मध्य प्रदेश के धार्मिक नगर उज्जैन से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यहां रामवास क्षेत्र में मंगलवार को मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा की एक चलती बस अचानक भीषण आग की चपेट में आ गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरी गाड़ी धू-धू कर जलकर खाक हो गई। इस घटना के बाद से स्थानीय इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और हर कोई हैरान है कि आखिर इतनी नई और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सेवा की बस में इस तरह की घटना कैसे घटित हो गई।
रामवास क्षेत्र में मची अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के वक्त रामवास क्षेत्र से गुजर रही इस बस से अचानक धुआं उठता हुआ दिखाई दिया। जब तक चालक कुछ समझ पाता या बस को पूरी तरह सुरक्षित स्थान पर रोकता, तब तक लपटों ने वाहन को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया। आग की भूनक लगते ही आसपास के लोगों में भगदड़ मच गई। लोगों ने तुरंत इस बात की सूचना स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग को दी, ताकि बड़े नुकसान को टाला जा सके।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुईं। फायर फाइटर्स ने मौके पर पहुंचकर युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। पानी की बौछारें डालकर आग पर काबू पाने की कोशिशें की गईं। काफी लंबी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग को पूरी तरह शांत किया, लेकिन तब तक बस का ढांचा पूरी तरह जलकर तबाह हो चुका था। गनीमत यह रही कि इस भयानक हादसे में किसी भी तरह की जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, घटना के वक्त बस के भीतर यात्री सवार थे या नहीं, इस बारे में स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है और प्रशासन इसकी गहराई से पड़ताल कर रहा है.
आग लगने के कारणों की हो रही तकनीकी जांच
सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर इस आधुनिक बस में आग लगने की असली वजह क्या थी? क्या यह किसी शॉर्ट सर्किट का नतीजा था या फिर गाड़ी में कोई गंभीर तकनीकी खराबी (Technical Flaw) आ गई थी? उज्जैन पुलिस और परिवहन विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का मुआयना करना शुरू कर दिया है। फॉरेंसिक एंगल से भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि यह साफ हो सके कि आग अंदरूनी हिस्सों से भड़की थी या बाहरी कारणों से।
इस हादसे के सामने आने के बाद अब सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की फिटनेस और उनकी तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आम जनता का कहना है कि जब नई योजनाओं के तहत संचालित होने वाली गाड़ियों का यह हाल है, तो मेंटेनेंस की व्यवस्था पर पैनी नजर रखने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी कोई अनहोनी दोबारा न दोहराई जाए।
हाल ही में शुरू हुई थी मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा
बता दें कि इस हादसे का शिकार बनी 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' प्रदेशभर में अपनी आधुनिक सुविधाओं के लिए खासी चर्चाओं में है। इस महत्वाकांक्षी योजना का भव्य शुभारंभ इसी साल 25 सितंबर को भोपाल में किया गया था। इस योजना को राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हरी झंडी दिखाकर जनता को समर्पित किया था।
इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के सात प्रमुख और महत्वपूर्ण शहरों के लिए कुल 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को सड़कों पर उतारा गया है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष रूप से उज्जैन जिले के हिस्से में 10 आधुनिक बसें आई थीं। इसके ठीक दो दिन बाद यानी 27 सितंबर को उज्जैन के ऐतिहासिक महाकाल लोक से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद पीएम ई-बस सेवा और 'उज्जैन दर्शन सेवा' का विधिवत शुभारंभ किया था। ऐसे में, सेवा शुरू होने के कुछ ही हफ्तों के भीतर इस तरह की घटना का सामने आना परिवहन महकमे के लिए चिंता का विषय बन गया है।
इंदौर में भी सामने आ चुका है ई-बस से जुड़ा हादसा
उज्जैन की इस घटना ने लोगों को कुछ दिन पहले इंदौर में घटी एक अन्य दुर्घटना की याद दिला दी है। नई बस सेवाओं के संचालन के ठीक शुरुआती दौर में इंदौर के व्यस्त राजबाड़ा क्षेत्र में भी एक ई-बस हादसे का शिकार हो गई थी। उस दर्दनाक दुर्घटना में एक बेकसूर व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद अब आम नागरिकों के मन में इन इलेक्ट्रिक और सुगम बसों की सुरक्षा को लेकर कई तरह के संशय पैदा हो रहे हैं। बहरहाल, उज्जैन पुलिस और परिवहन विभाग की उच्च स्तरीय जांच के बाद ही यह तस्वीर साफ हो सकेगी कि रामवास में जली इस बस के खाक होने के पीछे की असली तकनीकी या मानवीय भूल क्या थी। प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।