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अनुकंपा नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, क्या कहती है अदालत?

अनुकंपा नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, क्या कहती है अदालत?

क्या किसी परिवार के कमाने वाले मुखिया की अचानक मौत के बाद, उसके आश्रितों को केवल इसलिए नौकरी से वंचित किया जा सकता है क्योंकि वे उम्र की सीमा से कुछ महीने या दिन बड़े हैं? यह एक ऐसा सवाल है जो देश के हजारों परिवारों को झकझोरता रहा है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक बेहद मानवीय और स्पष्ट रुख अपनाया है, जो नौकरी की आस लगाए बैठे युवाओं के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: 'कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य न्याय होना चाहिए'

हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के मामलों पर सुनवाई करते हुए एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति कोई भीख या एहसान नहीं है, बल्कि यह एक कल्याणकारी उपाय है। इसका मूल उद्देश्य किसी मृत कर्मचारी के शोक संतप्त परिवार को संकट के समय तत्काल आर्थिक संबल प्रदान करना है।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने अपने एक फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ऐसी योजनाओं और नियमों की व्याख्या बेहद तार्किक, निष्पक्ष और उदार दृष्टिकोण के साथ की जानी चाहिए, न कि अत्यधिक तकनीकी और कठोरता से, जिससे कि उस योजना का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाए।

क्या था पूरा मामला? जानिए क्यों पहुंचा कोर्ट

यह मामला वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता के पिता कंपनी में डोजर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। दुर्भाग्यवश, 17 दिसंबर 2020 को सेवा के दौरान ही उनका निधन हो गया। पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

परिवार को इस संकट से उबारने के लिए मृतक के बेटे ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि, प्रबंधन ने उसके दावे को इस तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया कि आवेदन के समय बेटे की आयु 34 वर्ष, 10 महीने और 12 दिन थी। कंपनी के नियमों (नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट-6 के खंड 9.3.4) के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए अधिकतम 35 वर्ष की आयु सीमा तय की गई थी। हालांकि वह इस सीमा के भीतर ही था, लेकिन कंपनी के तकनीकी पेंच और दावों के चलते मामला अदालत तक जा पहुंचा।

अदालत की सख्त टिप्पणी और याचिका मंजूर

सुप्रीम कोर्ट ने तमाम तथ्यों और परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन किया। अदालत ने माना कि जब बेटा निर्धारित 35 वर्ष की आयु सीमा के दायरे में ही आ रहा था, तो केवल तकनीकी दांव-पेंच के आधार पर उसे इस अधिकार से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसकी याचिका को मंजूर कर लिया।

  • मुख्य बिंदु: अनुकंपा नियुक्ति परिवार का अधिकार है जब वे संकट में हों।
  • नियमों की व्याख्या: कठोरता के बजाय मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
  • आयु सीमा: तय सीमा के भीतर होने पर तकनीकी अड़चनें नहीं आनी चाहिए।

कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की याचिका पर 17 अगस्त को होगी सुनवाई

एक अन्य महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में, कावेरी जल विवाद को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीख तय कर दी गई है। कर्नाटक से कावेरी का पानी तत्काल छोड़ने के निर्देश देने की मांग को लेकर तमिलनाडु सरकार और अन्य संबंधित पक्षों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अब 17 अगस्त को सुनवाई करेगा।

यह सुनवाई एक विशेष पीठ के समक्ष होगी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI), न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने किसानों की ओर से इस मामले पर तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि हालांकि यह मामला पहले न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ के पास सूचीबद्ध था, लेकिन उनके अस्वस्थ होने के कारण बेंच और तारीख में बदलाव करना पड़ा है।

अदालत के इन फैसलों का आम जनता पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में दिखाया गया यह संवेदनशील रुख आने वाले समय में देश की अन्य सार्वजनिक और निजी कंपनियों के लिए एक मिसाल बनेगा। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थानों में कागजी औपचारिकताओं और कठोर नियमों के नाम पर जरूरतमंदों को महीनों और सालों चक्कर कटवाए जाते हैं। इस फैसले के बाद, उम्मीद की जा रही है कि नियोक्ताओं का रवैया थोड़ा अधिक व्यावहारिक और मानवीय होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?

Ans: अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य सरकारी या सार्वजनिक उपक्रम के कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिवार को अचानक आए आर्थिक संकट से उबारना और तत्काल जीविका का साधन उपलब्ध कराना है।

Q2: क्या आयु सीमा के करीब होने पर भी अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है?

Ans: ताज़ा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, यदि आवेदक निर्धारित आयु सीमा (जैसे 35 वर्ष) के भीतर आता है, तो नियमों की तार्किक और निष्पक्ष व्याख्या करते हुए उसे नियुक्ति का लाभ मिलना चाहिए, न कि तकनीकी कारणों से आवेदन खारिज किया जाना चाहिए।

Q3: कावेरी जल विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई कब है?

Ans: तमिलनाडु सरकार और किसानों की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में अब 17 अगस्त को सुनवाई तय की गई है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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