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भीड़ के पीछे मत भागो, ट्रेंडसेटर बनो: Gen Z × Gurudev 2.0 में युवाओं से रूबरू हुए श्री श्री रविशंकर

भीड़ के पीछे मत भागो, ट्रेंडसेटर बनो: Gen Z × Gurudev 2.0 में युवाओं से रूबरू हुए श्री श्री रविशंकर

बेंगलुरु में आयोजित Gen Z × Gurudev 2.0 कार्यक्रम में श्री श्री रविशंकर ने लगभग 2,000 युवाओं के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव, असफलता से उबरने, हीनभावना और करियर से जुड़े युवाओं के तमाम तीखे और उलझन भरे सवालों के सहज और व्यावहारिक जवाब दिए।

बेंगलुरु में आयोजित 'Gen Z × Gurudev 2.0' कार्यक्रम में आज की युवा पीढ़ी के मन में चल रही उथल-पुथल सीधे तौर पर सामने आई। असफल होने के बाद वापसी कैसे करें, लोग क्या सोचेंगे इस चिंता से कैसे मुक्त हों, और शरीर व रूप-रंग को लेकर मन में उठने वाली हीनभावना से कैसे निपटें—जैसे गंभीर सवाल युवाओं ने श्री श्री रविशंकर के सामने रखे। लगभग दो हजार युवाओं की मौजूदगी में हुए इस संवाद में सोशल मीडिया की वजह से पैदा होने वाली बेचैनी, अपनी अलग पहचान बनाने की चुनौती, आपसी अपनापन और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषयों पर खुलकर बात हुई।

भीड़ का हिस्सा नहीं, ट्रेंडसेटर बनने की सीख

जब एक युवा ने यह सवाल पूछा कि भीड़ का हिस्सा बने बिना अपनी एक स्वतंत्र और अलग पहचान कैसे बनाई जाए, तो श्री श्री रविशंकर का सीधा और प्रेरणादायक जवाब था कि युवाओं को लीक पर चलने के बजाय 'ट्रेंडसेटर' बनना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान गुरुदेव ने हर सवाल का उत्तर सहजता, हल्के-फुल्के हास्य और गहरी जीवन-समझ के साथ दिया।

सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने या लोगों के सामने आने में घबराहट महसूस करने वाले एक प्रतिभागी को उन्होंने ध्यान, सुदर्शन क्रिया और भस्त्रिका जैसे प्राणायाम नियमित रूप से करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इन अभ्यासों से व्यक्ति अधिक सहजता के साथ खुद को अभिव्यक्त कर पाता है। शरीर और रूप-रंग को लेकर युवाओं में पाई जाने वाली हीनभावना पर उन्होंने याद दिलाया कि यह भौतिक शरीर निरंतर बदलता रहता है, इसलिए इसे लेकर अत्यधिक तनाव नहीं पालना चाहिए।

असफलता और परिणामों पर संतुलित दृष्टिकोण

असफलता से उबरने के सवाल पर गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि इंसान को परिणामों से न तो जरूरत से ज्यादा चिपके रहना चाहिए और न ही उनसे पूरी तरह कट जाना चाहिए। जो भी परिणाम सामने आएं, उन्हें सहजता से स्वीकार करना ही आगे बढ़ने का रास्ता है। इस मार्गदर्शन से कई युवाओं को यह मानसिक राहत मिली कि यदि वे किसी काम में कई बार असफल भी हो जाते हैं, तो भी जीवन में आगे बढ़ने और प्रयास जारी रखने के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं।

व्यक्तिगत स्तर के इन सवालों के जवाब अंततः जीवन और समाज की एक बड़ी तस्वीर पेश कर रहे थे। जाति और नस्ल के भेदभाव से ऊपर उठने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि किसी बड़े और सार्थक उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता ही इंसानों को उनके छोटे-मोटे मतभेदों से ऊपर उठाकर एकजुट कर सकती है। धरती और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव ऐसा ही एक साझा उद्देश्य है। वहीं, जब एक युवा ने यह जानना चाहा कि उसे कैसे पता चले कि लोग उसकी परवाह करते हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यह अहसास उतना ही स्वाभाविक है, जितना यह समझना कि अब दोपहर हो चुकी है।

आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता

युवाओं के बीच आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर बात करते समय गुरुदेव का स्वर काफी गंभीर हो गया। उन्होंने उपस्थित सभी युवाओं से एक-दूसरे के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रेम संबंध टूटने, परीक्षा में मन मुताबिक नतीजे न आने या करियर की शुरुआती असफलताओं के कारण आने वाली निराशा से उबरने में दोस्तों और परिजनों को एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। किसी भी परिस्थिति में असफलता को जीवन की संभावनाओं का अंतिम बिंदु नहीं मानना चाहिए।

युवाओं को करियर गढ़ने और नए कौशल सीखने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने पेशे के साथ-साथ संगीत, कला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी समय जरूर निकालें। उन्होंने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि यह दुनिया उनकी है और इस पर उनका अधिकार है, इसलिए उन्हें इसकी जिम्मेदारी भी उठानी होगी। उनके अनुसार, युवाओं के लिए आसमान ही सीमा है और उन्हें अपने उत्साह व उमंग को कभी कम नहीं होने देना चाहिए।कला, संस्कृति और संगीत का अनूठा संगम

इस आयोजन में फिल्मों और कला जगत से जुड़े कलाकारों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आगामी फिल्म 'हनुमान अंश-शोभिनव सत्य' के मुख्य कलाकार शोभिनव और पूर्णिमा तिवारी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस फिल्म में शोभिनव ने नीम करोली बाबा और पूर्णिमा तिवारी ने रामबेटी की भूमिका निभाई है। अभिनेता शोभिनव ने साझा किया कि जेन जेड पीढ़ी ने इस फिल्म को एक बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने फिल्म के प्रचार के दौरान ही सुदर्शन क्रिया सीखने का अपना अनुभव भी साझा किया और बताया कि इसके अभ्यास के पहले दिन से ही उनके रोजमर्रा के व्यवहार और लोगों से बातचीत के तरीके में सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगा था।

कार्यक्रम की शाम आधुनिक जेन जेड संस्कृति और पारंपरिक भारतीय कलाओं के खूबसूरत मेल का गवाह बनी। श्री श्री इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन स्टडीज की ओर से एक आकर्षक फैशन शो प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा कथक नृत्यांगना अनार्घ्या पाटिल और मेघालय के वायरल ब्रेकडांसर पद्मनाभ ने अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं। एक इंटरैक्टिव फ्लैश मॉब ने वहां मौजूद दर्शकों को भी झूमने पर मजबूर कर दिया।

मेघालय से आकर आश्रम में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों ने गुरुदेव के लोकप्रिय भजन 'राम राम राम' पर एक संगीतमय प्रस्तुति दी। निर्वाण स्टेशन के बैनर तले आयोजित 'भजन क्लबिंग' और 'सुकून वाली कव्वाली' ने पारंपरिक भक्ति संगीत को आधुनिक संगीत की ऊर्जा के साथ मंच पर उतारा। इस बैंड के मुख्य गायक राजीव ने कहा कि जेन जेड पीढ़ी हमारे विश्व का भविष्य है, लेकिन यह वह पीढ़ी भी है जो लगातार मानसिक भटकाव और बढ़ते तनाव से जूझ रही है। ऐसे युवाओं को सही दिशा और खुशहाली की राह दिखाने के लिए गुरुदेव का यह सक्रिय प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक है।

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नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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