ताजमहल में जलाभिषेक का मुद्दा: क्या सावन के सोमवार को मिलेगी अनुमति?
आगरा का ताजमहल, जिसे दुनिया भर में प्रेम की निशानी माना जाता है, इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार चर्चा मोहब्बत की नहीं, बल्कि एक कानूनी विवाद की है। ताजमहल को 'तेजोमहालय' शिव मंदिर बताते हुए सावन के दौरान जलाभिषेक और निशुल्क प्रवेश की मांग वाली याचिका पर सुनवाई एक बार फिर टल गई है।
बुधवार को अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन सप्तम, रजत शुक्ला की अदालत में इस मामले पर सुनवाई होनी थी। हालांकि, तकनीकी कारणों और विपक्षी पक्ष की अनुपस्थिति के चलते अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर 2024 की तारीख मुकर्रर की है।
क्या है पूरा मामला?
यह याचिका 'योगी यूथ ब्रिगेड' के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर द्वारा 23 जुलाई, 2024 को दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि ताजमहल असल में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर 'तेजोमहालय' है। इसी आधार पर उन्होंने सावन के पवित्र महीने में ताजमहल परिसर के भीतर जलाभिषेक करने की अनुमति मांगी है।
याचिका में केवल जलाभिषेक ही नहीं, बल्कि एक और बड़ी मांग भी शामिल है। तोमर ने मांग की है कि सावन के चार सोमवार को हिंदुओं के लिए ताजमहल में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क किया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि शाहजहां के उर्स और ईद के मौके पर ताजमहल में प्रवेश निशुल्क हो सकता है, तो सावन के सोमवार को क्यों नहीं?अदालत में सुनवाई क्यों टली?
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी अदालत में उपस्थित नहीं थे। अदालत ने इस स्थिति को देखते हुए स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला पहली बार स्थानांतरित होकर आया है, इसलिए इसे 'सेक्शन 89 ए जनरल लूज सिविल' के तहत सुना जाना है।
न्यायाधीश रजत शुक्ला ने विपक्षी अधिवक्ता को सूचना देने के लिए समय दिया है ताकि वे अगली तारीख पर उपस्थित हो सकें। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है, इसलिए अदालत ने विपक्ष को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।
विवाद के मुख्य बिंदु:
- तेजोमहालय का दावा: ताजमहल के मूल स्वरूप को लेकर लंबे समय से एक वर्ग द्वारा इसे शिव मंदिर बताया जा रहा है।
- निशुल्क प्रवेश की मांग: सावन के चार सोमवारों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश निशुल्क करने की अपील।
- विपक्षी पक्ष की भूमिका: इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारत संघ को प्रतिवादी बनाया गया है।
कानूनी पेचीदगी: अदालत अब इस मामले को वैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा रही है।क्या है इतिहास और विवाद की जड़?ताजमहल को लेकर इस तरह के दावे नए नहीं हैं। पिछले कई वर्षों से विभिन्न संगठनों द्वारा इसके 'तेजोमहालय' होने के दावे किए जाते रहे हैं। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और इतिहासकारों का एक बड़ा वर्ग इन दावों को सिरे से खारिज करता आया है। एएसआई का स्पष्ट मानना है कि ताजमहल मुगलकालीन वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना है और इसके ऐतिहासिक साक्ष्य मुगल बादशाह शाहजहां से जुड़े हैं।
वहीं, दूसरी ओर, याचिकाकर्ता कुंवर अजय तोमर का कहना है कि उनकी मांग धार्मिक भावनाओं से जुड़ी है और उन्हें उम्मीद है कि अदालत से उन्हें न्याय मिलेगाआगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें 2 सितंबर पर टिकी हैं। क्या अगली सुनवाई में विपक्षी पक्ष अपनी दलीलें पेश करेगा? क्या अदालत इस मामले पर कोई अंतरिम आदेश देगी? ये सवाल फिलहाल बने हुए हैं। फिलहाल, ताजमहल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह ही सामान्य है और किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. ताजमहल को लेकर कोर्ट में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ता ने ताजमहल में सावन के दौरान जलाभिषेक करने और सावन के चार सोमवार को हिंदुओं के लिए प्रवेश निशुल्क करने की मांग की है।
2. अगली सुनवाई कब है?
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर 2024 की तारीख तय की है।
3. इस मामले में प्रतिवादी कौन हैं?
इस वाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारत संघ को प्रतिवादी बनाया गया है।।