाई गई थी समय सीमा?
शुरुआत में परिवहन महामंडल ने सितंबर महीने से ही इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, जब इस कार्ड प्रणाली को अमलीजामा पहनाने की कोशिश की गई, तो सर्वर पर अचानक भारी दबाव और यात्रियों की भीड़ बढ़ने के कारण तकनीकी अड़चनें सामने आने लगीं। सफर के दौरान रियायती टिकट जारी करने में कंडक्टरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
इन तमाम तकनीकी समस्याओं और यात्रियों की परेशानी को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद वरिष्ठ नागरिकों और महिला यात्रियों को 30 सितंबर तक पुरानी कार्यप्रणाली यानी सामान्य दस्तावेजों के आधार पर ही छूट का लाभ जारी रखने की अनुमति दे दी गई थी। महामंडल के परिवहन विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी विभागीय नियंत्रकों को सख्त निर्देश भी जारी किए थे।
डिपो और कर्मचारियों को दिए गए हैं कड़े निर्देश
प्रशासन ने इस बदलाव को लेकर पूरी तैयारी कर ली है। राज्य के सभी डिपो प्रबंधकों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन आने वाले सभी आगारों के वाहकों (कंडक्टर), चालकों (ड्राइवर) और अन्य परिवहन कर्मचारियों को इस नए नियम से अच्छी तरह अवगत करा दें। ताकि 1 अक्टूबर से जब यह नियम लागू हो, तो मैदानी स्तर पर यात्रियों और कर्मचारियों के बीच किसी तरह का विवाद या भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
क्यूआर कोड वाली रसीद भी होगी मान्य
कई यात्रियों के मन में यह सवाल है कि यदि उनका एनसीएमसी कार्ड बनकर तैयार नहीं हुआ है, तो क्या होगा? इस पर महामंडल ने स्थिति साफ कर दी है। जिन यात्रियों ने कार्ड के लिए आवेदन कर दिया है और प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनके लिए कार्ड के साथ-साथ 'क्यूआर कोड वाली रसीद' भी पूरी तरह मान्य होगी।
- जिनके पास सक्रिय एनसीएमसी कार्ड है, उनका टिकट सीधे उसी से कटेगा।
- कार्ड न मिलने की स्थिति में पंजीकरण के बाद मिलने वाली क्यूआर कोड रसीद दिखानी होगी।
- अंतिम तिथि यानी 30 सितंबर के बाद पंजीकरण और नियमों को लेकर कोई ढील दिए जाने की संभावना नहीं है।
अंतिम दिन का इंतजार न करें यात्री
प्रशासन ने अकोला समेत पूरे महाराष्ट्र के वरिष्ठ नागरिकों और महिला यात्रियों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख (30 सितंबर) का बिल्कुल इंतजार न करें। आखिरी वक्त में सर्वर डाउन होने या लंबी कतारों से बचने के लिए तुरंत अपने नजदीकी डिपो या अधिकृत केंद्र पर जाकर इस प्रक्रिया को पूरा कर लें। यदि आपने अभी तक अपना एनसीएमसी कार्ड नहीं बनवाया है, तो आपके पास केवल कुछ ही घंटे बचे हैं। थोड़ा सा आलस आपको बस में मिलने वाली छूट के अधिकार से वंचित कर सकता है, इसलिए बिना देर किए इस जरूरी काम को पूरा कर लें।