Breaking
► चंदौली में दर्दनाक सड़क हादसा, तेज रफ्तार बाइक ने राहगीर को मारी जोरदार टक्कर ► राजेश मसाले पर बड़ा एक्शन: असुरक्षित घोषित होने के बाद यूपी में बिक्री पर रोक ► रेलवे का मेगा एक्शन: डीडीयू मंडल में ट्रैक्शन पावर मजबूत, बदली गई तारों की लंबाई ► चन्दौली पुलिस की अनूठी पहल: विश्व दृष्टि दिवस पर एसपी आकाश पटेल ने दृष्टिबाधित बच्चों के साथ बिताए खास पल ► निशा बांगरे का राजनीति से मोहभंग, SDM पद वापसी की गुहार ► विधानसभास्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता का रोमांचक समापन, 120 टीमों ने दिखाया दम ► राजस्थान में एसआईआर के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा सियासी संग्राम, सड़कों पर उतरा विपक्ष ► किसानों के लिए बड़ी राहत: फसल नुकसान पर सर्वे तेज, रबी में मिलेंगे मुफ्त बीज और मिनीकिट ► समस्तीपुर में पुलिस पर भारी पड़ा आरोपी, कीचड़ में लोटकर काटा गदर - VIDEO ► फेसबुक का बड़ा बदलाव: अब ऐप खोलते ही दिखेगी फुल-स्क्रीन रील्स फीड ► चंदौली में दर्दनाक सड़क हादसा, तेज रफ्तार बाइक ने राहगीर को मारी जोरदार टक्कर ► राजेश मसाले पर बड़ा एक्शन: असुरक्षित घोषित होने के बाद यूपी में बिक्री पर रोक ► रेलवे का मेगा एक्शन: डीडीयू मंडल में ट्रैक्शन पावर मजबूत, बदली गई तारों की लंबाई ► चन्दौली पुलिस की अनूठी पहल: विश्व दृष्टि दिवस पर एसपी आकाश पटेल ने दृष्टिबाधित बच्चों के साथ बिताए खास पल ► निशा बांगरे का राजनीति से मोहभंग, SDM पद वापसी की गुहार ► विधानसभास्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता का रोमांचक समापन, 120 टीमों ने दिखाया दम ► राजस्थान में एसआईआर के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा सियासी संग्राम, सड़कों पर उतरा विपक्ष ► किसानों के लिए बड़ी राहत: फसल नुकसान पर सर्वे तेज, रबी में मिलेंगे मुफ्त बीज और मिनीकिट ► समस्तीपुर में पुलिस पर भारी पड़ा आरोपी, कीचड़ में लोटकर काटा गदर - VIDEO ► फेसबुक का बड़ा बदलाव: अब ऐप खोलते ही दिखेगी फुल-स्क्रीन रील्स फीड

महापुरुषों की प्रतिमाओं का हाल: आम दिनों में धूल फांकते हैं नायक, सिर्फ खास मौकों पर याद

महापुरुषों की प्रतिमाओं का हाल: आम दिनों में धूल फांकते हैं नायक, सिर्फ खास मौकों पर याद

क्या हमारे देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों, साहित्यकारों और राष्ट्र निर्माताओं का सम्मान केवल साल में दो बार यानी 15 अगस्त और 26 जनवरी तक ही सीमित रह गया है? यह एक ऐसा सवाल है जो हर उस नागरिक के मन में उठना चाहिए जो देश के इतिहास और उसके नायकों के प्रति थोड़ी भी संवेदनशीलता रखता है। ताजा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से सामने आया है, जहां जिला प्रशासन और नगर निगम की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

खास मौकों की औपचारिकता और आम दिनों की उदासीनता

आगामी स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) को लेकर वाराणसी नगर निगम एक बार फिर हरकत में आ गया है। निगम के उद्यान विभाग ने शहर भर में लगी महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ-सफाई और माल्यार्पण की योजना तैयार की है। कागजों और सरकारी बैठकों में यह सब बहुत भव्य लगता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।

सच तो यह है कि इन महापुरुषों को साल के बाकी 363 दिन पूरी तरह भुला दिया जाता है। जब तक कोई राष्ट्रीय पर्व नजदीक नहीं आता, तब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को इन प्रतिमाओं की सुध नहीं रहती। चारों तरफ फैली गंदगी, उगी हुई घास और उखड़ता हुआ पेंट इस बात की गवाही देने के लिए काफी हैं कि स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को लेकर कितना गंभीर है।

शहर के अलग-अलग चौराहों की बानगी: तस्वीरों में देखिए बदहाली

वाराणसी के विभिन्न हिस्सों में स्थापित इन मूर्तियों की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। अगर आप शहर की सड़कों से गुजरते हैं, तो आपको कई ऐसी जगहें दिख जाएंगी जहां लापरवाही साफ नजर आती है:

  • कचहरी से वीडीए मोड़: यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक लोहे की प्रतिमा स्थापित है। दुर्भाग्य देखिए कि इसके रखरखाव के नाम पर शून्य काम हुआ है। प्रतिमा के आसपास लंबी-लंबी घास उग आई है, जो इसकी गरिमा के अनुकूल बिल्कुल नहीं है।
  • हरहुआ रिंग रोड चौराहा: इस चौराहे पर खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों को प्रेरित करने वाली प्रतिमा लगाई गई है, लेकिन इसके चबूतरे पर जमी मोटी धूल और आसपास बिखरे टूटे हुए शीशे प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़े करते हैं।
  • भगवान बुद्ध की प्रतिमा: शहर के एक प्रमुख स्थल पर स्थापित भगवान बुद्ध की प्रतिमा का रंग अब उखड़ने लगा है। प्रतिमा पर धूल की परत जमी हुई है, लेकिन किसी की भी नजर इस पर नहीं पड़ती।
  • पांडेयपुर और जंसा चौराहा: कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पांडेयपुर चौराहे पर सुशोभित है, जिसकी सफाई महीनों से नहीं हुई है। वहीं, जंसा चौराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राज बिहारी सिंह की प्रतिमा भी राष्ट्रीय पर्वों के अलावा सालभर धूल फांकती नजर आती है।
  • आशापुर और सारनाथ: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (आशापुर चौराहा) और महान शिक्षाविद् आचार्य नरेंद्र देव (सारनाथ मुख्य चौराहा) की प्रतिमाओं का हाल भी इससे जुदा नहीं है। इन सभी जगहों पर प्रशासनिक उदासीनता साफ झलकती है।

अधिकारियों का क्या है कहना?

इस पूरे मामले पर जब हमने वाराणसी नगर निगम के उद्यान अधीक्षक वीके सिंह से बात की, तो उन्होंने प्रक्रिया का हवाला देते हुए बताया कि 15 अगस्त के अवसर पर विशेष तौर पर सफाई के साथ-साथ इन प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कराया जाएगा।

"नगर निगम के अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी बंटी हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सफाई का कार्य किया जाता है, सामान्य विभाग मरम्मत का जिम्मा संभालता है, और उद्यान विभाग की ओर से राष्ट्रीय पर्वों पर माला-फूल चढ़ाने की व्यवस्था की जाती है।" - वीके सिंह, उद्यान अधीक्षक

हालांकि, अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि साल के बाकी महीनों में इन प्रतिमाओं की सुधि क्यों नहीं ली जाती। क्या केवल एक दिन की औपचारिकता निभा देने से महापुरुषों को सच्चा सम्मान मिल जाता है?

आम जनता में आक्रोश और नैतिक जिम्मेदारी

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों का मानना है कि महापुरुषों की प्रतिमाएं केवल पत्थर या धातु के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि वे हमारे गौरवशाली इतिहास और प्रेरणा के स्त्रोत हैं। उनकी इस तरह की उपेक्षा न केवल उन महान आत्माओं का अपमान है, बल्कि नई पीढ़ी को भी एक गलत संदेश देती है। जनता सवाल पूछ रही है कि क्या टैक्स के पैसों से चलने वाले इन विभागों के पास इतनी भी क्षमता नहीं है कि वे महीने में कम से कम एक बार इन मूर्तियों की धुलाई और देखभाल करवा सकें?

निष्कर्ष: सुधार की है सख्त जरूरत

स्वतंत्रता दिवस का पर्व हमें देशभक्ति का अहसास कराने के साथ-साथ यह आत्ममुग्धता त्यागने का भी संदेश देता है कि हम अपने अतीत के प्रति कितने वफादार हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि केवल 15 अगस्त के नाम पर होने वाले इस दिखावे से ऊपर उठकर नगर निगम और प्रशासन कोई स्थायी व्यवस्था बनाएगा, ताकि हमारे ये मार्गदर्शक हमेशा पूरे सम्मान के साथ चमकते रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: वाराणसी में महापुरुषों की प्रतिमाओं की सफाई की जिम्मेदारी किसकी है?

Ans: नगर निगम के अंतर्गत स्वास्थ्य, सामान्य और उद्यान विभाग मिलकर इसकी जिम्मेदारी संभालते हैं, जिसमें सफाई से लेकर मरम्मत और माल्यार्पण शामिल है।

Q2: आम दिनों में इन प्रतिमाओं की उपेक्षा क्यों होती है?

Ans: प्रशासनिक उदासीनता और केवल राष्ट्रीय पर्वों (15 अगस्त और 26 जनवरी) पर ही एक्शन लेने की पुरानी परंपरा के कारण आम दिनों में इनकी देखरेख नहीं हो पाती है।

Q3: इस मामले पर नगर निगम के अधिकारी का क्या पक्ष है?

Ans: उद्यान अधीक्षक वीके सिंह के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर विशेष सफाई अभियान चलाकर सभी प्रमुख प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया जाएगा।

About the Author

तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →