अमेरिका के न्यू मैक्सिको की अदालत ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा पर 25 अरब डॉलर यानी लगभग 2.36 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम सिविल पेनल्टी लगाई है। यह फैसला यूजर्स की प्राइवेसी, निजी डेटा के इस्तेमाल और प्लेटफॉर्म पर भ्रामक जानकारी व नफरत फैलाने वाले कंटेंट को रोकने से जुड़े दावों के उल्लंघन को लेकर आया है।
मुकदमे की पृष्ठभूमि और अदालत का फैसला
न्यू मैक्सिको राज्य ने साल 2021 में फेसबुक के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। राज्य का मुख्य आरोप था कि कंपनी ने यूजर्स को उनके निजी डेटा के संग्रह, इस्तेमाल और थर्ड-पार्टी ऐप्स के साथ जानकारी साझा किए जाने के संबंध में गुमराह किया है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं और हेट स्पीच को रोकने के दावों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान 25 सितंबर 2026 को जूरी ने पाया कि कंपनी द्वारा दिए गए 29 बयानों में से 26 भ्रामक थे। न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत जूरी ने कुल 43,899,725 उल्लंघनों के लिए फेसबुक को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद, 21 अक्टूबर 2026 को अदालत ने आधिकारिक रूप से 25 अरब डॉलर की पेनल्टी तय कर दी।
कैम्ब्रिज एनालिटिका विवाद से जुड़ाव
इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ें साल 2018 में सामने आए चर्चित कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल तक जाती हैं। उस दौरान यह खुलासा हुआ था कि थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए लगभग 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स का निजी डेटा हासिल किया गया था, जिसका उपयोग राजनीतिक विज्ञापनों को लक्षित करने के लिए किया गया था। हालांकि न्यू मैक्सिको का मुकदमा केवल पुराने डेटा लीक तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कंपनी के हालिया प्राइवेसी बयानों और सुरक्षा दावों की भी व्यापक जांच की गई।
इतनी बड़ी रकम तय होने की प्रक्रिया
न्यू मैक्सिको के कानून के अनुसार, प्रत्येक जानबूझकर किए गए उल्लंघन पर अधिकतम 5,000 डॉलर तक की सिविल पेनल्टी का प्रावधान है। सभी 43.9 मिलियन उल्लंघनों पर अधिकतम जुर्माना लगाने की स्थिति में यह राशि 219 अरब डॉलर से भी अधिक हो सकती थी। हालांकि, अदालत ने इस रकम को घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया। जहां राज्य पक्ष ने इससे भी अधिक जुर्माने की मांग की थी, वहीं मेटा ने इस पेनल्टी को पूरी तरह अनुचित करार दिया है।
मेटा की प्रतिक्रिया और आगे की कानूनी लड़ाई
अदालत के इस फैसले के बाद मेटा ने स्पष्ट किया है कि वह इस पेनल्टी के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देगी। इसका अर्थ यह है कि इस राशि को अभी से कंपनी से वसूले जा चुके अंतिम जुर्माने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अपील प्रक्रिया के दौरान इस फैसले और जुर्माने की रकम पर नए सिरे से कानूनी बहस होने की पूरी संभावना है।