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वाराणसी में 'ऊर्जा वरण' सेमिनार: बिजली बचाने और स्मार्ट तकनीक पर बड़ा मंथन

वाराणसी में 'ऊर्जा वरण' सेमिनार: बिजली बचाने और स्मार्ट तकनीक पर बड़ा मंथन

बनारस की पावन भूमि पर इन दिनों आध्यात्मिक चर्चाओं के साथ-साथ एक बेहद गंभीर और भविष्योन्मुखी तकनीकी मंथन भी सुर्खियों में है। आधुनिक दौर में लगातार बढ़ती बिजली की मांग और पर्यावरण पर इसके विपरीत प्रभावों को थामने के लिए वाराणसी में 'ऊर्जा वरण' सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष तकनीकी सम्मेलन में देश के जाने-माने ऊर्जा विशेषज्ञों, इंजीनियरों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने शिरकत की। कार्यक्रम का मुख्य केंद्रबिंदु यह था कि कैसे आम जनता से लेकर बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान तक ऊर्जा का विवेकपूर्ण इस्तेमाल कर सकते हैं और किस प्रकार आधुनिक तकनीकों के जरिए बिजली की भारी बर्बादी को रोका जा सकता है।

बढ़ती बिजली की मांग और 'ऊर्जा वरण' का विजन

जैसे-जैसे देश का विकास हो रहा है, शहरीकरण और औद्योगीकरण बढ़ रहा है, वैसे-वैसे हमारी ऊर्जा जरूरतें भी रॉकेट की रफ्तार से ऊपर जा रही हैं। इस असंतुलन को पाटने के लिए ही 'ऊर्जा वरण' जैसे आयोजनों की प्रासंगिकता आज के समय में सबसे ज्यादा है। कार्यक्रम के दौरान चर्चा की गई कि केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना ही समाधान नहीं है, बल्कि ऊर्जा का संरक्षण (Energy Conservation) और उसकी दक्षता (Energy Efficiency) सुनिश्चित करना आज की सबसे बड़ी अनिवार्यता है।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल रहे ISHRAE नॉर्थ-1 रीजन के रीजनल डायरेक्टर और गुड़गांव चैप्टर के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि रविशंकर कुमार ने इस दिशा में एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि 'ऊर्जा वरण' का मूल उद्देश्य सिर्फ कागजी योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरकर ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति एक मजबूत जन-जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने बताया कि किस तरह छोटी-छोटी तकनीकी सावधानियां अपनाकर राष्ट्र स्तर पर ऊर्जा की भारी बचत की जा सकती है।

बीईई (BEE) रेटिंग: खरीदारी करते समय इन बातों का रखें खास ख्याल

बाजार में बिकने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की दुनिया इन दिनों काफी बदल चुकी है। सेमिनार में शामिल तकनीकी विशेषज्ञों ने ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के मानकों पर विस्तार से रोशनी डाली। विशेषज्ञों का साफ कहना था कि जब भी आम उपभोक्ता बाजार से एयर कंडीशनर (AC), रेफ्रिजरेटर (Fridge), वाशिंग मशीन या अन्य भारी बिजली खपत वाले उपकरण खरीदें, तो उनकी 'ऊर्जा रेटिंग' (Energy Star Rating) को सबसे पहले जांचें।

  • अधिक स्टार वाले उपकरण शुरुआती तौर पर थोड़े महंगे लग सकते हैं, लेकिन वे लंबी अवधि में बिजली के बिल में भारी कटौती करते हैं।
  • कम ऊर्जा दक्षता वाले पुराने या बिना रेटिंग के उपकरण घर के बिजली बजट को बिगाड़ देते हैं।
  • पारिवारिक बजट को संतुलित रखने के लिए स्मार्ट और ऊर्जा दक्ष उपकरणों का चुनाव ही समझदारी है।

बीआईएस (BIS) मानकों की अनिवार्यता और सुरक्षा

सिर्फ बिजली बचाना ही काफी नहीं है, बल्कि उपकरणों की गुणवत्ता और सुरक्षा भी उतनी ही बड़ी प्राथमिकता है। सेमिनार में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के कड़े मानकों के पालन को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना था कि बाजार में कई बार घटिया स्तर के इलेक्ट्रिकल उपकरण आ जाते हैं जो न केवल ज्यादा बिजली खींचते हैं, बल्कि शॉर्ट सर्किट जैसी बड़ी दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं।

बीआईएस (BIS) के तय मानकों के अनुरूप डिजाइन किए गए उपकरण और प्रणालियां न केवल ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देती हैं, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा का भी पुख्ता कवच तैयार करती हैं। तकनीकी विशेषज्ञों ने अपील की कि हमेशा प्रमाणित और मानक उत्पादों का ही चयन किया जाए।

भवन निर्माण और उद्योगों में एनर्जी एफिशिएंट आर्किटेक्चर

आधुनिक भवनों, कॉमर्शियल मॉल्स और बड़े कारखानों में ऊर्जा का अपव्यय सबसे ज्यादा होता है। इस समस्या से निपटने के लिए सेमिनार में 'ग्रीन बिल्डिंग' और ऊर्जा दक्ष तकनीकों (Energy Efficient Technologies) को अपनाने पर जोर दिया गया। आर्किटेक्ट्स और इंजीनियर्स को सलाह दी गई कि इमारतों का डिजाइन ऐसा तैयार किया जाए जिसमें प्राकृतिक रोशनी (Natural Light) और हवा का अधिकतम उपयोग हो, जिससे दिन के समय कृत्रिम रोशनी और कूलिंग उपकरणों पर निर्भरता कम से कम हो सके।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने माना कि यदि थोड़ी सी तकनीकी सूझबूझ और सही प्रबंधन का परिचय दिया जाए, तो औद्योगिक इकाइयों में होने वाली बिजली की खपत को 20 से 30 प्रतिशत तक आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण से सीधा जुड़ाव

ऊर्जा की बचत का सीधा नाता हमारे पर्यावरण से है। आज भी देश में एक बड़े हिस्से में बिजली का उत्पादन कोयला और जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के जरिए होता है, जिसके जलने से पर्यावरण में भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें फैलती हैं। विशेषज्ञों ने याद दिलाया कि जब हम एक यूनिट बिजली बचाते हैं, तो इसका मतलब है कि हम पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में अपना प्रत्यक्ष योगदान दे रहे हैं।

दिग्गजों की मौजूदगी ने बढ़ाया कार्यक्रम का मान

इस उच्च स्तरीय सेमिनार में देश के विभिन्न हिस्सों से आए तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इस आयोजन को सफल बनाने में आकृति गुप्ता, हरीश साहनी, शरद चंद्र श्रीवास्तव, आदित्य ब्रह्मन, रविशंकर कुमार, वलीउल्ला सिद्दीकी और सुखदा टंडन जैसी जानी-मानी हस्तियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, लखनऊ और दिल्ली से जुड़ी ISHRAE की विशेष टीम के सदस्यों ने भी अपने तकनीकी विचार रखकर इस आयोजन को और अधिक समृद्ध बनाया।

समारोह के अंत में यही निष्कर्ष निकला कि तकनीकी उपायों, सरकारी मानकों (BEE और BIS) के कड़ाई से पालन और आम नागरिकों में जागरूकता के जरिए ही हम एक उज्ज्वल और ऊर्जा-सुरक्षित भविष्य की नींव रख सकते हैं। बनारस से उठा यह संदेश अब देश के अन्य शहरों तक भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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