दिल्ली हाईकोर्ट आज सुनाएगा फैसला, सौरव दास और आशुतोष रांका क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए
दिल्ली हाईकोर्ट ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा दायर उस याचिका पर अपना आदेश सुनाएगा, जिसमें पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी गई है जिसके तहत उन्हें 10,000 रुपये का शांति बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने दोनों पक्षों के वकीलों की लगभग तीन घंटे तक विस्तृत दलीलें सुनने के बाद याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस से तीखे सवाल किए थे और यह जानना चाहा था कि क्या कोई विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) बिना किसी स्वतंत्र जांच के इस प्रकार का नोटिस जारी कर सकता है।
हाईकोर्ट में सुनवाई और पुलिस के तर्क
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता नेहा बोरा की इस चिंता पर गौर किया कि उनके खिलाफ पहले ही माहौल इस प्रकार बना दिया गया है कि उन्हें गलत मान लिया गया है, और अब उनसे यह वादा मांगा जा रहा है कि वे भविष्य में अच्छा बर्ताव करेंगी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब कोई व्यक्ति अदालत में आकर अच्छे आचरण का वादा करता है, तो इसका निहितार्थ यही निकाला जाता है कि अब तक उनका आचरण संतोषजनक नहीं रहा है।
वहीं, दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जब नेहा बोरा के खिलाफ पहले से ही छह एफआईआर दर्ज हैं, तो क्या उन्हें पूरी तरह से बेकसूर करार दिया जा सकता है। इस कानूनी प्रक्रिया के बीच नेहा बोरा ने कनॉट प्लेस में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है और स्पष्ट किया है कि वह किसी अन्य संगठन के इस कार्यक्रम में शामिल नहीं थीं।
क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए सौरव दास और आशुतोष रांका
दूसरी तरफ, इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य मामलों में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को राजौरी गार्डन स्थित अपने कार्यालय में तलब किया था, लेकिन दोनों नेता निर्धारित समय पर पेश नहीं हुए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन दोनों नेताओं ने पेश होने के लिए और अधिक समय की मांग की है, जिसके बाद अब पुलिस उन्हें नया नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है।
इससे पहले बुधवार को दिल्ली की एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने इन दोनों नेताओं को जमानत दे दी थी, जिसके तहत उन्हें 50,000 रुपये का बॉन्ड भरने का निर्देश मिला था। दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान इन दोनों को हिरासत में लिया था। इस बीच, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया है कि सौरव दास और आशुतोष रांका अन्य लोगों की तुलना में अधिक प्रमुख नेता हैं।